भारतीय राष्ट्रीय संवत का पहला दिन है, वसन्त विषुव के अगले दिन नवसंवत्सर होता है, प्रतिवर्ष। वसंत विषुव
भारतीय राष्ट्रीय संवत का पहला दिन है, वसन्त विषुव के अगले दिन नवसंवत्सर होता है, प्रतिवर्ष।
भारतीय राष्ट्रीय संवत का पहला दिन है, वसन्त विषुव के अगले दिन नवसंवत्सर होता है, प्रतिवर्ष। वसंत विषुव
गौतम ऋषि ऋग्वेद में गोतम ऋषि का उल्लेख बहुत सम्मान के साथ कई जगह हुआ है, विशेष तौर
अमरत्व का ज्ञान एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से ऐसे गूढ़ ज्ञान देने का अनुरोध किया
अथास्मै प्रोवाच भगवानात्रेयः – इह खल्वग्निवेश ! विंशतिविधाः कृमयः पूर्वमुद्दिष्टा नानाविधेन प्रविभागेनान्यत्र सहजेभ्यः, ते पुनः प्रकृतिभिभिद्यमानाश्चतुविधा भवन्ति । तद्यथा- पुरीषजाः श्लेष्मजाः शोणितजा मळजाचेति ॥९॥
भारत के वीर सपूतों में से एक श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में सभी लोग जानते हैं। बहुत से लोग इन्हें हिन्दू हृदय सम्राट कहते हैं तो कुछ लोग इन्हें मराठा गौरव कहते हैं, जबकि वे भारतीय गणराज्य के महानायक थे।
चार बुढिया थीं।
उनमें विवाद का विषय था
कि हम में से बडी कौन है?
जब वे बहस करते-करते थक गयीं तो उन्होंने तय किया कि पडौस में जो नयी बहू आयी है,
उसके पास चल कर फैसला करवायें।
राहु का प्रभाव दैत्य के समान हैं।जन्म कुंडली में राहु का अत्यधिक बलवान होना नशे की और व्यक्ति का रुझान दर्शाता हैं। जितनी भी बुरी लत हैं, उनका कारक राहु ही हैं। राहु यदि जन्म कुंडली के 1,2,7 तथा 12वें स्थान में स्थित हो तो जातक नशा करने वाला होता हैं। राहु का सबसे अधिक प्रभाव दूसरे स्थान पर होने से पडता हैं। राहु के द्वारा प्रदत नशों में धुम्रपान प्रथम नम्बर पर है।
किस नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे का कैसा भविष्य रहेगा साथ ही कौन से हैं मूल नक्षत्र
अपने मकान में रहने का जो सुख है उसका अलग ही आनंद होता हैं ,अपना मकान कब बनेगा और कैसा बनेगा और कब समय सही हैं मकान के लिए अब इसी विषय पर बात करते है।
अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में छठे स्थान और आठवें स्थान का स्वामी किसी अशुभ ग्रह के साथ स्थित हो तो दुर्घटना होने की संभावना बनती है। वहीं अगर यहां मंगल या शनि ग्रह स्थिति है तो व्यक्ति को रक्त या हड्डी से संबंधित परेशानी हो सकती है।