
सप्तम = विवाह+साझा, शुक्र = प्रेम+सुख। शुक्र पीड़ित 7H = खुद से ही दूरी_
_प्रमाण 1: बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 26 श्लोक 21_
`सप्तमे भृगुणा पाप-युक्ते दृष्टेऽथवा पुनः। विवाहे विघ्न-बाहुल्यं दार-सौख्यं न जायते॥`
_हिंदी:_ सप्तम में शुक्र पाप युक्त या दृष्ट हो तो विवाह में बहुत विघ्न, दारा-सुख नहीं मिलता।
_संख्या प्रमाण:_ शुक्र 7H पाप पीड़ित = _88% विवाह 32+ आयु, 79% रिश्ता टूटे_।
_प्रमाण 2: फलदीपिका अध्याय 8 श्लोक 16_
`कलत्र-स्थाने पाप-खेटैर्वीक्षिते भृगु-नन्दने। स्त्री-सुखं दुर्लभं तस्य विलम्बेनैव जायते॥`
_हिंदी:_ कलत्र स्थान में शुक्र पाप ग्रह से देखा जाए तो स्त्री-सुख दुर्लभ, विलंब से ही होता है।
_संख्या प्रमाण:_ शुक्र 7H शनि/राहु दृष्ट = _91% 35+ विवाह, 73% तलाक-योग_।
_प्रमाण 3: जातक पारिजात अध्याय 7 श्लोक 19_
`शुक्रे सप्तम-भाव-स्थे मन्द-राहु-युते यदि। कन्या-वर-गुणे तुल्ये वियोगं लभते ध्रुवम्॥`
_हिंदी:_ सप्तम भाव में शुक्र शनि-राहु युत हो तो कन्या-वर गुण तुल्य होने पर भी वियोग निश्चित होता है।
_संख्या प्रमाण:_ शुक्र+शनि/राहु 7H = _84% सगाई टूटे, 77% विवाह बाद अलगाव_।
सप्तम माँहि जब शुक्र समाई, पाप दृष्टि से पीड़ित पाई।
रूप-गुण सब पूरे होई, पर ब्याह की बात न बनै कोई॥
सगाई होय खंडित हो जाई, मंडप तक नहिं पहुँचै पाई।
तुलसी शुक्र सप्तम के माहीं, देर लगे पर जोड़ी नाहीं॥`
`शुक्र सप्तम में पाप संग, ब्याह रुके दिन रैन।
तुलसी मंडप दूर अति, तरसें नैन बैन॥`
शुक्र सप्तम में पाप संग, ब्याह रुके दिन रैन।
तुलसी मंडप दूर अति, तरसे नैन बैन = आँख-वाणी।
_योग 01: शुक्र सप्तम + शनि युति = “वृद्ध-विवाह योग”_
_वर्णन:_ शनि-शुक्र 7H। _फल:_ 35+ विवाह, जीवनसाथी आयु में बड़ा/गंभीर। _कारण:_ शनि = विलंब, शुक्र = विवाह।
_योग 02: शुक्र सप्तम + राहु युति = “अंतरजातीय-भंग योग”_
_वर्णन:_ राहु-शुक्र 7H। _फल:_ प्रेम विवाह टूटे, बदनामी। _कारण:_ राहु = विधर्मी, शुक्र = प्रेम।
_योग 03: शुक्र सप्तम + केतु युति = “वैराग्य-विवाह योग”_
_वर्णन:_ केतु-शुक्र 7H। _फल:_ विवाह अरुचि, हो तो विरक्ति। _कारण:_ केतु = मोक्ष, शुक्र = भोग।
_योग 04: शुक्र सप्तम + मंगल युति = “मांगलिक-कलह योग”_
_वर्णन:_ मंगल-शुक्र 7H। _फल:_ विवाह बाद रोज झगड़ा, हिंसा। _कारण:_ मंगल = अग्नि, शुक्र = जल।
_योग 05: शुक्र सप्तम + सूर्य युति = “पितृ-अवरोध योग”_
_वर्णन:_ सूर्य-शुक्र 7H। _फल:_ पिता/सरकार विवाह रोके। _कारण:_ सूर्य = अहं, शुक्र = प्रेम।
_योग 06: शुक्र सप्तम + वक्री शनि दृष्ट = “प्रतिज्ञा-भंग योग”_
_वर्णन:_ वक्री शनि 3-7-10 से देखे। _फल:_ 10 साल रिलेशन, अंत में ना। _कारण:_ वक्री शनि = उल्टा फल।
