
बृहत्पाराशर होराशास्त्र 14.10_
`चतुर्थे शुभ-संयुक्ते तदीशे केन्द्र-कोणगे। भौम-शनि-युते दृष्टे गृह-क्षेत्रादि-लाभकृत्॥`
_हिंदी:_ चतुर्थ शुभ युक्त हो, तदीश = चतुर्थेश केंद्र-कोण गत हो, भौम-शनि युत-दृष्ट हो तो गृह-क्षेत्र आदि लाभ करे।
_: फलदीपिका 8.8_
`भूमिपुत्रो यदा तुर्ये मंदो वा तुर्य-संयुतः। चतुर्थेशो बलिष्ठश्च प्रासादं लभते ध्रुवम्॥`
_हिंदी:_ भूमिपुत्र = मंगल जब चतुर्थ में, मंद = शनि चतुर्थ युत हो, चतुर्थेश बली हो तो प्रासाद ध्रुव पाए।
: जातक पारिजात 14.17_
`मंगलः क्षेत्रकारकः शनिः निर्माण-कारकः। चतुर्थे चतुर्थेशे च बलिभ्यां गृह-मुत्तमम्॥`
_हिंदी:_ मंगल क्षेत्र कारक, शनि निर्माण कारक। चतुर्थ-चतुर्थेश में बली हों तो उत्तम गृह।
_: सारावली 18.31_
`चतुर्थेशो गुरौ युक्ते केन्द्रे वा यदि संस्थितः। शनि-भौम-निरीक्षितः सौधं रम्यं विनिर्दिशेत्॥`
_हिंदी:_ चतुर्थेश गुरु युक्त केंद्र स्थित हो, शनि-भौम निरीक्षित हो तो रम्य सौध कहे।
_: उत्तरकालामृत 4.24_
`चतुर्थ-भाव-भावेशौ बलिनौ शुभ-वीक्षितौ। शनि-भौम-समायोगे भूमि-लाभो भवेद् ध्रुवम्॥`
_हिंदी:_ चतुर्थ भाव-भावेश बली शुभ वीक्षित हों, शनि-भौम समायोग में भूमि लाभ ध्रुव हो।
_: मानसागरी 3.43_
`शनि-क्षेत्रे यदा भौमः तुर्येशो लग्नगो यदि। स्व-उच्च-स्व-गृहे वापि गृह-योगो महाबलः॥`
_हिंदी:_ शनि क्षेत्र में जब भौम हो, तुर्येश लग्नगत हो, स्व-उच्च-स्व-गृह में हो तो महाबल गृह योग।
_: बृहज्जातक 20.3_
`न पापैः संयुतो दृष्टो न नीचो नास्तगो यदि। चतुर्थेशो यदा तुर्ये प्रासादं लभते नरः॥`
_हिंदी:_ पाप युत-दृष्ट न हो, नीच-अस्त न हो, चतुर्थेश जब तुर्य में हो तो नर प्रासाद पाए।
_: विश्वकर्मा प्रकाश 2.15_
`भौमः क्षेत्रं शनिः सौधं चतुर्थेशो बलं दिशेत्। त्रयाणां बल-योगेन राज-गृहं विनिर्दिशेत्॥`
_हिंदी:_ भौम क्षेत्र, शनि सौध, चतुर्थेश बल दे। तीनों के बल योग से राज-गृह निर्दिष्ट।
_: मयमतम 6.22_
`चतुर्थ-स्थान-दोषेण गृह-नाशो भवेद् ध्रुवम्। शनि-भौम-प्रसादेन पुनः सौधं प्रजायते॥`
_हिंदी:_ चतुर्थ स्थान दोष से गृह नाश ध्रुव हो। शनि-भौम प्रसाद से पुनः सौध हो।
चौथे घर सुख का धाम, ताको स्वामी बलवान।
मंगल भूमि को देत है, शनि सौध निर्माण॥
केन्द्र त्रिकोण में जब बसैं, तीनों शुभ फल देय।
मातु कृपा से महल मिलै, दुख दरिद्र सब खेय॥`
