माघ मास का माहात्म्य बीसवाँ अध्याय वेदनिधि कहने लगे कि हे महर्षि! धर्म को जल्दी ही कहिए क्योंकि
माघ मास का माहात्म्य बीसवाँ अध्याय
माघ मास का माहात्म्य बीसवाँ अध्याय वेदनिधि कहने लगे कि हे महर्षि! धर्म को जल्दी ही कहिए क्योंकि
माघ मास का माहात्म्य उन्नीसवाँ अध्याय वह पाँचों कन्याएँ इस प्रकार विलाप करती हुई बहुत देर प्रतीक्षा करके
माघ मास का माहात्म्य अठारहवाँ अध्याय श्री वशिष्ठ ऋषि कहने लगे कि हे राजन! मैंने दत्तात्रेयजी द्वारा कहा
माघ मास का माहात्म्य सत्रहवाँ अध्याय अप्सरा कहने लगी कि हे रा़क्षस! वह ब्राह्मण कहने लगा कि इंद्र
माघ मास का माहात्म्य सोलहवाँ अध्याय कार्तवीर्य कहने लगा कि हे भगवान! वह राक्षस कौन था? और कांचन
माघ मास का माहात्म्य पंद्रहवाँ अध्याय दत्तात्रेयजी कहने लगे कि हे राजन! प्रजापति ने पापों के नाश के
माघ मास का माहात्म्य चौदहवाँ अध्याय कार्तवीर्य जी बोले कि हे विप्र श्रेष्ठ! किस प्रकार एक वैश्य माघ
माघ मास का माहात्म्य तेरहवाँ अध्याय विकुंडल कहने लगा कि तुम्हारे वचनों से मेरा चित्त अति प्रसन्न हुआ
माघ मास का माहात्म्य बारहवाँ अध्याय यमदूत कहने लगा कि जो कोई प्रसंगवश भी एकादशी के व्रत को
माघ मास का माहात्म्य ग्यारहवाँ अध्याय यमदूत कहने लगा कि हे वैश्य! मनुष्य को सदैव शालिग्राम की शिला