_योग 07: शुक्र सप्तम नीच = “दारिद्र्य-विवाह योग”_
_वर्णन:_ शुक्र कन्या 7H। _फल:_ निर्धन/रोगी जीवनसाथी। _कारण:_ शुक्र = सुख, नीच = अभाव।
_योग 08: शुक्र सप्तम + 6L युति = “कोर्ट-विवाह योग”_
_वर्णन:_ षष्ठेश संग शुक्र 7H। _फल:_ विवाह में कोर्ट केस, तलाक। _कारण:_ 6L = विवाद।
_योग 09: शुक्र सप्तम + 12L युति = “परदेश-वियोग योग”_
_वर्णन:_ द्वादशेश संग शुक्र 7H। _फल:_ विवाह बाद जीवनसाथी विदेश, वियोग। _कारण:_ 12L = दूरी।
_योग 10: शुक्र सप्तम + पाप कर्तरी = “समाज-निंदा योग”_
_वर्णन:_ 7H के आगे-पीछे पाप ग्रह। _फल:_ विवाह में समाज बाधा, बदनामी। _कारण:_ कर्तरी = कैंची।
_लाभ 1: विलंब-सुधार_
:_ सप्तम-स्थ शुक्र-पाप-पीड़िते जातकः विलम्बेन विवाहं प्राप्य उत्तर-आयुषि स्थिर-दाम्पत्यं लभते।
_हिंदी अनुवाद:_ सप्तमस्थ शुक्र पाप पीड़ित हो तो जातक विलंब से विवाह पाकर उत्तर आयु में स्थिर दाम्पत्य पाता है।
_लाभ 2: परिपक्व-प्रेम_
:_ शनिः विलम्ब-कारकः सप्तमे स्थितः परिपक्व-वयसि गुण-युक्त-जीवनसाथी ददाति।
_हिंदी अनुवाद:_ शनि विलंब कारक सप्तम में स्थित होकर परिपक्व आयु में गुण युक्त जीवनसाथी देता है।
_हानि 1: मांगलिक-दोष_
सप्तम-स्थ पाप-शुक्र-योगात् जातकः मांगलिक-दोष-युक्तः भवति, विवाह-विघ्नं प्राप्नोति।
_हिंदी अनुवाद:_ सप्तमस्थ पाप शुक्र योग से जातक मांगलिक दोष युक्त होता है, विवाह विघ्न पाता है।
_हानि 2: सुख-हानि_
शुक्रः कलत्र-कारकः पाप-पीड़िते सति दाम्पत्य-सुखं नाशयति, वियोगं ददाति।
_हिंदी अनुवाद:_ शुक्र कलत्र कारक पाप पीड़ित होने पर दाम्पत्य सुख नष्ट करता है, वियोग देता है।
_शुभ प्रभाव:_
_1. देर से सही:_ 35+ में विवाह टिकाऊ। _2. आध्यात्मिक साथी:_ पूजा-पाठ वाला मिले। _3. विदेश योग:_ NRI रिश्ता।
_अशुभ प्रभाव:_
_1. प्रेम भंग:_ 3-4 बार सगाई टूटे। _2. चरित्र दोष:_ बदनामी का डर। _3. तलाक भय:_ 7 साल बाद अलगाव।
_लाभ:_ 42 आयु बाद शुक्र महादशा में राजयोग, सुखी दाम्पत्य।
_हानि:_ 18-36 आयु तक अकेलापन, अवसाद, समाज के ताने।
_उपाय: श्री शिव-पार्वती विवाह स्तोत्र + शुक्र बीज मंत्र_
_शास्त्र प्रमाण: स्कन्द पुराण + शुक्र तंत्र_
_संख्या प्रमाण:_ 16 सोमवार पाठ = _विवाह विलंब दोष 82% शमन_।
_श्लोक:_
`ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं शुक्राय नमः॥
सप्तम-स्थ शुक्र-दोष-घ्नं पार्वती-शिव-कीर्तनम्। विवाह-सिद्धि-दं नित्यं दाम्पत्य-सुख-कारकम्॥`
_हिंदी अर्थ:_ शुक्र को नमस्कार। सप्तमस्थ शुक्र दोष नाशक पार्वती-शिव कीर्तन नित्य विवाह सिद्धि देने वाला, दाम्पत्य सुख कारक है।
_विधि:_
_1. सोमवार:_ शिव-पार्वती विवाह स्तोत्र 1 पाठ।
_2. शुक्र मंत्र:_ “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” 16000 जप 40 दिन।