_ चौथा घर सुख का धाम, उसका स्वामी बलवान हो। मंगल भूमि देता है, शनि सौध = महल निर्माण। केंद्र-त्रिकोण में जब बसें तो तीनों शुभ फल दें। मातृ कृपा से महल मिले, दुख दरिद्र सब खेय = नष्ट हो।
`चतुर्थेश अरु भौम शनि, बली केंद्र त्रिकोण।
राज भवन सम गेह हो, सुख संपति नित मोन॥`
_चतुर्थेश और भौम-शनि बली केंद्र-त्रिकोण में हों तो राज भवन सम गेह हो, सुख संपत्ति नित मोन = मौन = स्थिर रहे।
_ 4H शुद्ध + 4L बली = “जन्मजात जमींदार”_
चतुर्थ भाव में शुभ राशि, शुभ ग्रह, पाप दृष्टि न। 4L केंद्र-त्रिकोण। _नतीजा: पुश्तैनी हवेली, खेत, बाग_। किराये का मकान कभी नसीब में न लिखा। माँ का आशीर्वाद = छत।
: मंगल बली = “जमीन का सौदागर”_
मंगल 4H/10H/11H उच्च-स्वगृही। _प्लॉट खरीदो 1, साल में रेट 5 गुना_। DDA फ्लैट लॉटरी में निकले। किसान से डायरेक्ट जमीन, CLU पास। _रियल एस्टेट किंग_। लाल मिट्टी सोना उगले।
: शनि बली = “निर्माण का ठेकेदार”_
शनि 4H/10H स्वगृही-उच्च-शश योग। _ईंट-सीमेंट-सरिया सस्ता मिले_। मिस्त्री ईमानदार, लेबर टाइम पर। 6 महीने में ग्रे स्ट्रक्चर, 1 साल में गृह प्रवेश। _फैक्ट्री, गोदाम, अपार्टमेंट सब बने_।
_: मंगल+शनि युति 4H = “प्रॉपर्टी एम्पायर”_
जमीन मंगल से, निर्माण शनि से। _खाली प्लॉट लो, मल्टीस्टोरी बनाओ_। बिल्डर बनो, कॉलोनी काटो। सरकार से टेंडर मिले। _एक प्रोजेक्ट = 100 करोड़_।
: 4L 11H + लाभेश 4H = “किराये से करोड़पति”_
परिवर्तन या दृष्टि। _खरीदो 1 फ्लैट, किराया 4 का आए_। PG, हॉस्टल, वेयरहाउस हिट। 40 की उम्र में काम बंद, किराया चालू। _पैसिव इनकम का बादशाह_।
_: 4L नीच/अस्त + मंगल-शनि पीड़ित = “घर का सपना सपना”_
झुग्गी, किराये का कमरा, मकान मालिक रोज ताना। _होम लोन रिजेक्ट, सिबिल 300_। 60 साल में भी “अपना घर कब होगा”। वास्तु दोष, कोर्ट केस, सीलन-दीमक।
_: राहु 4H = “अचानक महल, अचानक सड़क”_
राहु 4H = विदेश में घर, या फ्रॉड में घर गया। _लॉटरी से बंगला, घोटाले में कुर्की_। हवा-हवाई प्रॉपर्टी। आज पेंटहाउस, कल फुटपाथ।
: कर्क लग्न + 4L शुक्र तुला 4H मालव्य + मंगल मकर 7H उच्च + शनि तुला 4H उच्च_
4H में मालव्य+शश महापुरुष योग। मंगल 7H दिग्बली। _नतीजा: 25 साल में शादी के साथ ससुराल से कोठी गिफ्ट_। खुद रियल एस्टेट कंपनी, 35 में 10 प्रोजेक्ट। घर ऐसा कि मुख्यमंत्री उद्घाटन करे। _मार्बल इटली का, फर्नीचर दुबई का_।
