
लग्नेश अष्टम में बैठने से वो मन कारक ग्रह चंद्रमा लग्नेश होने से व अष्टम में विराजमान होने से निर्णय क्षमता कमजोर होती है व मन स्थिर नहीं रहता व वास्तविकता से दूर महत्वाकांक्षी व आभासी जीवन शैली में रुचि रहती है, भटकाव एवं बार बार मन बदलने जैसी स्थिति रहती है। आभासी (Virtual) दुनिया से बाहर निकलकर धरातल पर प्रयास करना चाहिए।
मंगल, शनि व केतु की लाभ स्थान पर दृष्टि होने से लाभ के अवसरों से वंचित रह जाते हैं। प्रयास करने के उपरांत भी लाभ अर्जित नहीं कर पाते। अतः किसी विश्वसनीय मित्र एवं परिवारजन को साथ में लेकर कार्य करें। जोखिम पूर्ण कार्य से बचें व व्यापार में मुख्य भूमिका ना निभाएं पर्दे के पीछे से कार्य करें।
मंगल की दशम दृष्टि संतान भाव पर होने से संतान संबंधी चिंता रहेगी। संतान गोपाल मंत्र का जाप करें व मंगल की शांति कराएं।
शनि की सप्तम दृष्टि सहोदर भाव पर होने से व सहोदर भाव में राहु स्थित होने से जातक का भाई नहीं होगा अथवा भाई होने पर भाई का सुख नहीं होगा व भाई इत्यादि से मतभेद रहेगा।
जीवन में सफलता व समृद्धि प्राप्त करने के लिए शुक्र व बृहस्पति का रत्न धारण करें।
शुक्र का रत्न धारण करने से भूमि, भवन सुख और व्यापारिक लाभ की स्थिति मजबूत होगी। बृहस्पति का रत्न धारण करने से कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, व्यर्थ नुकसान में कमी आएगी व धन में वृद्धि होकर स्थिरता आएगी। प्रतिद्वंद्वी शत्रु व रोग में वृद्धि होगी।
कर्म भाव व संतान भाव का स्वामी मंगल अष्टम में बैठने से व संतान भाव पर मंगल की दशम दृष्टि होने से संतान भाव व कर्म-क्षेत्र भाव निर्बल हो गया है इसलिए संतान संबंधी चिंता रहेगी व कार्य में असफलता व निराशाजनक परिणाम रहेंगे।
संतान लाभ के लिए मंगल की शांति उपाय व संतान गोपाल मंत्र का जाप करें
व्यापारिक सफलता के लिए जोखिम पूर्ण कार्य से बचें व किसी को पार्टनरशिप में लेकर कार्य करें व स्वयं व्यापार संचालन में मुख्य भूमिका ना निभाएं पर्दे के पीछे से निवेशक की तरह कार्य करें ऐसा पार्टनर विश्वसनीय होना चाहिए। विश्वसनीय ना होने पर व्यापारिक जोखिम की पूर्ण संभावना रहेगी।
2022 से 2041 तक शनि की महादशा है 19 बर्ष के लिए अतः शनि से प्राप्त होने वाले परिणामों में यहां वृद्धि होगी। यह महादशा जीवन की अग्निपरीक्षा सिद्ध होगी। व पेट संबंधी रोग व ओपरेशन इत्यादि इस महादशा में होगा व शत्रु चिंता बढ़ेगी। अतः इस समय में समय धैर्य व सावधानी से रहें। जोखिमपूर्ण कार्य से बचने का प्रयास करें
शनि महादशा में शुक्र की अंतर्दशा मार्च 2029 से मई 2032 तक समय शुभ रहेगा।
संतान संबंधी चिंता इस कुंडली में है, इसलिए संतान का समय स्पष्ट नहीं किया जा सकता। देवकृपा से ही संतान लाभ संभव है
लग्न का स्वामी मन कारक ग्रह चंद्रमा है और निर्बल होकर अष्टम में है। इसलिये मन कारक निर्बल होने से गलत आदतें रहती हैं। जैसे चोरी, झूठ बोलना, नशा करना, महिलाओं के प्रति आकर्षण होना, इत्यादि स्थिति बनती हैं। मन व इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रहता ऐसे जातक का
शनि में सूर्य व शनि में बृहस्पति की अंतर्दशा अल्प योग बनाएंगे। इसमें दुर्घटना व रोग इत्यादि से गंभीर शारीरिक कष्ट प्राप्त होगा।
शनि में सूर्य अंतर्दशा मई 2032 से भी 2033 तक रहेगी। यह अंतर्दशा
शनि में बृहस्पति अंतर्दशा नबम्बर 2038 से मई 2041 तक प्रभावी रहेगी।
अंतर्दशा का संक्रमण काल +-45 दिन समझें। अतः यह अंतर्दशा 45 दिन पूर्व से लागू होकर 45 दिन अंत तक प्रभावी रहेगी।
*निष्कर्ष*
*मंगल की शांति कराएं* संतान संबंधी बाधा दूर होगी व व्यापार संबंधी जोखिम में राहत मिलेगी। मंगल की शांति हेतु मंगल शांति मंत्र का जप कराएं व जप उपरांत लाल वस्तुओं का दान करें।
*शनि व राहु की शांति* शनि व राहु की शांति कराने से लाभ की स्थिति में सुधार होगा व व्यापारिक क्षति व अवसरों की क्षति में कभी आएगी। शनि व राहु के शांति मंत्र का जप कराएं व तेल का छाया दान करें, काले कपड़े में बांधकर सात प्रकार का अनाज, लोहे की कील, लकड़ी का कोयला व काले उड़द अपने ऊपर उसारा करके जल में प्रवाहित करें। जलीय जीवों को आटे की गोली बनाकर चुगाएं व बंदरों के केले इत्यादि फल खिलाएं
*बृहस्पति रत्न पीला पुखराज धारण करें*
तर्जनी अंगुली में पुखराज धारण करने से कर्म-क्षेत्र में सफलता मिलेगी
*शुक्र का रत्न हीरा धारण करें*
मध्यमा अंगुली में हीरा धारण करने से लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी।