माघ मास का माहात्म्य दसवाँ अध्याय यमदूत कहने लगे कि हे वैश्य! एक बार भी गंगाजी में स्नान
माघ मास का माहात्म्य दसवाँ अध्याय
माघ मास का माहात्म्य दसवाँ अध्याय यमदूत कहने लगे कि हे वैश्य! एक बार भी गंगाजी में स्नान
माघ मास का माहात्म्य नवाँ अध्याय यमदूत कहने लगे मध्याहन के समय आया अतिथि, मूर्ख, पंडित, वेदपाठी या
माघ मास का माहात्म्य आठवाँ अध्याय यमदूत कहने लगा कि तुमने बड़ी सुंदर वार्ता पूछी है। यद्यपि मैं
माघ मास का माहात्म्य सातवाँ अध्याय चित्रगुप्त ने उन दोनों के कर्मों की आलोचना करके दूतों से कहा
माघ मास का माहात्म्य छठवाँ अध्याय पूर्व समय में सतयुग के उत्तम निषेध नामक नगर में हेमकुंडल नाम
माघ मास का माहात्म्य पाँचवाँ अध्याय दत्तात्रेय जी कहते हैं कि हे राजन! एक प्राचीन इतिहास कहता हूँ।
माघ मास का माहात्म्य चौथा अध्याय श्री वशिष्ठजी कहने लगे कि हे राजन! अब मैं माघ के उस
माघ मास का माहात्म्य तीसरा अध्याय तब राजा दिलीप कहने लगे कि महाराज यह पर्वत कितना ऊँचा और
माघ मास का माहात्म्य दूसरा अध्याय राजा के ऐसे वचन सुनकर तपस्वी कहने लगा कि हे राजन्! भगवान
माघ मास का माहात्म्य पहला अध्याय एक समय श्री सूतजी ने अपने गुरु श्री व्यासजी से कहा कि