: मकर लग्न + 4L मंगल मेष 4H + शनि लग्न शश योग = “जमीन का यमराज”_
मंगल स्वगृही 4H = खेत-खलिहान 100 एकड़। शनि लग्न शश = निर्माण साम्राज्य। _सरकारी ठेकेदार, NHAI का टेंडर_। 40 साल में “मिनिस्टर ऑफ स्टेट” लेवल बंगला। जमीन पर कब्जा करने वाला पैदा न हुआ।
: सिंह लग्न + 4L मंगल वृश्चिक 4H + सूर्य 10H + शनि 6H = “सरकारी आवास योग”_
मंगल स्वगृही 4H = पैतृक हवेली। सूर्य 10H = सरकार। _IAS/IPS बनो, लुटियन दिल्ली बंगला अलॉट_। रिटायरमेंट बाद भी न छूटे। शनि 6H = नौकर-चाकर 11।
: 4L 5° परम नीच + मंगल नीच कर्क + शनि अस्त = “फुटपाथ निवास योग”_
तीनों पीड़ित = _झुग्गी उजड़ जाए, रेन बसेरा भी नसीब न_। किराये के लिए एडवांस न जुटे। माँ-बाप बोले “हमारे नाम पर कलंक”। 70 साल में भी छत न।
: मंगल 28° मकर परम उच्च 4H + 4L 10H + शुक्र 12H = “विदेश में फार्महाउस”_
मंगल परम उच्च 4H = _दुबई में 10 एकड़ फार्म_। 4L 10H = विदेश में नाम। शुक्र 12H = विदेश में लग्जरी। _प्राइवेट जेट से वीकेंड पर जाओ_।
: शनि वक्री 4H + मंगल 8H + 4L 12H = “बनते-बनते घर गिरे”_
नींव भरो तो पैसा खत्म। लोन पास हो तो ब्याज डबल। _कोर्ट केस, स्टे, सीलिंग_। 20 साल लगे, फिर भी आधा-अधूरा। रहने जाओ तो सीलन, बच्चे बीमार।
_ 4H राहु + 4L 6H + मंगल 12H + शनि 8H = “निर्वासन योग”_
घर बेचकर कर्ज भरो। _देश छोड़कर भागो_। रिफ्यूजी कैंप में जिंदगी। मातृभूमि का सुख न। माँ की मृत्यु पर मुखाग्नि न दे पाओ।
_1. 4H = टंकी, 4L = पानी, मंगल = जमीन, शनि = टंकी का ढांचा:_ 4H अच्छा = बड़ी टंकी। 4L बली = पानी की मोटर तेज। _मंगल बली = जमीन सस्ती मिले_। शनि बली = निर्माण मजबूत, 100 साल चले। _एक कमजोर = लीकेज_। चारों बली = ओवरफ्लो ऐश्वर्य।
_2. दिशा तय करेगी कहाँ मिलेगा:_ मंगल बली = दक्षिण दिशा प्लॉट। शनि बली = पश्चिम दिशा। 4L बली जिस राशि में = दिशा। _मेष/वृश्चिक = दक्षिण। मकर/कुंभ = पश्चिम। तुला = पश्चिम। कर्क = उत्तर_। उसी दिशा में मुख वाला घर लो।
_3. दशा = चाबी:_ 4L की दशा में गृह प्रवेश। मंगल दशा में जमीन खरीद। शनि दशा में निर्माण। _राहु 4H में = अचानक लॉटरी/नीलामी से बंगला_। दशा न आए तो योग सोया रहे। गोचर में शनि 4H से निकले तब बनना शुरू।
