
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 14, श्लोक 10
तृतीये पापसंयुक्ते ज्ञातिभिः कलहो भवेत्। तेन कर्मविनाशः स्यात् यशोहानिश्च जायते॥
अर्थात जब तृतीय भाव पाप ग्रहों से युक्त हो जाए तो अपने ही बंधु बांधवों से कलह होती है। उसी से काम बिगड़ता है और यश की हानि होती है।
तृतीय भाव पड़ोसी का स्थान है, छोटे भाई बहन का स्थान है, पराक्रम का स्थान है, संवाद का स्थान है, लेखन का स्थान है, छोटी यात्राओं का स्थान है। मंगल, शनि, राहु, केतु यदि तृतीय में बैठ जाएँ, या तृतीयेश छठे, आठवें, बारहवें भाव में नीच राशि में या शत्रु राशि में चला जाए, तो पड़ोसियों से सीमा को लेकर, नाली को लेकर, दीवार को लेकर, रास्ते को लेकर रोज का झगड़ा खड़ा हो जाता है। तृतीय भाव के दूषित होने से वाणी में कठोरता आ जाती है, साहस भी गलत दिशा में लगने लगता है। दशम भाव कर्म और नौकरी का घर है। पड़ोसी से बैर सीधे दशम को बिगाड़ देता है, क्योंकि आपकी बातचीत, आपकी सार्वजनिक छवि धूमिल हो जाती है। पुलिस वेरिफिकेशन में पड़ोसी ही गवाह बनता है। यदि कोई केस चल रहा हो तो सरकारी नौकरी, पासपोर्ट, वीजा, बैंक लोन सब एक साथ अटक जाता है।
फलदीपिका, अध्याय 7, श्लोक 13
तृतीयेशे रिपुस्थाने पापदृष्टे च दुर्बले। ज्ञातिवैरं भवेत्तस्य कर्मनाशस्ततः क्रमात्॥
यदि तृतीय का स्वामी छठे भाव में चला जाए, पाप ग्रहों से देखा जाए और निर्बल हो, तो जातक को अपने ही लोगों से शत्रुता मिलती है। उस शत्रुता से धीरे धीरे काम का नाश होता है।
तृतीयेश छठे में पहुँच जाए तो पड़ोसी ही शत्रु बन जाता है। छठा भाव मुकदमे का है, रोग का है, कर्ज का है। पड़ोसी न्यायालय में केस कर देता है, उसी केस की तारीख और कार्यालय की महत्वपूर्ण बैठक एक ही दिन टकरा जाती है। बार बार छुट्टी लेनी पड़ती है, वेतन कटता है, बॉस नाराज होता है। राहु तृतीय में हो तो पड़ोसी तंत्र मंत्र, टोना टोटका करता है, घर में अशांति रहती है, कार्यालय में मन नहीं लगता, काम में भूलें होती हैं। बुध पीड़ित हो तो पड़ोसी झूठी अफवाह फैलाता है, चरित्र पर दाग लगाता है, वही बात धीरे धीरे विभाग तक पहुँच जाती है।
सारावली, अध्याय 32, श्लोक 29
कुजे तृतीयगे क्रूरे विवादो गृहमध्यतः। शनिना सहिते तत्र दण्डो राजकुलाद् भवेत्॥
क्रूर मंगल तृतीय में हो तो घर के भीतर से ही विवाद उठता है। यदि शनि भी साथ हो तो राजदरबार से दंड मिलता है।
मंगल तृतीय में हो तो हाथ उठ जाता है, डंडा चल जाता है। शनि साथ आ जाए तो बात पुलिस, थाने और जेल तक पहुँच जाती है। डंडा मंगल का प्रतीक है, बाँस शनि का प्रतीक है। बाँस का डंडा सीमा पर गाड़ दिया जाए तो भूमि विवाद जन्म लेता है। यही विवाद आगे चल कर सेवा पुस्तिका में दर्ज हो जाता है। सरकारी शिक्षक हो, क्लर्क हो, अधिकारी हो, सबकी सीआर पड़ोसी की रिपोर्ट से बनती और बिगड़ती है। केतु तृतीय में हो तो पड़ोसी अचानक एफआईआर करवा देता है, कारण समझ में भी नहीं आता। नौकरी निलंबित हो जाती है।
