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इतिहास के पन्ने

इतिहास के पन्ने 60 के दशक में जब भूमापन हुआ और सेटलमेंट करने वाले अधिकारी जैसलमेर के सीमावर्ती

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तृतीये पापसंयुक्ते — पड़ोसी से कलह कर्मनाश और यशहानि का ज्योतिषीय का कारण,

तृतीये पापसंयुक्ते — पड़ोसी से कलह कर्मनाश और यशहानि का ज्योतिषीय का कारण, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 14,

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वृद्धि तिथि एकादशी व्रत-परहेज धर्म

वृद्धि तिथि एकादशी व्रत-परहेज धर्म धर्मसिन्धु, परिच्छेद 2, एकादशी निर्णय श्लोक 9 एकादश्यां यदा वृद्धिर्द्विदिनव्यापिनी भवेत्। परैवोपोषणीया स्यात्

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गंडमूल नक्षत्र : रहस्य, आध्यात्मिक आधार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वास्तविक उपाय

गंडमूल नक्षत्र : रहस्य, आध्यात्मिक आधार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वास्तविक उपाय वैदिक ज्योतिष के अनुसार जो सत्ताईस नक्षत्र

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केमद्रुम दरिद्र योग

केमद्रुम दरिद्र योग स्थिति: चंद्र अकेला, 2-12 खाली, गुरु दृष्टि नहीं।  श्लोक: केमद्रुमे भवेज्जातो मलिनो दुःखपीडितः। भिक्षाशी जायते

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चोरी-भय दरिद्र योग

चोरी-भय दरिद्र योग स्थिति: 4थे में राहु, 2रा स्वामी 8वें।  श्लोक: सुखस्थाने यदा राहुर्धनेशो रन्ध्रगो यदि। चौरभीत्या धनं

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अष्टमंगला प्रश्न वह दर्पण है, जिसमें देव संकेतों द्वारा भविष्य, वर्तमान और बाधाओं का सूक्ष्म प्रतिबिंब दिखाई देता है।

अष्टमंगला प्रश्न वह दर्पण है, जिसमें देव संकेतों द्वारा भविष्य, वर्तमान और बाधाओं का सूक्ष्म प्रतिबिंब दिखाई देता

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भारतीय ज्योतिषियों ने राष्ट्र को कैसे बचाया “पंडित हरदेव शर्मा त्रिवेदी जी को श्रद्धांजलि”

भारतीय ज्योतिषियों ने राष्ट्र को कैसे बचाया “पंडित हरदेव शर्मा त्रिवेदी जी को श्रद्धांजलि” ज्योतिषाचार्यों ने सदैव राष्ट्र

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विश्वकर्मा ब्राह्मण |शिल्पी ब्राह्मण |विश्व ब्राह्मण | शिल्पकर्म एक ब्राह्मण कर्म

विश्वकर्मा ब्राह्मण |शिल्पी ब्राह्मण |विश्व ब्राह्मण | शिल्पकर्म एक ब्राह्मण कर्म आज पुन: यह पोष्ट अपलोड कररहा हुँ

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सप्तम भाव में राहु+मंगल+गुरु+शनि = “महा-चांडाल-विवाद योग” = विवाह-अग्निपरीक्षा

सप्तम भाव में राहु+मंगल+गुरु+शनि = “महा-चांडाल-विवाद योग” = विवाह-अग्निपरीक्षा _सूत्र: सप्तम = जीवनसाथी-विवाह-व्यापार। 4 पाप-गुरु युति = तूफान_

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केतु का तड़प

केतु का तड़प पास दरिया है फिर भी प्यास है।  जैसे दरिया के पास भरपूर मात्रा में पानी

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चतुर्थ भाव + चतुर्थेश +भवन-भूमि योग

चतुर्थ भाव + चतुर्थेश +भवन-भूमि योग बृहत्पाराशर होराशास्त्र 14.10_  `चतुर्थे शुभ-संयुक्ते तदीशे केन्द्र-कोणगे। भौम-शनि-युते दृष्टे गृह-क्षेत्रादि-लाभकृत्॥`  _हिंदी:_ चतुर्थ

