
स्थिति: चंद्र अकेला, 2-12 खाली, गुरु दृष्टि नहीं।
श्लोक: केमद्रुमे भवेज्जातो मलिनो दुःखपीडितः। भिक्षाशी जायते मर्त्यो धर्मकर्मरतोऽपि सन्॥
प्रमाण: बृहत् जातक, अध्याय 13, श्लोक 6।
केमद्रुम में जन्मा धर्म करे तो भी भिक्षा मांगता है।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: चंद्र मन और द्रव्य दोनों का कारक है। जब उसके आगे पीछे कोई ग्रह नहीं, और गुरु की शुभ दृष्टि भी नहीं, तो मन खाली घड़े जैसा हो जाता है। वह सोचता बहुत है, पर उसे थामने वाला कोई नहीं।
प्रभाव विस्तृत: तीर्थ करके लौटे, घर कुर्क। बाहर इज्जत, घर में खाली बटुआ। मन में अकेलापन स्थायी हो जाता है, इसलिए कमाया धन भी टिकता नहीं।
रहस्य: चंद्र = धन+मन, अकेला = खाली।
उपाय :श्लोक प्रमाण: केमद्रुमे समुत्पन्ने सोमं सम्पूजयेद्बुधः। क्षीरेण स्नापयेच्छम्भुं सोमवारे विशेषतः॥ (स्कंद पुराण, काशी खंड 9.32)
अर्थ: केमद्रुम में जन्मा हो तो सोमवार को शिव को दूध से स्नान कराए।
वैदिक उपाय: 16 सोमवार शिवलिंग पर कच्चा दूध + चावल। ॐ नमः शिवाय 11 माला। 2 रत्ती मोती चांदी में कनिष्ठा में।
तंत्र उपाय: भुवनेश्वरी मंत्र: ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः। 1.25 लाख जप। कमल गट्टा हवन।
लाभ: मन शांत, माता का सुख, मोक्ष मार्ग।
हानि: धन नहीं टिकता, रात को नींद नहीं, रोटी के लाले।
स्थिति: चंद्र से 6/8/12 में गुरु।
श्लोक: षष्ठाष्टमव्ययगते जीवे चन्द्रात्स शकटः। दारिद्र्यदुःखदो नित्यं पुनः पुनः समृद्धिदः॥
प्रमाण: फलदीपिका, अध्याय 6, श्लोक 42।
चंद्र से 6/8/12 में गुरु शकट योग, दरिद्रता देता है।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: गुरु जीव है, चंद्र मन है। जब दोनों एक दूसरे से त्रिक भाव में हों, तो जीव और मन की गाड़ी का धुरा टूट जाता है। कभी ऊपर, कभी नीचे।
प्रभाव विस्तृत: पैसा आता है, बैलगाड़ी के पहिये जैसा लौट जाता है। नौकरी लगेगी, छूटेगी, व्यापार चलेगा, फिर अचानक बंद। स्थिरता नहीं।
रहस्य: गुरु = लक्ष्मी, चंद्र = मन। दोनों में दूरी = लक्ष्मी मन से दूर।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: शकटे च गुरुं पूज्य विष्णुं चैव विशेषतः। कदलीमूले दद्याद्वै जलं पीतं च चन्दनम्॥ (विष्णु धर्मोत्तर पुराण 2.65.11)
अर्थ: शकट योग में गुरु-विष्णु पूजे। केले की जड़ में पीला जल-चंदन दे।
वैदिक उपाय: 16 गुरुवार केले के पेड़ को जल + हल्दी + चने की दाल। विष्णु सहस्रनाम 1 पाठ रोज। 5 रत्ती पुखराज सोने में तर्जनी में।
तंत्र उपाय: तारा मंत्र: ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्। 1 लाख जप।
लाभ: स्थिर धन, धैर्य, बड़ी सफलता 40 के बाद।
हानि: धन आकर चला जाए, 40 वर्ष तक अस्थिरता।
स्थिति: 2रे भाव में पाप ग्रह, 2रा स्वामी नीच/अस्त।
श्लोक: धनस्थाने यदा पापा धनेशो नीचगोऽपि वा। धनहीनो भवेन्मर्त्यो वाचालो मलिनोऽपि च॥
प्रमाण: सारावली, अध्याय 15, श्लोक 2।
2रे में पाप ग्रह, धनेश नीच हो तो धनहीन, गंदा होता है।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: दूसरा भाव मुख, वाणी और संचित धन है। पाप ग्रह वहां बैठे तो वाणी कटु, खानपान अशुद्ध। स्वामी नीच हो तो धन रखने की पात्रता ही कमजोर।
प्रभाव विस्तृत: बोलते ही गाली निकले, जेब से कंकड़ निकले। लोग सुनते ही दूर हटें, इसलिए अवसर भी दूर हटे।
रहस्य: श्लोक प्रमाण: श्रीसूक्तेन जपेन्नित्यं लक्ष्मीं सम्पूजयेद्बुधः। कुबेरं च महाभागं धनधान्यप्रदं सदा॥ (लक्ष्मी तंत्र 9.45)
अर्थ: नित्य श्रीसूक्त जपे, लक्ष्मी-कुबेर पूजे।
वैदिक उपाय: श्रीसूक्त रोज 16 पाठ, शुक्रवार 108। कमल से लक्ष्मी पूजन। कुबेर मंत्र 11 माला। दक्षिणावर्ती शंख रखें।
तंत्र उपाय: कमला मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद… 1.25 लाख जप।
लाभ: वाणी मधुर, धन आगमन, इज्जत।
हानि: मुंह से गाली, घर में अनाज नहीं, लोग तिरस्कार करें।
स्थिति: 11वें में केतु, 11वां स्वामी 6/8/12 में।
श्लोक: लाभस्थाने स्थिते केतौ लाभेशे रन्ध्रगेऽपि वा। लाभभंगो भवेत्तस्य प्रयत्नो निष्फलो भवेत्॥
प्रमाण: जातक पारिजात, अध्याय 4, श्लोक 115।
11वें केतु, लाभेश 8वें में हो तो लाभ भंग, मेहनत बेकार।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: ग्यारहवां इच्छापूर्ति है। केतु वहां कैंची बनकर बैठता है। स्वामी त्रिक में हो तो लाभ का स्रोत ही अस्पताल, कोर्ट, विदेश में बह जाए।
प्रभाव विस्तृत: लाख का सौदा, कमीशन दस रुपया। मित्र धोखा दे, नेटवर्क टूटे।
रहस्य: केतु = कैंची। लाभ की रस्सी काट देता है।
उपाय श्लोक प्रमाण: लाभभंगे गणेशं तु पूजयेद्भक्तितत्परः। दूर्वया मोदकैश्चैव अथर्वशीर्षपाठतः॥ (गणेश पुराण, क्रीड़ा खंड 91.7)
अर्थ: लाभ भंग में गणेश को दूर्वा-मोदक से पूजे, अथर्वशीर्ष पाठ करे।
वैदिक उपाय: गणपति अथर्वशीर्ष रोज 11, बुधवार 108। 21 दूर्वा + लड्डू। लाभेश का रत्न धारण।
तंत्र उपाय: बगलामुखी: ॐ ह्लीं बगलामुखि… स्तम्भय। 1 लाख जप। पीली सरसों हवन।
लाभ: मेहनत का फल, सौदा पक्का, इच्छा पूर्ति।
हानि: लाख की डील में 10 रुपया कमीशन, उम्मीद टूटे।
स्थिति: 12वें में मंगल+शनि, लग्नेश नीच।
श्लोक: व्यये भौमशनियुतौ लग्नेशे नीचसंस्थिते। व्ययाधिको भवेन्नित्यं आयादपि च सर्वदा॥
प्रमाण: होरा रत्नम्, अध्याय 3, श्लोक 31।
12वें मंगल-शनि, लग्नेश नीच हो तो आय से अधिक व्यय होता है।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: बारहवां खर्च, अस्पताल, बंधन। मंगल आग, शनि देर। दोनों मिलकर जेब में छेद करते हैं। लग्नेश कमजोर तो शरीर ही खर्च रोक नहीं पाता।
प्रभाव विस्तृत: 100 कमाया, 200 का बिल। कोर्ट केस, दवा, जुर्माना लगातार।
रहस्य: शनि = देरी, मंगल = आग। जेब में छेद कर देते हैं।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: व्ययाधिके हनूमन्तं पूजयेच्च शनैश्चरम्। तिलतैलेन दीपं च शनिवारे निवेदयेत्॥ (हनुमद् पुराण 5.19)
अर्थ: व्यय अधिक हो तो हनुमान-शनि पूजे। शनिवार तिल तेल दीपक दे।
वैदिक उपाय: हनुमान चालीसा 11 बार रोज, शनिवार 108। चोला चढ़ाएं। दशरथ शनि स्तोत्र शाम को। 1.25 किलो काला तिल दान।
तंत्र उपाय: धूमावती: धूं धूं धूमावती ठः ठः। 1 लाख जप।
