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सारावली का यह अमर श्लोक आज भी सत्य लगता है

|| मूल श्लोक (संस्कृत) ||

चन्द्रे उच्चे बलयुक्ते स्वनृपक्षे सुस्निग्धभावे

सौंदर्यं परिपूर्णं मुखकमलं शुभ्रं सुवृत्तं प्रसन्नम् ।

नेत्रे विशालपद्मे हसितमुपरि शुभ्रदशनं सुलक्षम्

सर्वावयवसौष्ठवं च रुचिरं देहं मनोहारि चन्द्रे ॥

(सारावली, अध्याय ४)

|| हिंदी अनुवाद ||

जब चंद्रमा उच्च का, बलयुक्त, स्वराशि में और अच्छे भाव में होता है,

तो व्यक्ति का सौंदर्य परिपूर्ण होता है – मुख कमल जैसा उज्ज्वल और गोल,

बड़े-बड़े कमल जैसे नेत्र, हँसी के ऊपर सुंदर सफेद दाँत,

सभी अंगों का सौष्ठव अद्भुत और शरीर अत्यंत मनोहर होता है।

🌿 मतलब साफ है…

जिसकी कुंडली में चंद्रमा मजबूत और शुभ है, उसका चेहरा और व्यक्तित्व स्वतः ही चमकता है। बाहरी सौंदर्य से ज्यादा भीतरी शांति और ग्रहों की कृपा चमक लाती है।

आज रात चंद्रमा को देखिए…

🙏 जय श्री राधे 🌙

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