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चाणक्य: गुप्तचर तंत्र, अर्थशास्त्र और राष्ट्रनीति का अद्भुत संगम

चाणक्य: गुप्तचर तंत्र, अर्थशास्त्र और राष्ट्रनीति का अद्भुत संगम चाणक्य के बारे में पढ़ने-जानने की कोशिश करेंगे तो

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मोहिनी एकादशी: पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक जागृति का दिव्य पर्व

मोहिनी एकादशी: पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक जागृति का दिव्य पर्व मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण

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अकेलेपन का OTP

अकेलेपन का OTP पुणे के एक व्यस्त बैंक में सुबह भयंकर भीड़ थी। महीने का पहला हफ्ता होने

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अष्टमंगलम प्रश्नम् रहस्यम् | कौड़ी ज्योतिष |  प्रश्न कुंडली पर आधारित विशेष कार्यशाला (1–2 मई)

अष्टमंगलम प्रश्नम् रहस्यम् | कौड़ी ज्योतिष | प्रश्न कुंडली पर आधारित विशेष कार्यशाला (1–2 मई) भारतीय ज्योतिष शास्त्र

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जन्मकुण्डली में यदि शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति को प्राप्त होते हैं, आईये उन्हें जानते हैं-

जन्मकुण्डली में यदि शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति

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कुजावत केतु

कुजावत केतु कुजावत केतु अर्थात केतु मंगल के समान है अथवा केतु मंगल का फल देता है।  

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प्रश्नोत्तर शैली में महाराज भोज द्वारा लिखे गए समरांगणसूत्रधार को पढ़े बिना अधूरा है – वास्तु का ज्ञान

प्रश्नोत्तर शैली में महाराज भोज द्वारा लिखे गए समरांगणसूत्रधार को पढ़े बिना अधूरा है – वास्तु का ज्ञान

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सिद्धि योग

सिद्धि योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में सोलहवें योग ‘सिद्धि’ (Siddhi) के विषय में विस्तार से

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वैधृति योग

वैधृति योग आज हम २७ योगों की इस ज्ञान श्रृंखला के अंतिम पड़ाव पर पहुँच गए हैं।* २७वाँ

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 ऐन्द्र योग

ऐन्द्र योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में छब्बीसवें योग ‘ऐन्द्र’ (Indra) के विषय में विस्तार से

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 ब्रह्म योग

ब्रह्म योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में पच्चीसवें योग ‘ब्रह्म’ (Brahma) के विषय में विस्तार से

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 शुक्ल योग

शुक्ल योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में चौबीसवें योग ‘शुक्ल’ (Shukla) के विषय में विस्तार से

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शुभ योग

शुभ योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में तेईसवें योग ‘शुभ’ (Shubha) के विषय में विस्तार से

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साध्य योग

साध्य योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में बाईसवें योग ‘साध्य’ (Sadhya) के विषय में विस्तार से

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सिद्ध योग

सिद्ध योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में इक्कीसवें योग ‘सिद्ध’ (Siddha) के विषय में विस्तार से

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शिव योग

शिव योग ‘शिव’ का अर्थ होता है – ‘कल्याणकारी’, ‘शुभ’ या ‘मंगलमय’। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य

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परिध योग

परिध योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में उन्नीसवें योग ‘परिघ’ (Parigha) के विषय में विस्तार से

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वरीयान

वरीयान आज हम २७ योगों की श्रृंखला में अठारहवें योग ‘वरीयान’ (Variyana) के विषय में विस्तार से चर्चा

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व्यतिपात योग

व्यतिपात योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में सत्रहवें योग ‘व्यतिपात’ (Vyatipata) के विषय में विस्तार से

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व्याघात योग

व्याघात योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में तेरहवें योग ‘व्याघात’ (Vyaghata) के विषय में विस्तार से

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हर्षण योग

हर्षण योग आज हम २७ योगों की श्रृंखला में चौदहवें योग ‘हर्षण’ (Harshana) के विषय में विस्तार से

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