
कुंडली में सूर्य शनि और चतुर्थ भाव बलि होने के बाद व्यक्ति को राजनीति में किस स्तर तक सफलता मिलेगी यह उसकी पूरी कुंडली की शक्ति और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है। जिन लोगो की कुंडली में सूर्य नीच राशि तुला में हो राहु से पीड़ित हो अष्टम भाव में हो या अन्य प्रकार पीड़ित हो तो राजनीति में सफलता नहीं मिल पाती या बहुत संघर्ष बना रहता है। शनि पीड़ित या कमजोर होने से ऐसा व्यक्ति चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो पाता कमजोर शनि वाले व्यक्ति की कुंडली में अगर सूर्य बलि हो तो संगठन में रहकर सफलता मिलती है।
1.यदि सूर्य खुद की या उच्च राशि सिंह मेष में होकर केंद्र त्रिकोण आदि शुभ भावों में बैठा हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।
5.यदि चतुर्थेश चौथे भाव में बैठा हो या चतुर्थेश की चतुर्थ भाव पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति को विशेष जनसमर्थन मिलता है।
राजनीती से जुड़े या राजनीती में जाने की इच्छा रखने वाले लोगों को सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिये
4.हनुमान चालीसा का पाठ करने से कमजोर ग्रह मजबूत होते है।
5.दुर्गा चालीसा का पाठ करने से कुरूप ग्रहों के प्रभाव कम होते है।
6.नित्य भगवान शिव का जलाभिषेक करने से राहू शनि का प्रकोप कम होता है।
इस सभी उपायों को करने से कमजोर ग्रहों को बलि किया जा सकता है। जिस सफलता से वंचित रहा जा रहा है वह जल्द ही अर्जित की जा सकती है।