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पति पत्नी होकर अलग रह रहे क्या साथ रहेंगे।

वैवाहिक जीवन के ऊपर आज बात करते है यदि पति पत्नी किसी कारण से अलग-अलग रह रहे है या पति पत्नी के साथ नही रहना चाहते है पत्नी पति के साथ समय खराब होने से नही रहना चाहती, आपस मे लड़ाई, झगड़ा, तनाव आदि दोनो में ज्यादा होने से अलग रह रहे है आदि तो क्या साथ रह पाएंगे और क्या उपाय करने से पति पत्नी के बीच की दिक्कत खत्म होकर अच्छा वैवाहिक जीवन साथ रहकर व्ययतीत होगा और किनका आदि इसी बारे में आज बात करते है।कुंडली का 7वा भाव विवाह/वैवाहिक जीवन से सम्बंधित भाव है तो अब 7वा भाव,7वे भाव का स्वामी अगर कमजोर होकर राहु केतु या शनि से पीड़ित है तब अलग-अलग पति-पत्नी को वैचारिक मतभेद, आपस मे न बनने के कारण, किसी तीसरे व्यक्ति के

कारण आदि से अलग अलग रहने की स्थिति बन जाती है मंगल के कारण लड़ाई झगड़े के कारण अलग रहने की स्थिति हो जाएगी।अब अगर अलग अलग पति-पत्नी रह रहे है तब ऐसी स्थिति में 7वे भाव स्वामी ग्रह और 7वा भाव बलवान होकर गुरु या शुक्र बुध जैसे शुभ ग्रहों के प्रभाव में भी है साथ ही वर्तमान और भविष्य में वैवाहिक जीवन सम्बन्धी ग्रहो का समय अनुकूल आ रहा है या शुरू होने वाला है तब साथ रहने की स्थिति बन जाएगी।ऐसी स्थिति में वैवाहिक जीवन सम्बन्धी उपाय करने से वैवाहिक जीवन सही हो जाएगा, यदि अच्छे शुभ ग्रहों का सहयोग सातवे भाव को नही है और समय अच्छा वर्तमान भविष्य में वैवाहिक जीवन को लेकर नही आ रहा है तब कोई अच्छा सुधार नही होगा वैवाहिक जीवन मे।                                

 

अब कुछ उदाहरणो से समझते है यदि वैवाहिक जीवन मे दिक्कतो के कारण पति पत्नी से या पत्नी पति से अलग रह रहे या रह रही हैं तो साथ क्या भविष्य में रह पाएंगे और कब तक वैवाहिक जीवन ठीक होकर साथ रह पाएंगे आदि।                                             

 

उदाहरण_अनुसार_वृष_लग्न1:-

वृष लग्न में 7वे भाव स्वामी मंगल और 7वा भाव दोनो ही अशुभ होकर राहु केतु से पूरी तरह पीड़ित हैं या हो गए है तब वैचारिक मतभेद, आपस मे न बनने के कारण अलग रहने की स्थिति पति पत्नी में बन जाएगी, लेकिन ऐसी स्थिति में 7वे भाव स्वामी मंगल और 7वा भाव बलवान और शुभ होकर गुरु शुक्र बुध से सम्बन्ध में भी है और वर्तमान भविष्य में राहु केतु या अशुभ फल देने वाले ग्रहो की दशा अन्तर्दशा नही आ रही हैं ,वैवाहिक जीवन मे सुधार करने वाले ग्रहो को दशा आ रही है तब पति पत्नी साथ भी रहेगे ,वैवाहिक जीवन ठीक भी हो जाएगा आदि।                                                             

 

उदाहरण_अनुसार_मिथुन_लग्न2:-

मिथुन लग्न में 7वे भाव स्वामी गुरु कमजोर होकर राहु केतु सम्बन्ध में है और 7वा भाव भी पीड़ित है तब पति पत्नी मे आपसी दिक्कत होने से अलग रहने की स्थिति बनेंगी, पति इस पत्नी किसी एक कि, अब ऐसी स्थिति में 7वे भाव स्वामी गुरु यहाँ बलवान है शुभ स्थान में है शुक्र बुध चन्द्र 7वे भाव और शुक्र को सहयोग कर रहे हैं तब वैवाहिक जीवन सही होकर पति पत्नी साथ रहने लगेगे , पति पत्नी के रिश्ते में सुधार होकर वैवाहिक जीवन ठीक हो जाएगा।।                                                            

 

उदाहरण_अनुसार_धनु_लग्न3:-

धनु लग्न में 7वे भाव स्वामी बुध राहु केतु से पीड़ित होकर 6,8,12 भाव मे हैं तब पति पत्नी अलग रहने की स्थिति बनेगी, अब ऐसी स्थिति होने पर 7वे भाव स्वामी बुध को गुरु सूर्य शुक्र का सहयोग मिल रहा है तब पति पत्नी के रिश्ते में अनुकूल समय 7वे भाव सबन्धी शुरू होते ही सुधार हो जाएगा।                         अलग रहने पर भी सुधार होकर वैवाहिक जीवन ठीक होकर साथ रहने की स्थिति हैं तब ऐसी स्थिति में उपाय करने से ज्यादा अच्च्व सुधार होकर वैवाहिक जीवन ठीक होकर अच्छे से पति पत्नी साथ रह पाएंगे।।

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