
स्थिति: 4थे में राहु, 2रा स्वामी 8वें।
श्लोक: सुखस्थाने यदा राहुर्धनेशो रन्ध्रगो यदि। चौरभीत्या धनं नश्येद्गृहे नित्यं भयं भवेत्॥
प्रमाण: फलदीपिका, अध्याय 13, श्लोक 15।
Hindi: 4थे में राहु, धनेश 8वें हो तो चोरी के भय से धन नष्ट, घर में नित्य भय।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: चौथा भाव घर, सुख, तिजोरी का स्थान है। राहु वहाँ धुआँ और छाया बनकर बैठे तो घर में अदृश्य चोर पैदा होता है। दूसरा भाव का स्वामी आठवें में जाए तो धन गुप्त, फंसा या छिपा रहता है। इसलिए व्यक्ति घर में भी सुरक्षित महसूस नहीं करता।
प्रभाव विस्तृत: तिजोरी में रखा, चूहा कुतर गया। कभी नौकर निकाल ले, कभी रिश्तेदार धोखा दे, कभी पुलिस केस में सामान जब्त हो। नींद उड़ जाती है, हर आहट पर चोर का भ्रम होता है।
रहस्य: 4था = घर, राहु = चोर। घर में ही चोर बैठा है।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: भैरवं पूजयेद्रात्रौ श्वभ्यो दद्याच्च भोजनम्॥ (भैरव तंत्र)
अर्थ: रात को भैरव पूजे, कुत्तों को भोजन दे।
वैदिक उपाय: भैरव अष्टक पाठ। रविवार काले कुत्ते को रोटी-तेल।
तंत्र उपाय: बटुक भैरव: ॐ बटुक भैरवाय नमः। 1 लाख जप।
लाभ: चोरी का भय खत्म, घर सुरक्षित, नींद अच्छी।
हानि: तिजोरी में चूहा, रात को डर, सामान गायब।
स्थिति: 7वें में शनि+राहु, शुक्र नीच।
श्लोक: जामित्रे शनिराहुभ्यां युक्ते शुक्रे च नीचगे। स्त्रीकृतेन च दोषेण दारिद्र्यं लभते ध्रुवम्॥
प्रमाण: होरा सार, अध्याय 5, श्लोक 22।
Hindi: 7वें शनि-राहु, शुक्र नीच हो तो स्त्री कृत दोष से दरिद्रता निश्चित।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: सप्तम जीवनसाथी और साझेदारी है। शनि राहु वहाँ विष योग बनाते हैं। शुक्र लक्ष्मी का कारक है, नीच होने से भोग विलास गलत दिशा में खर्च कराता है। स्त्री सुख के कारण कर्ज, विवाद या अपयश होता है।
प्रभाव विस्तृत: पत्नी के शौक में कर्ज, तलाक में जायदाद गई। व्यापार में महिला पार्टनर धोखा दे। समाज में बदनामी से अवसर बंद।
रहस्य: शुक्र = लक्ष्मी। नीच शुक्र = लक्ष्मी रूठी।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: शुक्रवारे स्त्रियं पूज्य वस्त्रालंकारदानतः॥ (शुक्र नीति)
अर्थ: शुक्रवार को स्त्री को वस्त्र-आभूषण दान से पूजे।
वैदिक उपाय: शुक्रवार पत्नी को चांदी, 16 श्रृंगार का सामान। सुहागिन भोजन।
तंत्र उपाय: त्रिपुर सुंदरी: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं। 1 लाख जप।
लाभ: पत्नी सुख दे, लक्ष्मी घर आए, शुक्र बलवान।
हानि: पत्नी के शौक में कर्ज, तलाक में जायदाद गई, लक्ष्मी रूठी।
स्थिति: 5वें में मंगल+केतु, 5वां स्वामी 12वें।
श्लोक: सुतस्थाने कुजः केतुः सुतेशो व्ययगो यदि। सुतदोषेण नाशः स्याद्धनस्य नात्र संशयः॥
प्रमाण: जातक पारिजात, अध्याय 5, श्लोक 42।
Hindi: 5वें मंगल-केतु, सुतेश 12वें हो तो संतान दोष से धन नाश निस्संदेह।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: पंचम पुण्य, बुद्धि और संतान है। मंगल अग्नि, केतु विच्छेद। दोनों वहाँ बैठें तो संतान जिद्दी, रोगी या कुमार्गी होती है। पंचमेश बारहवें में जाए तो संतान पर खर्च विदेश, अस्पताल या व्यसन में बहता है।