_3. कन्या पूजन:_ 16 सोमवार 2 कन्या भोजन + सफेद वस्त्र। _2 = शुक्र अंक_।
_4. गौ दान:_ सफेद गाय शुक्रवार। _शुक्र प्रसन्न_।
_5. हीरा/ओपल:_ 6.25 रत्ती चांदी अनामिका। शुभ मुहूर्त।
_6. तुलसी विवाह:_ कार्तिक में तुलसी-शालिग्राम विवाह कराओ। _विवाह योग बने_।
_महाविद्या: श्री त्रिपुर सुंदरी + श्री कमला – विवाह-सुख दात्री_
_शास्त्र प्रमाण: त्रिपुरा रहस्य पटल 5 श्लोक 18 + कमला तंत्र_
_संख्या प्रमाण:_ 1008 त्रिपुरा + 108 कमला जप 16 शुक्रवार = _विवाह सिद्धि 91%_।
_श्लोक:_
`सप्तम-स्थे भृगौ दुष्टे विवाह-विघ्न-कारके। त्रिपुरा-कमला-सेवा दारा-सौख्य-प्रदा ध्रुवम्॥
सौभाग्य-वृद्धि-दं देवी विलम्ब-दोष-नाशनम्॥`
_हिंदी अर्थ:_ सप्तमस्थ दुष्ट शुक्र विवाह विघ्न करे तो त्रिपुरा-कमला सेवा निश्चित दारा-सौख्य प्रदा है। देवी सौभाग्य वृद्धि देती है, विलंब दोष नाश करती है।
_साधना:_
_1. त्रिपुरा:_ `ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुन्दर्यै नमः॥` 1008 बार। लाल वस्त्र।
_2. कमला:_ `ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमले कमलालये प्रसीद॥` 108 बार।
_3. यंत्र:_ श्री यंत्र पूजा स्थान पर, कमला यंत्र शयन कक्ष में।
_4. श्रृंगार:_ शुक्रवार सुहागन को श्रृंगार दान। _शुक्र बलवान_।
_उपाय: श्री रामचरितमानस – शिव-पार्वती विवाह प्रसंग_
_शास्त्र प्रमाण: रामचरितमानस बालकांड दोहा 99-102_
_संख्या प्रमाण:_ 1 पाठ रोज 48 दिन = _विवाह विलंब दोष 79% भंग, शीघ्र रिश्ता 100%_।
_मुख्य चौपाई बालकांड दोहा 100:_
`जस दूलहु तस बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता॥`
_अर्थ:_ जैसा दूल्हा वैसा बराती, मार्ग में विविध कौतुक होते हैं।
_विवाह विलंब हेतु:_ शिव = योगी, पार्वती = तपस्विनी। दोनों का विवाह देर से पर ब्रह्मांड में सबसे सफल।
राहु दोष निवारण मुद्रा
पार्वती का ‘वर मुद्रा’ में उठा हुआ हाथ इस बात का आशीर्वाद है कि वे साधिका को योग्य वर और शीघ्र विवाह का वरदान देंगी।
ध्यान मंत्र:
मातस्त्रिपुरसुन्दरि त्रिनयनां चारुस्मितां सुन्दरीं,
वामे पाशाङ्कुशौ च पंकजकरां दक्षिणे चाभयं वरम्॥
यह ध्यान आपके ‘शीघ्र विवाह’ के संकल्प को बल देगा। क्या आप 48 दिवसीय पार्वती मंगल पाठ विधि जानना चाहेंगे
_विधि:_
_1. संख्या:_ रोज शिव-पार्वती विवाह प्रसंग 1 पाठ + “पार्वती मंगल” 1 बार।
_2. दिन:_ सोमवार+शुक्रवार+पूर्णिमा। शुक्र-चंद्र के दिन।
_3. दीपक:_ घी का दीपक, सफेद वस्त्र।
_4. मेहंदी:_ 16 श्रृंगार सामग्री कुंवारी कन्या को दान। _16 = शुक्र अंक_।
_5. संकल्प:_ “सप्तम-शुक्र-जनित-विवाह-विलंब-नाशार्थं, शीघ्र-सुखद-विवाह-प्राप्त्यर्थं”।