मेष राशि तृतीय में हो और मंगल अष्टम में हो तो पड़ोसी से रक्तरंजित संघर्ष होता है, हथियार तक चल जाता है, नौकरी पर आपराधिक धारा लग जाती है। मिथुन तृतीय में हो और बुध राहु से युत हो तो पड़ोसी कागजों में हेरफेर करता है, जाली हस्ताक्षर से जमीन हड़पता है, उसी कागज को आधार बना कर कार्यालय में शिकायत कर देता है। कन्या तृतीय में हो और शनि की दृष्टि पड़े तो नाली, कूड़ा, सफाई को लेकर रोज कलह होती है, मानसिक तनाव से काम में त्रुटि होती है। मकर तृतीय में हो और शनि वक्री हो तो बाँस की बल्ली, खेत की मेड़, बिजली के खंभे को लेकर पीढ़ियों तक केस चलता है। कुंभ तृतीय में हो और राहु हो तो बिजली, पानी, केबल, वाई फाई को लेकर झगड़ा होता है, कार्यालय में भी तकनीकी गड़बड़ी का आरोप आप पर लगता है। आर्द्रा नक्षत्र में तृतीयेश हो तो पड़ोसी रो रो कर झूठा आरोप लगाता है, बात महिला आयोग और मानवाधिकार तक चली जाती है। विशाखा नक्षत्र में मंगल हो तो दो मुँह वाली बात होती है, पड़ोसी सामने मीठा बोलता है पीछे छुरा घोंपता है। मूल नक्षत्र में शनि हो तो जमीन की जड़, नींव, बाँस के खूँटे पर मुकदमा बीस साल तक खिंचता है।
महाभारत, सभा पर्व, अध्याय 62, श्लोक 11
न तत् परस्य संदध्यात् प्रतिकूलं यदात्मनः। ज्ञातिभिः विग्रहो यत्र तत्र श्रीर्विनश्यति॥
जो बात अपने को बुरी लगे वह दूसरों के साथ नहीं करनी चाहिए। जहाँ अपने बंधुओं से विग्रह होता है वहाँ लक्ष्मी नष्ट हो जाती है।
कौरव और पांडव पड़ोसी राज्य थे, भाई थे। दुर्योधन ने जमीन के बँटवारे पर कलह की, लाक्षागृह बनवाया, द्यूत खेला। परिणाम यह हुआ कि राजपाट गया, कुल का नाश हुआ, यश मिट्टी में मिल गया। धर्मराज युधिष्ठिर को भी वनवास भोगना पड़ा। शिक्षा यही है कि पड़ोसी भाई से बैर राजा को भी रंक बना देता है। नौकरी करने वाले के लिए पड़ोसी से शत्रुता सीधे सीआर खराब करती है। पुलिस वेरिफिकेशन में वही लिख देता है कि झगड़ालू है, शांति भंग करता है। प्रमोशन, पासपोर्ट, ठेकेदारी सब रुक जाती है।
तृतीय भाव छोटी यात्रा का है। कार्यालय जाना भी छोटी यात्रा है। तृतीय दूषित हो तो रास्ते में दुर्घटना, देरी, पंचायत और मन खराब होता है। कार्यालय पहुँचते ही बॉस से बहस हो जाती है। द्वितीय भाव वाणी का है। पड़ोसी से रोज लड़ोगे तो वाणी में कर्कशता और अपशब्द आ जाएँगे। वही वाणी ग्राहक पर, छात्र पर, जनता पर निकलती है। नौकरी चली जाती है। चतुर्थ भाव मन का है। पड़ोसी से कलह हो तो मन अशांत रहता है, नींद नहीं आती, चिड़चिड़ापन रहता है। मन खराब तो काम खराब। शनि तृतीय में हो तो पड़ोसी विभाग में है या नेता है, वही गुप्त रिपोर्ट देता है। आपका इंक्रीमेंट रुक जाता है। सूर्य दशम में हो पर तृतीय भाव गंदा हो तो सरकार कृपा करना चाहती है पर लोक निंदा रोक देती है।
ज्ञाति कलह योग, मंगल और शनि तृतीय में हों, तृतीयेश बारहवें में हो तो पड़ोसी से मारपीट होती है, 107-116 की पाबंदी लगती है, नौकरी में जाँच बैठ जाती है। परिहार, मंगलवार को हनुमान जी को चमेली तेल का दीपक अर्पित करें, सात बार हनुमान चालीसा पढ़ें, लाल मसूर का दान करें, बाँस डंडा घर से हटा दें। वाणी हानि योग, बुध नीच होकर तृतीय में हो, राहु से युत हो तो पड़ोसी चुगली करके बॉस के कान भरता है, मेमो मिलता है। परिहार, बुधवार को गाय को हरा चारा दें, दो घंटे मौन रखें, गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें, हरे मूंग का दान करें। गुप्त शत्रु योग, राहु