प्रभाव विस्तृत: बेटा नशेड़ी, जमीन बेचकर छुड़ाया। पढ़ाई के नाम पर लाखों खर्च, परिणाम शून्य। पुण्य क्षीण होने से नया धन भी नहीं बनता।
रहस्य: 5वां = पुण्य। पाप बैठा = पुण्य जल गया।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: संतानगोपालमन्त्रं जपेत्पुत्रविवृद्धये॥ (संतान गोपाल स्तोत्र)
अर्थ: पुत्र वृद्धि के लिए संतान गोपाल मंत्र जपे।
वैदिक उपाय: संतान गोपाल मंत्र 11 माला। बाल गोपाल को माखन-मिश्री।
तंत्र उपाय: बगलामुखी। संतान की कुमति स्तंभन।
लाभ: संतान आज्ञाकारी, पढ़ाई में मन, खर्च रुके।
हानि: बेटा नशेड़ी, जमीन बेचो, पुण्य 5वां भाव नष्ट।
स्थिति: गुरु नीच, 2रे में, शनि से दृष्ट।
श्लोक: गुरौ नीचे धनस्थाने मन्ददृष्टे च पापिनाम्। गुरुशापेन दारिद्र्यं ब्राह्मणोऽपि च विन्दति॥
प्रमाण: बृहद् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 85, श्लोक 39।
Hindi: गुरु नीच 2रे में शनि दृष्ट हो तो गुरु शाप से ब्राह्मण भी दरिद्र होता है।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: गुरु जीव, धर्म और धन का विस्तार है। मकर में नीच होकर दूसरे भाव में बैठे और शनि की दृष्टि पड़े तो गुरु का तेज दब जाता है। यह पूर्व जन्म में गुरु, ब्राह्मण या पिता के अपमान का संकेत है।
प्रभाव विस्तृत: पंडिताई की, दक्षिणा मिली 11 रुपया। विद्या होकर भी मान नहीं। लोग सलाह लेते हैं पर पैसा नहीं देते।
रहस्य: गुरु = जीव। नीच गुरु = जीव का श्राप।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: गुरुपूजां विना नास्ति दारिद्र्यस्य निवारणम्॥ (गुरु गीता 2.58)
अर्थ: गुरु पूजा बिना दरिद्रता नहीं मिटती।
वैदिक उपाय: गुरु को पीला वस्त्र + दक्षिणा गुरुवार को। केले के पेड़ पूजन। 5 रत्ती पुखराज।
तंत्र उपाय: तारा: ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्। 1 लाख जप।
लाभ: ज्ञान से धन, गुरु कृपा, अहंकार नाश।
हानि: पंडित होकर 11 रुपया दक्षिणा, विद्या बेचकर भी भूखा।
स्थिति: शनि 2रे को 10वीं दृष्टि से देखे, 2रा स्वामी अस्त।
श्लोक: मन्देन दशमे दृष्टे धनस्थाने धनाधिपे। अस्तगे धननाशः स्यात्क्रमेणैव न संशयः॥
प्रमाण: सारावली, अध्याय 15, श्लोक 11।
शनि 10वीं दृष्टि से 2रे को देखे, धनेश अस्त हो तो क्रम से धन नाश निस्संदेह।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: शनि की दसवीं दृष्टि कर्म और दंड की है। जब वह धन भाव को देखे और धनेश सूर्य के पास अस्त हो जाए तो धन की शक्ति धीरे धीरे क्षीण होती है। यह दीमक जैसा योग है।
प्रभाव विस्तृत: धीरे धीरे सब बिक गया, पता भी न चला। पहले बचत घटी, फिर कर्ज बढ़ा, फिर संपत्ति नीलाम।
रहस्य: शनि = धीमा जहर। धन को दीमक लगता है।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: शनैश्चरं प्रपूज्याथ तिलहोमं च कारयेत्॥ (शनि महात्म्य)
अर्थ: शनि पूजकर तिल होम करे।
वैदिक उपाय: दशरथ शनि स्तोत्र शाम को। 1.25 किलो काला तिल दान। शमी पूजन शनिवार।
तंत्र उपाय: दक्षिण काली। शनि की इष्ट।
लाभ: धीरे-धीरे धन बढ़े, दीमक रुके, बुढ़ापा सुखी।
हानि: धन दीमक खाए, पता तब चले जब सब बिक जाए।