मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र त्रेता युग की मर्यादापूर्ण इतिहास- मान्यता प्राप्त “रामायण” अति दिव्य ग्रंथ पदवाच्य। रामायण की कथा
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र त्रेता युग की मर्यादापूर्ण इतिहास- मान्यता प्राप्त “रामायण” अति दिव्य ग्रंथ पदवाच्य। रामायण की कथा
।। नमो राघवाय ।। रावण केवल शिवभक्त, विद्वान एवं वीर ही नहीं, अति-मानवतावादी भी थे। उसे भविष्य का
कर्मो का लेखा – जोखा बेटा बन कर,बेटी बनकर,दामाद बनकर,और बहु बनकर कौन आता है ? जिसका तुम्हारे
गर्भावस्था हर महीने में गर्भ,शरीर के अवयव आकार लेते हैं, अत,, विकासक्रम के अनुसार हर महीने गर्भिणी को
काबिल और इज्जतदार…!!!!!! नेटफ्लिक्स पर ‘द क्राउन’ के नाम से एक ड्रामा सिरीज है। वैसे तो ये इंग्लिश
विष्णु के पैरों में ही क्यों रहती हैं महालक्ष्मी हम सभी ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के
कार्तिक में शालिग्राम का दान का महात्मय स्कन्दपुराण के अनुसार सप्तसागरपर्यंतं भूदानाद्यत्फलं भवेत्।। शालिग्रामशिलादानात्तत्फलं समवाप्नुयात्।। शालिग्रामशिलादानात्कार्तिके ब्राह्मणी यथा।।
योगेश्वर द्वादशी योगेश्वर द्वादशी देव उत्थान एकादशी के अगले दिन होती है, जो आषाढ़ से कार्तिक तक चातुर्माह
हरियाणा के हिसार ( वीर बरबरान ) मे एक पीपल का पेड़ है जिसको वीर बर्बरीक ने श्री
हम कहीं न कहीं चूक रहे हैं एक तीन कमरे का रसोई फ्लैट, दो चार एकड़ का फार्म