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क्या आपकी कुंडली में छिपा है ऐसा ग्रहयोग जो प्रेम को आकर्षण, आकर्षण को भ्रम और भ्रम को तलाक में बदल सकता है

आपने अक्सर देखा होगा—

कुछ लोग प्रेम में पागलपन की हद तक समर्पित होते हैं।

विवाह के लिए परिवार से लड़ जाते हैं।

समाज का विरोध सह लेते हैं।

 

जीवनसाथी के बिना एक पल भी रहने की कल्पना नहीं कर पाते।

 

लेकिन वही लोग विवाह के कुछ वर्षों बाद एक-दूसरे का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते।

जहाँ कभी घंटों बातें होती थीं, वहाँ अब मौन होता है।

जहाँ कभी विश्वास था, वहाँ संदेह जन्म ले लेता है।

जहाँ कभी प्रेम था, वहाँ आरोप, ताने और कटुता दिखाई देने लगती है।

 

आखिर ऐसा क्यों होता है

क्या प्रेम झूठ था

क्या जीवनसाथी बदल गया?

या फिर कोई ऐसी अदृश्य शक्ति थी जो धीरे-धीरे रिश्ते की जड़ों को भीतर से खोखला कर रही थी?

 

वैदिक ज्योतिष कहता है कि कई बार इसका कारण स्वयं व्यक्ति नहीं, बल्कि उसकी जन्मकुंडली में छिपा एक विशेष ग्रहयोग होता है।

 

और उस योग का नाम है—

 

शुक्र राहु युति

 

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को प्रेम, विवाह, सौंदर्य, आकर्षण, दाम्पत्य सुख और वैवाहिक आनंद का कारक माना गया है।

 

वहीं राहु को माया, भ्रम, असंतोष, वासना, छल, प्रलोभन और मृगतृष्णा का ग्रह कहा गया है।

 

अब कल्पना कीजिए—_

एक ओर प्रेम का देवता।

दूसरी ओर भ्रम का सम्राट।

 

एक ओर संतोष।

दूसरी ओर कभी न समाप्त होने वाली इच्छाएँ।

जब ये दोनों ग्रह एक ही स्थान पर बैठ जाएँ तो मनुष्य के भीतर कैसी उथल-पुथल उत्पन्न होगी?

यही शुक्र-राहु युति का वास्तविक रहस्य है।

 

 शास्त्रोक्त प्रमाण

 

सारावली (अध्याय 30)

 

«शुक्रे राहुयुते जातः स्त्रीसंगेषु प्रलोभितः।

विषयेषु रतः नित्यं धर्ममार्गात् प्रमाद्यति॥»

 

अर्थात् शुक्र और राहु की युति व्यक्ति को आकर्षण, विषयभोग और मोह की ओर ले जा सकती है, जिसके कारण वह कई बार संबंधों की वास्तविकता से दूर हो जाता है।

इस योग का सबसे बड़ा रहस्य

 

अधिकांश लोग सोचते हैं कि यह योग केवल विवाहेतर संबंध देता है।

लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक गहरी है।

राहु व्यक्ति को धोखा नहीं देता।

राहु व्यक्ति को स्वयं की इच्छाओं का बंदी बना देता है।

ऐसा जातक अक्सर जो प्राप्त है उसमें संतुष्ट नहीं रह पाता।

 

उसे लगता है—

“शायद इससे बेहतर कोई और होगा।”

“शायद मेरा जीवनसाथी मुझे पूरी तरह नहीं समझता।”

“शायद मेरी खुशियाँ कहीं और हैं।”

यहीं से वैवाहिक असंतोष जन्म लेता है।

धीरे-धीरे कल्पना वास्तविकता से बड़ी हो जाती है।

और जब कल्पना टूटती है तो संबंध भी टूटने लगते हैं।

 जब यह योग खतरनाक बन जाता है

 

यदि शुक्र-राहु युति के साथ—

 सप्तम भाव पीड़ित हो

 सप्तमेश निर्बल हो

 नवमांश अशुभ हो

 राहु या शुक्र की महादशा चल रही हो

 शनि या मंगल का प्रभाव हो

 

तो यह योग वैवाहिक जीवन में गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है।

 

कई बार यही योग—

अविश्वास

मानसिक दूरी

 गुप्त संबंध

 सामाजिक बदनामी

 कानूनी विवाद

और अंततः तलाक

तक का कारण बन सकता है।

 क्या हर शुक्र-राहु युति तलाक कराती है

नहीं।

 

यही वह सत्य है जिसे अधिकांश लोग नहीं जानते।

यदि बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो,

यदि शुक्र बलवान हो,

यदि नवमांश अच्छा हो,

 

यदि चंद्रमा स्थिर हो,

तो यही योग व्यक्ति को असाधारण आकर्षण, कला, लोकप्रियता और प्रेम में सफलता भी दे सकता है।

इसलिए किसी भी ग्रहयोग को देखकर भयभीत नहीं होना चाहिए।

 

शास्त्रीय उपाय

राहु भ्रम देता है।

शुक्र भोग देता है।

लेकिन देवी शक्ति विवेक देती है।

इसलिए शास्त्रों में इस योग के लिए देवी उपासना को अत्यंत प्रभावी माना गया है।

 

 दुर्गा सप्तशती पाठ

 शुक्रवार को महालक्ष्मी पूजन

 ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 जप

 गौ सेवा एवं कन्या पूजन

 

 अंतिम सत्य

तलाक की शुरुआत अदालत में नहीं होती।

तलाक की शुरुआत मन में होती है।

और राहु सबसे पहले मन पर ही अधिकार करता है।

इसलिए यदि आपकी कुंडली में शुक्र-राहु युति है तो भयभीत न हों।

पति पत्नी होकर अलग रह रहे क्या साथ रहेंगे।

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