लाभ: खर्च पर नियंत्रण, कर्ज मुक्ति, बचत शुरू।
हानि: आय से दुगुना खर्च, रात को कर्जदार का डर।
स्थिति: 2रे का स्वामी 8वें में, शनि से दृष्ट।
श्लोक: धनेशे रन्ध्रभावस्थे मन्ददृष्टे च पापिनाम्। निष्क्रियं तद्धनं सर्वं नोपभोगाय कल्पते॥
प्रमाण: उत्तर कालामृत, खंड 4, श्लोक 19।
धनेश 8वें में शनि दृष्ट हो तो धन निष्क्रिय होता है, भोग नहीं मिलता।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: आठवां गुप्त, श्मशान, रुकावट। धनेश वहां जाए और शनि देखे तो धन तिजोरी में सड़ता है, उपयोग नहीं।
प्रभाव विस्तृत: बैंक में 50 लाख, इलाज को तरसे। प्रॉपर्टी है, कागज फंसे।
रहस्य: 8वां = श्मशान। धन मुर्दा होकर पड़ा रहता है।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: रन्ध्रस्थे धननाथे तु रुद्रं सम्पूजयेद्बुधः। गव्येन सर्पिषा स्नाप्य महामृत्युंजयं जपेत्॥ (शिव पुराण, रुद्र संहिता 15.51)
अर्थ: धनेश 8वें में हो तो रुद्र को घी से स्नान कराकर महामृत्युंजय जपे।
वैदिक उपाय: रुद्राभिषेक सावन में रोज, गन्ने के रस से। महामृत्युंजय 1.25 लाख। चांदी चौकोर तिजोरी में।
तंत्र उपाय: छिन्नमस्ता: श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं फट् स्वाहा। 1 लाख जप।
लाभ: धन सक्रिय हो, इलाज-भोग में लगे, कंजूसी छूटे।
हानि: 50 लाख बैंक में, 5 हजार को तरसे, मुर्दा धन।
स्थिति: 2रे में राहु, 2रा स्वामी 6ठे में।
श्लोक: कुटुम्बस्थे यदा राहौ कुटुम्बेशे च षष्ठगे। कुटुम्बाद्धननाशः स्यात्कलहो जायते ध्रुवम्॥
प्रमाण: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 13, श्लोक 45।
2रे में राहु, कुटुंबेश 6ठे में हो तो परिवार से धन नाश, झगड़ा निश्चित।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: राहु मुख में धुआं भरता है। स्वामी शत्रु भाव में जाए तो भाई बंधु ही केस करें।
प्रभाव विस्तृत: पैतृक जायदाद में केस, भाई ही दुश्मन।
रहस्य: राहु = धोखा। कुटुंब में बैठकर धन निगलता है।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: कुटुम्बकलहे जाते नारायणबलिं चरेत्। पितॄंश्च तर्पयेद्भक्त्या राहुदोषोपशान्तये॥ (गरुड़ पुराण, प्रेत खंड 15.29)
अर्थ: कुटुंब कलह में नारायण बलि करे, राहु शांति हेतु पितृ तर्पण करे।
वैदिक उपाय: नारायण बलि गया में। त्रिपिंडी श्राद्ध। पितृ स्तोत्र अमावस्या को। चांदी चंद्र गले में।
तंत्र उपाय: मातंगी: ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा। 1 लाख जप।
लाभ: भाई-बंधु वश में, जायदाद विवाद खत्म, घर में शांति।
हानि: भाई ही दुश्मन, 20 साल केस, घर में रोज क्लेश।
स्थिति: सूर्य 8वें में, 9वें में शनि, 2रा स्वामी नीच।
श्लोक: पितृस्थाने यदा मन्दो रन्ध्रे भानुर्धनाधिपे। नीचे पितृदोषेण दारिद्र्यं लभते ध्रुवम्॥
प्रमाण: गरुड़ पुराण, प्रेत खंड, अध्याय 40, श्लोक 9।
9वें शनि, 8वें सूर्य, धनेश नीच हो तो पितृ दोष से दरिद्रता निश्चित।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: नवम पिता, सूर्य आत्मा। आठवें में सूर्य अस्त, शनि पिता स्थान में, तो पूर्वजों का ऋण धन को जलाता है। .