_शास्त्र प्रमाण: विश्वकर्मा प्रकाश 3.20_
`चतुर्थेशो बलहीनश्चेद् गृह-लाभो न जायते। वास्तु-पूजा-विधानेन सौध-लाभो भवेद् ध्रुवम्॥`
_हिंदी:_ चतुर्थेश बलहीन हो तो गृह लाभ न हो। वास्तु पूजा विधान से सौध लाभ ध्रुव हो।
लाभ 1: वास्तु बैलेंस – “चुंबकीय शांति”_
_व्याख्या:_ ईशान हल्का + नैऋत्य भारी = पृथ्वी का चुंबकीय अक्ष। _ब्रह्मस्थान में दीप = घर की नाभि एक्टिव_। NASA: Geo-magnetic alignment से नींद-डिसीजन बेहतर। _गलत प्रॉपर्टी खरीदने से बचो_।
_लाभ 2: मंगल बल = जमीन सस्ती – “टेस्टोस्टेरोन निर्णय”_
_व्याख्या:_ मंगल मंत्र से Red Blood Cell बढ़े। _रिस्क लेने की क्षमता = जमीन सौदा पक्का_। दलाल डरे। सरकारी बाबू हाँ करे। _दक्षिण मुखी प्लॉट भी सूट करे_।
_लाभ 3: शनि बल = निर्माण निर्विघ्न – “श्रम का सम्मान”_
_व्याख्या:_ शनि = मजदूर। मजदूर को भोजन = शनि प्रसन्न। _लेबर स्ट्राइक न, मटेरियल चोरी न, ठेकेदार भागे न_। सीमेंट जमे, दीवार न फटे। 100 साल गारंटी।
_लाभ 4: 4L बल = माँ का आशीर्वाद – “ऑक्सीटोसिन बूस्ट”_
_व्याख्या:_ चतुर्थ = माता। रोज माँ के पैर छुओ + मंत्र। _माँ खुश = 4H एक्टिव = घर जल्दी_। किराये के पैसे बचें, डाउन पेमेंट जुड़े।
_लाभ 5: पंच धान्य = 5 तत्व बैलेंस_
_व्याख्या:_ जौ=वायु, तिल=अग्नि, सरसों=पृथ्वी, गेहूं=जल, चावल=आकाश। _घर में पंचतत्व बैलेंस = बीमारी 0, लड़ाई 0, लक्ष्मी 100_।
_समय: 21 दिन में रास्ता, 43 दिन में रजिस्ट्री मुहूर्त, 1 साल में गृह प्रवेश।_
_नाम: श्री वास्तु-भौम-शनि-चतुर्थेश गृह लक्ष्मी महायज्ञ_
_शास्त्र प्रमाण: विश्वकर्मा प्रकाश अध्याय 4 श्लोक 11-16 + मयमतम 7.22-25_
_मूल श्लोक:_
`चतुर्थेशे बलहीने च भौम-मंद-कृते तथा।
वास्तु-यज्ञं प्रकुर्वीत सर्व-दोष-निवृत्तये॥11॥
लक्ष-मात्रं जपेन्मंत्रं वास्तु-मंत्रं विधानतः।
दशांशं जुहुयाद्वह्नौ तिलैः कृष्णैः स-सर्पिषा॥12॥
भौम-शनि-समायुक्तं पूजयेद् गृह-देवताम्।
गो-भू-हेम-प्रदानाच्च प्रासादं लभते ध्रुवम्॥13॥
ईष्टका-स्थापनं कुर्याद् यंत्र-मंत्र-समन्वितम्।
अभिषेकं ततः कुर्याद् वास्तोष्पतेः महात्मनः॥14॥`
_हिंदी अनुवाद:_
चतुर्थेश बलहीन हो, भौम-मंद कृत दोष हो तो सर्व दोष निवृत्ति हेतु वास्तु यज्ञ करे॥11॥
वास्तु मंत्र एक लाख विधि से जपे। दशांश हवन अग्नि में काले तिल घी से करे॥12॥
