• राहु जिस भाव में है उसे भाव के लिए है पागलपन ।
• केतु जिस भाव में है उसे भाव में है खोज।
• शनि से तीसरे भाव में है अग्नि परीक्षा
• शुक्र से सप्तम भाव है आनंद दिलाने वाला भात।
गहरे सूत्र
• राहु जिस भाव में है उसे भाव के लिए है पागलपन ।
• केतु जिस भाव में है उसे भाव में है खोज।
• शनि से तीसरे भाव में है अग्नि परीक्षा
• शुक्र से सप्तम भाव है आनंद दिलाने वाला भात।
जैसे बीज में छिपा वृक्ष दिखाई नहीं देता, दूध में घी मौजूद होते हुए भी दिखाई नहीं देता, तिल में तेल दिखाई नहीं देता, फूल की खुशबू दिखाई नहीं देती, शरीर में होने वाली पीड़ा दिखाई नहीं देती, अपनी बुराई दिखाई नहीं देती, वैसे ही ईश्वर सर्वत्र व्यापक रूप से विद्यमान होने पर भी दिखाई नहीं देता।
१. शिव पूजा उपासनांतर्गत पिंडीकी पूजा
१ अ. शिवपिंडी की परिक्रमा कैसे करें ?
१ आ. शिवपिंडी की परिक्रमा करते समय अरघा के स्त्रोत को क्यों नही लांघते ?
१ इ. पिंडी को स्नान कराना
१ ई. शिवपिंडी पर हलदी-कुमकुम चढाने की अपेक्षा पिंडी को भस्म क्यों लगाएं ?
एक आदमी सच में एक कटोरी पानी पक्षियों के लिए रखता है और आगे क्या होता है?
उन पक्षियों और उस आदमी के बीच क्या संवाद हुआ? इसका वर्णन नीचे दी गई कविता में किया गया है।
सपने में कुलदेवता-कुलदेवी को देखना शुभ या अशुभ दोनों सपने हो सकते है। अगर आपको अपने कुलदेवता या कुलदेवी से अच्छे संकेत मिलते है तब यह आपके के लिए शुभ सपना है। जैसे सपने में कुलदेवी या कुलदेवता का आशीर्वाद मिलना। सपने में कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा, आरती करना। सपने में कुलदेवी या कुलदेवता मूर्ति देखना। सपने में कुलदेवी या कुलदेवता का दर्शन होना। सपने में
मित्रों, 🕉भगवान् श्री रामजी ने विभीषणजी को कहा है कि नौ जगह मनुष्य की ममता रहती है, माता, पिता, भाई, पुत्र, स्त्री, शरीर, धन, घर, मित्र और परिवार में, जहाँ जहाँ हमारा मन डूबता है वहाँ वहाँ हम डूब जाते हैं, इन सब ममता के धांगो को बट कर एक रस्सी बना।
ब्रह्मांड में छिपे हुए रहस्य [ नोट – यह युग 18000 ईसा पूर्व तक और भी पीछे जा
श्रीलक्ष्मण मन्दिर खजुराहो पंचायतन शैली का यह सांघार प्रसाद, विष्णु को समर्पित है। बलुवे पत्थर से निर्मित, भव्य:
शीतला सप्तमी हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख व्रत और पर्व है। यह व्रत माता शीतला देवी को समर्पित होता है, जिन्हें रोगों से बचाने वाली और शुद्धता प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। विशेष
अभी तक आपको यही पढ़ाया गया है कि न्यूटन जैसे महान वैज्ञानिक ही कैलकुलस, खगोल विज्ञान अथवा गुरुत्वाकर्षण के नियमों के जनक हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इन सभी वैज्ञानिकों से कई वर्षों पूर्व पंद्रहवीं सदी में दक्षिण भारत के स्वामी ज्येष्ठदेव ने ताड़पत्रों पर गणित के ये तमाम सूत्र लिख रखे हैं. इनमें से कुछ सूत्र ऐसे भी हैं, जो उन्होंने अपने गुरुओं से सीखे थे, यानी गणित का यह ज्ञान उनसे भी पहले का है, परन्तु लिखित स्वरूप में नहीं था.