प्रभाव विस्तृत: कमाते ही पितृ श्राद्ध का खर्च आ जाए। संतान कष्ट, काम अटके।
रहस्य: श्लोक प्रमाण: पितृदोषे गयाश्राद्धं कुर्यात्त्रिपिण्डिकं बुधः। आदित्यं पूजयेद्भक्त्या तिलहोमं च कारयेत्॥ (त्रिस्थली सेतु, पृष्ठ 145)
अर्थ: पितृ दोष में गया श्राद्ध, त्रिपिंडी करे। सूर्य पूजे, तिल होम करे।
वैदिक उपाय: गया में पिंडदान + नारायण नागबलि। सूर्य को तांबे से अर्घ्य ॐ घृणि सूर्याय नमः। पीपल को जल रविवार छोड़।
तंत्र उपाय: काली: क्रीं क्रीं क्रीं हूं ह्रीं ह्रीं… 1 लाख जप।
लाभ: भाग्य खुले, पिता का आशीर्वाद, रुके काम बने।
हानि: कमाते ही श्राद्ध का खर्च, पिता से झगड़ा, भाग्य साथ न दे।
9
स्थिति: 10वें में केतु, 10वां स्वामी 12वें, शनि दृष्ट।
श्लोक: कर्मस्थाने स्थिते केतौ कर्मेशे व्ययगेऽपि वा। कर्मदारिद्र्ययोगोऽयं न कर्म सफलं भवेत्॥
प्रमाण: सर्वार्थ चिंतामणि, अध्याय 4, श्लोक 51।
10वें केतु, कर्मेश 12वें हो तो कर्म दरिद्र योग, कर्म सफल नहीं होता।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: दसवां कर्म, केतु सिर काटता है। स्वामी व्यय में जाए तो मेहनत विदेश या हानि में बह जाए।
प्रभाव विस्तृत: नौकरी लगते ही कंपनी बंद। प्रमोशन रुके।
रहस्य: केतु = सिर कटा। कर्म का सिर काट देता है।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: कर्मनाशे रवे: पूजा आदित्यहृदयस्य च। पाठेन पूजनेनैव कर्मसिद्धिमवाप्नुयात्॥ (ब्रह्म पुराण 30.25)
अर्थ: कर्म नाश में सूर्य पूजा, आदित्य हृदय पाठ से कर्म सिद्धि मिले।
वैदिक उपाय: आदित्य हृदय रोज 3, रविवार 11 पाठ। तांबे का सूर्य यंत्र पूजें। 1.25 किलो गेहूं दान।
तंत्र उपाय: छिन्नमस्ता मंत्र। 1 लाख जप।
लाभ: नौकरी स्थिर, व्यापार चले, मेहनत सफल।
हानि: नौकरी लगते कंपनी बंद, दुकान के सामने मॉल, मेहनत बेकार।
स्थिति: 2रे में बुध+केतु, 2रा स्वामी वक्री।
श्लोक: वाचिस्थाने बुधः केतुर्युक्तो वक्री धनाधिपः। वाग्दोषेण धनं नश्येद्विवादे कलहो भवेत्॥
प्रमाण: जातक तत्व, श्लोक 89।
2रे में बुध-केतु, धनेश वक्री हो तो वाणी दोष से धन नाश, विवाद होता है।
हिंदी विस्तृत व्याख्या: बुध वाणी, केतु उसे तोड़ता है। वक्री स्वामी उल्टी दिशा में धन खींचे।
प्रभाव विस्तृत: मुंह खोलते ही सौदा टूटा। कोर्ट में गलत बयान।
रहस्य: केतु = तुतलाना। लक्ष्मी वाणी से आती है, केतु वाणी बिगाड़ देता है।
उपाय विस्तृत: श्लोक प्रमाण: भैरवं पूजयेद्रात्रौ श्वभ्यो दद्याच्च भोजनम्॥ (भैरव तंत्र)
अर्थ: रात को भैरव पूजे, कुत्तों को भोजन दे।
वैदिक उपाय: भैरव अष्टक पाठ। रविवार काले कुत्ते को रोटी-तेल।
तंत्र उपाय: बटुक भैरव: ॐ बटुक भैरवाय नमः। 1 लाख जप।
लाभ: चोरी का भय खत्म, घर सुरक्षित, नींद अच्छी।
हानि: तिजोरी में चूहा, रात को डर, सामान गायब।