जन्मकुण्डली में यदि शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति
जन्मकुण्डली में यदि शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति को प्राप्त होते हैं, आईये उन्हें जानते हैं-
जन्मकुण्डली में यदि शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति
गुरु अंगद देव जी का प्रकाश पर्व: श्रद्धा, सेवा और ज्ञान का पावन संदेश सिख धर्म के द्वितीय
नवांश कुंडली का महत्व: क्यों है यह अनिवार्य है। ज्योतिष में एक बहुत ही सटीक कहावत है— “ग्रहों
कुजावत केतु कुजावत केतु अर्थात केतु मंगल के समान है अथवा केतु मंगल का फल देता है।
अष्टम भाव का दशम भाव पर प्रभाव – भावात् भावम् का गूढ़ रहस्य ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक भाव
सट्टा, विरासत और अचानक धन : ग्यारहवे भाव (लाभ भाव)का स्वामी अष्टम भाव में ग्यारहवे भाव का स्वामी
एकादश भाव का स्वामी छठे भाव में – जीवन में संघर्ष के बाद लाभ एकादश भाव का स्वामी
तीसरे (तृतीय)भाव में ग्यारहवे (एकादश) भाव के स्वामी का फल एकादश भाव लाभ, आय, इच्छापूर्ति, मित्रों और बड़े
भीमराव अंबेडकर जयंती : समानता, न्याय और संविधान के शिल्पकार को नमन भारत के महान विचारक, समाज सुधारक
स्वर कोकिला आशा भोंसले जी (Asha Bhosle) का निधन: भारतीय संगीत जगत को गहरा आघात भारतीय संगीत जगत