भौम-शनि सहित गृह देवता पूजे। गो-भू-हेम प्रदान से प्रासाद ध्रुव पाए॥13॥
ईष्टका = ईंट स्थापना यंत्र-मंत्र सहित करे। फिर महात्मा वास्तोष्पति का अभिषेक करे॥14॥
_संपूर्ण विधान ब्राह्मण द्वारा:_
– वास्तु मंत्र: 1,00,000 – `ॐ वास्तु पुरुषाय नमः`
– मंगल: 10,000 – `ॐ अं अंगारकाय नमः`
– शनि: 23,000 – `ॐ शं शनैश्चराय नमः`
– चतुर्थेश: ग्रह अनुसार 11,000-20,000
_कुल:_ 1,64,000 जप। 11 दिन 5 ब्राह्मण।
– _समिधा:_ खैर = मंगल, शमी = शनि, पलाश = 4L।
– _हव्य:_ काला तिल+घी+जौ = शनि। मसूर+गुड़+घी = मंगल। पंचमेवा+नवधान्य+नव रत्न = वास्तु।
– _विशेष आहुति:_ 108 ईंट “ॐ वास्तोष्पतये स्वाहा” से। 108 कील “ॐ भूम्यै स्वाहा” से।
– _भूमि दान:_ 1 गज भूमि मंदिर/गौशाला को।
– _गो दान:_ 1 सवत्सा कपिला गाय सवर्ण।
– _हेम दान:_ स्वर्ण 8 ग्राम।
– _गृह दान:_ चांदी का घर 108 ग्राम।
– _नवधान्य:_ 9 अनाज 1.25 किलो प्रत्येक।
– _वास्तु दान:_ ईंट 108, सीमेंट 5 बोरी, सरिया 11, फावड़ा-कन्नी-तसला – 5 मजदूर को वस्त्र-दक्षिणा सहित।
– _मंगल दान:_ मसूर 1.25 किलो, तांबा 250 ग्राम, लाल वस्त्र, मूंगा 6 रत्ती।
– _शनि दान:_ काला तिल 1.25 किलो, लोहा 1 किलो, काला कंबल, नीलम 5 रत्ती।
– _शिल्पी पूजन:_ 5 मिस्त्री-राजमिस्त्री-लेबर को भोजन+वस्त्र+1100/- दक्षिणा।
_
_फल श्रुति – विश्वकर्मा प्रकाश 4.17:_
`एवं यः कुरुते मर्त्यो वास्तु-यज्ञं विधानतः। तस्य गेहे सदा लक्ष्मीः पुत्र-पौत्रैः समन्विता॥
न अग्नि-चौर-भयं तस्य न भूकम्पादि-सम्भवः। प्रासादं लभते दिव्यं राज-राजेश्वरोपमम्॥`
_हिंदी:_ ऐसा जो मर्त्य विधान से वास्तु यज्ञ करे, उसके गेहे सदा लक्ष्मी पुत्र-पौत्र सहित हो। उसे अग्नि-चौर भय न, भूकंप आदि संभव न। राज-राजेश्वर उपम दिव्य प्रासाद पाए।
_प्रत्यक्ष फल:_ 6 माह में भूमि रजिस्ट्री, 2 साल में गृह प्रवेश, 3 साल में किराये से इनकम शुरू। _वास्तु दोष 0, कोर्ट केस 0, लोन टेंशन 0_। 4 पीढ़ी तक घर स्थिर। भूकंप-बाढ़-आग में भी सुरक्षित। _मंगल दे जमीन, शनि दे मकान, 4L दे चाबी_। चतुर्थेश निर्बल हो तो भी बली होकर राजगृह दे।
_सार: 4H = जमीन का खेत, 4L = बीज, मंगल = हल, शनि = मेहनत। चारों मिलें तो फसल = महल। वास्तु यज्ञ = खाद-पानी। फिर सूखा भी हरा, बंजर भी बगीचा।_