
यथा – “षष्ठरोग स्थाने गते पापे, तदेशां पापः”
अतः जातक रोगी होगा और यदि षष्ठ भाव में राहु व शनि हो तब असाध्य रोग से पीड़ित हो सकता है !
. व्यक्ति की जन्म कुण्डली में निम्न ग्रहों के योग होने पर भी कैंसर जैसे भयानक रोग की आशंका बन जाती है —
कैंसर से बचाव हेतु उपचार और उपाय :
जन्म कुण्डली में भावों के अनुसार शरीर से सम्बंधित ग्रहों के रत्नों का धारण करने से रोग-मुक्ति सम्भव होती है ! लेकिन कभी-कभी जिस ग्रह के द्वारा रोग उत्पन्न हुआ है, उसके शत्रु ग्रह का रत्न धारण करना भी लाभप्रद होता है ! परन्तु अन्य ज्योतिषीय उपाय भी करने चाहिए !
एक बात बहुत स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि रोग हो जाने के बाद मात्र ज्योतिषीय मंत्र-यंत्र से ही किसी रोग का निवारण नहीं किया जा सकता है क्योकि ग्रह स्थितियों को सुधारकर भी आप शरीर में आये भौतिक परिवर्तन को बदल नहीं सकते हैं ! दूध जब तक दूध है तभी तक उसे बचा सकते हैं, दही बनने या फट जाने पर वह दुबारा दूध नहीं बनाया जा सकता, इसलिए कैंसर जैसे घातक रोग के किसी अंग में पनप जाने पर, मात्र ज्योतिषीय उपायों के सहारे बैठना घातक होगा ! क्योकि एक बात बहुत स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि मात्र ज्योतिषीय, मंत्र-यंत्र से ही किसी रोग का निवारण नहीं किया जा सकता है क्योकि ग्रह स्थितियों को सुधारकर भी आप शरीर में आये भौतिक परिवर्तन को नहीं बदल सकते …!
अंततः सारा खेल अवचेतन मन को ही करना होता है यदि व्यक्ति निराश हताश हुआ तब फिर न दवा काम करेगी न कोई उपाय ! अतः मन को दृढ़ रखकर ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेकर उसके द्वारा बताये गये उपचार, औषधि सेवन व जाँच आदि कराना उतना ही आवश्यक है ! तभी इसका पूर्ण निदान सम्भव हो सकता है !