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कभी-कभी डूबना सिखाता है जीने की असली कीमत

एक आदमी अपने बंदर के साथ नाव में यात्रा कर रहा था।

उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था।

बंदर ने पहले कभी नाव में यात्रा नहीं की थी, इसलिए वह असहज था।
वह चिल्ला रहा था, ऊपर-नीचे कूद रहा था और नाव में किसी को भी शांत बैठने नहीं दे रहा था।

नाविक इससे परेशान हो गया था और यात्रियों की घबराहट से उसे डर था कि कहीं नाव डूब न जाए।

अगर बंदर शांत नहीं हुआ तो वह नाव डुबो देगा।

वह आदमी भी इस स्थिति से बेचैन था, लेकिन उसे बंदर को शांत करने का कोई तरीका नहीं मिल रहा था।

दार्शनिक यह सब देख रहा था और उसने मदद करने का फैसला किया।

उसने कहा:
“अगर आप अनुमति दें, तो मैं इस बंदर को घर की बिल्ली की तरह शांत कर सकता हूँ।”

वह आदमी तुरंत मान गया।

दार्शनिक ने दो यात्रियों की मदद से बंदर को उठाया और नदी में फेंक दिया।

पानी में गिरते ही बंदर डर गया और तैरने के लिए जोर-जोर से हाथ-पैर मारने लगा।

अब वह लगभग मरने की हालत में था और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था।

कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर फिर से नाव में चढ़ा लिया।

बंदर अब पूरी तरह शांत हो गया और जाकर एक कोने में बैठ गया।

बंदर के इस बदले हुए व्यवहार को देखकर वह आदमी और सभी यात्री हैरान रह गए।

उस आदमी ने दार्शनिक से पूछा:
“पहले वह कूद-फांद कर रहा था, अब वह पालतू बिल्ली की तरह शांत बैठा है। ऐसा क्यों?”

दार्शनिक ने कहा:
“जब मैंने इस बंदर को पानी में फेंका, तब उसे पानी की ताकत, अपनी जान की कीमत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गई।”

जो लोग भारत में हर बात की आलोचना, टिप्पणी और विरोध करते हुए उछल-कूद मचाते रहते हैं, उन्हें उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सीरिया, इराक, फिलिस्तीन, पाकिस्तान, श्रीलंका या चीन में 6 महीने के लिए भेज देना चाहिए।

फिर वे भारत लौटकर अपने आप शांत हो जाएंगे और देश को आगे बढ़ने देंगे।

भारत में रहकर भारत को ही बदनाम करने वाले सभी लोगों को समर्पित। 😌😉🇮🇳🚩

सिद्धि योग

वैधृति योग

 ऐन्द्र योग

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