तृतीय में हो, षष्ठेश दशम में हो तो पड़ोसी तंत्र करता है, कार्यालय में फाइल गुम होती है, आरोप आप पर आता है। परिहार, शनिवार को काले तिल, सरसों तेल, पीपल पर दीपक जलाएँ, काले कुत्ते को रोटी खिलाएँ। स्थान भ्रंश योग, केतु चतुर्थ में हो, मंगल तृतीय में हो तो पड़ोसी से झगड़े के कारण मकान बेचना पड़ता है, ट्रांसफर दूर दराज होता है। परिहार, मंगलवार को सुंदरकांड करें, घर के नैऋत्य में भारी वजन रखें, ईशान को साफ रखें।
अथर्ववेद, कांड 6, सूक्त 73, मंत्र 1
सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥
मैं तुम्हें एक हृदय वाला, एक मन वाला, द्वेष रहित बनाता हूँ। एक दूसरे से वैसे प्रेम करो जैसे गाय अपने नवजात बछड़े से करती है।
विधि, प्रतिदिन प्रातः पड़ोसी का नाम लेकर ग्यारह बार इस मंत्र से जल छिड़कें, पूर्व मुख होकर करें। संख्या, तैंतालीस दिन। इससे तृतीय भाव शुद्ध होता है, मंगल शनि शांत होते हैं। पड़ोसी मित्र बनता है, कोर्ट केस वापस हो जाता है। वाणी मीठी होती है, कार्यालय का वातावरण सुधरता है।
बगलामुखी तंत्र, पटल 1, श्लोक 16
विवादे व्यवहारेषु राजद्वारे च संकटे। पीताम्बरधरां देवीं बगलां संस्मरेत् सुधीः॥
विवाद में, मुकदमे में, और राजद्वार के संकट में बुद्धिमान को पीतांबर धारण करने वाली देवी बगला का स्मरण करना चाहिए।
मंत्र, ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा। विधि, मंगलवार को हल्दी की माला, पीला वस्त्र, पीला आसन, एक सौ आठ बार जप। संख्या, छत्तीस दिन में तीन हजार आठ सौ अठासी जप। इससे पड़ोसी की जुबान रुकती है, झूठी शिकायत रुकती है, अधिकारी की कलम रुकती है। एफआईआर रद्द होती है, निलंबन बहाल होता है।
श्री राम रक्षा स्तोत्र, श्लोक 9
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥
विधि, प्रतिदिन प्रातः कार्य पर जाने से पहले राम रक्षा स्तोत्र का एक पाठ करें। संख्या, एक सौ आठ दिन। इससे सूर्य और दशम बलवान होते हैं, सरकारी भय समाप्त होता है, नौकरी में रक्षा कवच बनता है। ट्रांसफर और प्रमोशन समय पर होते हैं।
अथर्ववेद मंत्र से पड़ोसी मित्र बनता है, मुकदमा समाप्त होता है, वाणी में मधुरता आती है। तृतीय भाव शुभ होता है, संवाद अच्छा होता है, बॉस और ग्राहक प्रसन्न रहते हैं। बगलामुखी से शत्रु स्तंभन होता है, झूठी एफआईआर रद्द होती है, विभागीय जाँच में क्लीन चिट मिलती है। जिसने कलह शुरू की वही क्षमा माँगता है। राम रक्षा से राजकृपा मिलती है, सीआर में उत्कृष्ट लिखा जाता है। इंक्रीमेंट, पेंशन, ग्रेच्युटी सुरक्षित रहती है। इन तीनों से तृतीय भाव भाई बनता है, चतुर्थ भाव शांति देता है, दशम भाव कुर्सी बचाता है।
घर में टूटी दीवार, सीलन, बाँस, जंग लगा सरिया, फटी बल्ली मत रखो। नैऋत्य कोण भारी रखो, ईशान स्वच्छ रखो, आग्नेय में रसोई रखो। पड़ोसी को त्यौहार पर मिठाई दो, सुख दुख में साथ खड़े रहो। कार्यालय समय पर जाओ, फाइल पूरी रखो। बॉस से बहस मत करो, वही सूर्य है। पड़ोसी को प्रणाम करो, वही राहु है। सबसे बड़ा नियम, तृतीय भाव सुधरा तो दशम सुधरेगा। पड़ोसी सुधरा तो नौकरी सुधरेगी। कलह छोड़ो, करियर बच जाएगा। कलम की ताकत डंडे से हजार गुना अधिक है। जहाँ समझदारी है वहाँ स्थायी नौकरी है।