
कामयाबी एक ऐसा शब्द है जो मन में ख़ुशी की लहर पैदा कर देता है।जब अच्छे कामयाब व्यक्ति होता है या हो जाता है तब जीवन में दुश्मन नही मित्रो से जैसा व्यवहार करने लगते है जीवन खुशियों से भर जाता है।आज इसी विषय पर बात करते है कि कब कामयाबी मिलेगी और मिलेगी भी या नही और मिलेगी तो कितनी कामयाबी कैरियर में मिलना लिखा है और कब तक।
कुंडली का 9वां+10वां+दूसरा और ग्यारहवाँ भाव कामयाबी की स्थिति बता देता है क्योंकि 9वां भाव भाग्य है तो दसवाँ भाव कैरियर/कामयाबी तो दूसरा+ग्यारहवाँ भाव धन-वृद्धि/धनलाभ का है तो लग्न स्वयम जातक/जातिका है।अब जिन भी जातक जातिकाओ की कुंडली में यह उपरोक्त भाव स्वामी अच्छी स्थिति में होंगे, किसी राजयोग में होंगे या किसी भी तरह बलवान+शुभ स्थिति में रहेगे तब कामयाबी कदम चूमेगी, अब कामयाबी का समय कब होगा इसको समझते है।
जब इन्ही उपरोक्त भाव के स्वामियों की दशा चलेगी या शुभ फल कारक किसी भी ग्रह की दशाओं के साथ उपरोक्त कामयाबी वाले भावो की दशाएं आयेगी तब कामयाबी मिलेगी, जैसे किस्मत का साथ, भाग्योदय, धन वृद्धि, मान-सम्मान वृद्धि , अच्छा सामाजिक और जीवन आदि।अब इस बात को और आसान तरह से समझने के लिए कुछ उदाहरणों से समझते है:-
उदाहरण_अनुसार_कर्क_लग्न1:-
जैसे कर्क लग्न में मंगल कैरियर/सफलता दसवे भाव स्वामी है तो गुरु 9वे भाव भाग्य का तो सूर्य शुक्र धनलाभ कारक तब यह चारो अच्छी स्थिति बनाकर बैठे या इनका आपसी सूर्य गुरु मंगल शुक्र का सम्बन्ध बन जाये और यह सभी ग्रह बलवान स्थिति में रहे तब कामयाबी कदम चूमेगी और जातक अच्छे स्टेट्स वाला जीवन जीयेगा, जैसे की इन उपरोक्त ग्रहो की दशाएं आयेगी कामयाबी बड़ी मात्रा में मिलेगी।।
उदाहरण_अनुसार_कन्या_लग्न2:-
कन्या लग्न में 9वे और दूसरे भाव का स्वामी शुक्र तो 10वे भाव का स्वामी बुध होता है तो ग्यारहबे भाव का स्वामी चन्द्र होता है।अब यहाँ बुध शुक्र और चन्द्र खासकर बुध् शुक्र राजयोग बनाकर बैठे या अच्छी स्थिति में बलवान होकर बैठे जैसे भाग्य स्वामी शुक्र 9वे भाव में ही हो और दसवे भाव स्वामी बुध दसवे भाव में बैठे और 11वे भाव(धनलाभ) स्वामी भी जैसे चन्द्र यहाँ गुरु शुक्र या बुध के साथ सम्बन्ध में रहे तब ऐसी स्थिति में अच्छी कामयाबी जीवन में मिलेगी सामाजिक, आर्थिक ,रोजगरिक आदि स्टेटस सब तरह से अच्छी स्थिति बनेगी , अनुकूल ग्रहो का समय शुरू होने पर।।
इस सब स्थिति में उपरोक्त कामयाबी देने के लिए ग्रह बैठे होने के साथ वर्तमान और भविष्य में आने वाली ग्रहदशा जब अच्छी मिलेगी तब ही कामयाबी मिलेगी किन्तु हो सकता है किसी कारण से ग्रहदशाये शुभ और अनुकूल न मिल रही हो तब कामयाबी मिलने में दिक्कते होगी ऐसी स्थिति में ग्रहदशाओ को उपाय करके शुभ बनाकर कामयाबी प्राप्त की जा सकती है।कामयाबी जब मिलती है तब जीवन जीने का आनंद ही अलग होता है।इस तरह से कामयाबी का है या नही और है तो कितनी ,कब तक? यह जातक/जातिका की कुंडली पर निर्भर करेगा।।