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बार-बार एक ही परेशानी क्यों? जानिए कुंडली का रहस्य

किसी व्यक्ति के जीवन में बार-बार एक ही तरह की परेशानी आना संयोग नहीं होता। कोई व्यक्ति हर बार रिश्तों में धोखा खाता है, कोई बार-बार पैसे के पास जाकर भी खाली रह जाता है, और कोई हर काम शुरू करके बीच में छोड़ देता है इसको “अधूरा कर्म’  कहते हैं

 

जब कुंडली में शनि, राहु या केतु चौथे, सातवें या बारहवें भाव में विशेष स्थिति में हों, तब व्यक्ति एक ही गलती को अलग-अलग रूप में बार-बार दोहराता है।

जैसे यदि सातवें भाव में राहु हो, तो व्यक्ति अक्सर ऐसे लोगों पर भरोसा कर बैठता है जो बाद में उसे दुख देते हैं। उसे हर बार लगता है कि “इस बार सब अलग होगा”, लेकिन कुछ समय बाद वही कहानी फिर दोहर जाती है।

यदि चौथे भाव में केतु हो, तो व्यक्ति को घर, परिवार या अपनेपन का सुख देर से मिलता है। ऐसे लोग अक्सर भीड़ में रहकर भी भीतर से खाली महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उनके आसपास हैं, पर कोई उन्हें सच में समझता नहीं।

और यदि बारहवें भाव में शनि हो, तो व्यक्ति बहुत मेहनत करता है, पर उसका फल देर से मिलता है। कई बार उसे लगता है कि किस्मत उसका साथ नहीं दे रही। लेकिन वरिष्ठ ज्योतिषी कहते थे कि ऐसे लोग जीवन में देर से जीतते हैं, पर जब जीतते हैं तो बहुत स्थायी रूप से जीतते हैं।

एक पुराने ज्योतिषाचार्य कहा करते थे—“कुंडली सजा नहीं देती, वह केवल वह पाठ बार-बार सामने लाती है जिसे तुम अभी तक समझ नहीं पाए।”

यही कारण है कि कुछ लोग पूरी जिंदगी एक ही तरह के लोगों से मिलते हैं, एक जैसी परेशानियाँ झेलते हैं और एक जैसे मोड़ पर आकर रुक जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, जब व्यक्ति अपनी गलती पहचान लेता है, तभी ग्रह भी अपना असर बदलने लगते हैं।

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