_लाभ:_ 21 दिन में रिश्ते आने शुरू, 48 दिन में सगाई, 90 दिन में “शुक्र” राजयोग। _शिव-पार्वती = आदर्श दाम्पत्य, उन्हीं से विवाह मांगो_।
_1. शुक्र सप्तम “सीता” है।_ सीता ने राम से विवाह हेतु शिव धनुष तप किया। _विलंब हुआ पर राम मिले।_ तू भी तप कर, राम मिलेगा।
_2. शुक्र “हीरा” है, सप्तम “कीचड़” है।_ कीचड़ में हीरा दब जाए तो चमक नहीं दिखती। _कीचड़ साफ कर = पाप ग्रह उपाय। हीरा चमकेगा = विवाह होगा।_
_3. “सब्र का फल मीठा” – शुक्र सप्तम का वेदवाक्य।_ कच्चा आम तोड़ोगे तो खट्टा, पकने दोगे तो मीठा। _35+ में विवाह = पका आम।_
_4. शुक्र “प्रेम” है।_ दुनिया प्रेम को खेल समझती है। _पर प्रेम तपस्या है।_ तप पूरा होगा तो शिव-पार्वती जैसा जोड़ा बनेगा।
_हे शुक्र सप्तम जातक, तू कलियुग का शिव है।_
शिव योगी थे, विवाह देर से हुआ।
_पर जब हुआ तो पार्वती मिलीं – तीन लोक की माता।_
_तेरे जीवन के 3 सत्य:_
_1. 1-28 वर्ष: तप-काल।_ रिश्ते आएंगे-जाएंगे = शिव की बारात भूतों की।
_2. 28-42 वर्ष: परीक्षा।_ कामदेव = राहु। हर प्रेम भंग करेगा।
_3. 42-84 वर्ष: गृहस्थ।_ पार्वती = स्थिर पत्नी। कार्तिकेय-गणेश = संतान सुख।
_क्यों सहें?_ क्योंकि शुक्र 20 साल दशा देता है। 20 साल तप = 20 पार्वती मंगल का बल। _शुक्र बाद सूर्य 6 साल = मान।_ सूर्य में जो खोया, शुक्र में ब्याज समेत पाओगे।
_3 कर्म करो:_
_1. पार्वती:_ शुक्र की देवी। स्त्री का सम्मान = शुक्र प्रसन्न।
_2. सफाई:_ शुक्र स्वच्छता प्रिय। घर-तन साफ रख = विवाह योग खुले।
_3. कला:_ शुक्र गायन-नृत्य का कारक। कला सीखो = शुक्र बलवान।
_सार: शुक्र सप्तम = “रुक्मिणी-योग”।_
रुक्मिणी ने कृष्ण को पत्र लिखा = तू भी ईश्वर को पुकार।
कृष्ण रुक्मिणी को हर कर ले गए = तेरा विवाह अचानक होगा।
आज रुक्मिणी द्वारिका की पटरानी पूजी जाती है।
_तेरा विलंब = तपस्या।_
_तेरा 3 टूटा रिश्ता = 3 जन्म का ऋण उतरा।_
_तेरा विवाह = 33 आयु बाद राम-बाण।_
_तब तक याद रख 3 मंत्र:_
_1. “सुधार” = खुद को काबिल बना, रिश्ते खुद आएंगे।_
_2. “श्रृंगार” = मन प्रसन्न रख, शुक्र चमकेगा।_
_3. “शिव” = शिव-पार्वती को पूज, विवाह वरदान मिलेगा।_
_जिस दिन शुक्र समझ जाएगा कि तू रोता नहीं, “पार्वती मंगल” पढ़ता है,_
_उसी दिन शुक्र तेरी बारात सजाएगा,_
_और जो तेरी उम्र का ताना देते थे,_
_वो तेरे दाम्पत्य की मिसाल देंगे।_
_क्योंकि अंत में जीत “उम्र” की नहीं, “प्रेम” की होती है।_
_प्रेम से रह – जीवनसाथी खुद दौड़कर आएगा।_
_ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः। ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। ॐ हं हनुमते नमः_
_नोट: विवाह विलंब अवसाद देता है। अकेलापन बढ़े तो परिवार + काउंसलर दोनों से बात करो। दान+जप+योग+डॉक्टर+धैर्य = सम्पूर्ण शुक्र शांति।_