
राजनीति में कम परिश्रम में भरपूर पैसा व प्रसिद्धि दोनों ही हैं। सुख-सुविधाएँ अलग से है, और इसमें किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की भी जरूरत भी नहीं।
राहु को राजनीति का ग्रह माना जाता है। इसका दशम भाव से संबंध हो या यह स्वयं दशम में हो तो व्यक्ति राजनीति तो करता है, किन्तु धूर्त किस्म की करता है। अनेक तिकड़मों और विवादों में फँसकर भी अपना वर्चस्व कायम रखता है। राहु यदि उच्च का होकर लग्न से संबंध बनाए तो व्यक्ति चालाक भी होता है।
दूसरी बात कि गुरु यदि उच्च का होकर दशम से संबंध करें, तो व्यक्ति बुद्धि के बल पर अपना स्थान बनाता है। ऐसे व्यक्ति जनता के मन में अपना स्थान बनाते हैं। चालाकी नहीं करते बल्कि तर्कशील, सत्य प्रधान राजनीति करते हैं।
तीसरी बात कि बुध अगर प्रबल होकर दशम से संबंध रखे तो व्यक्ति अच्छा वक्ता होता है। बुध गुरु दोनों प्रबल हैं, तो वाणी में ओज व विद्वत्ता आती है। ऐसे लोगों की भाषण कला बेहद लोकप्रिय होती है। और उसी के बल पर वो लोगों के ह्रदय पर सालो साल राज करते हैं।
राजनीति में सितारा बनकर चमकने के लिए सूर्य का प्रबल होना भी जरूरी है। सूर्य अगर 1, 4, 9, 10 में हो तो व्यक्ति उच्च पद को आसीन को प्राप्त करता है, और लोगों के मन पर राज करता है।
यदि कुंडली में शनि वृषभ या तुला लग्न में हो तो शनि का मजबूत होना बेहद जरूरी है। क्योकि शनि स्थायित्व और स्थिरता देता है। ऐसे लोगों को धर्म व न्याय का साथ देना चाहिए, और सत्य की राजनीति करना चाहिए अन्यथा शनि का कोप उन्हें आसमान से धरातल पर ला फेंक सकता है।
इस तरह कुंडली का निरीक्षण कर उससे ग्रहों को मजबूत किया जाए तो व्यक्ति राजनीति में परचम लहरा सकता है।
जन्मकुण्डली में राजनेता बनने का योग।
कुण्डली में लग्न द्वितीय षष्टम और दशम भाव का सम्बन्ध यदि दशम भाव को प्रभावित करे।
अधिकतम ग्रह केन्द्र त्रिकोण के स्वामी होकर दशम भाव को प्रभावित कर के राजयोग का निर्माण करे तो राजनेता योग बनता है।
दशम और चतुर्थ भाव का मजबूत होना आवश्यक है क्योंकि दशम भाव राजा और चतुर्थ भाव प्रजा को दर्शाता है।
दोनों भाव मजबूत हों तो जातक सरकार से लाभान्वित होता है।
राजनीति में रुचि हो तो राजनेता बनता है।
राजनेता बनने के बहुत सारे योगों में से ये कुछ योगों के उदाहरण हैं जो कि प्रस्तुत कुण्डली में अप्लाई होते हैं।
जातक भविष्य में राजनेता बनेगा क्योंकि राजनीति में रुचि भी है और समाज सेवा में पीछे नहीं हटता है।
गरीब घर से सम्बन्ध रखने वाला ये युवा भविष्य में एक अच्छा समाजसेवी बनेगा तथा राजनीति में भी अपनी अच्छी पहचान बनायेगा।
मेष लग्न की कुण्डली में लग्न का स्वामी मंगल चतुर्थ भाव में नीच राशि का है लेकिन उच्च बृहस्पति के साथ होने तथा चन्द्रमा और शनि की दृष्टि मंगल पर होने से मंगल का नीचभंग राजयोग बना है। जातक संघर्ष कर के जीवन में उन्नति प्राप्त करता है।
बृहस्पति का उच्च राशि में होना हंस महापुरुष राजयोग बना है जिसके कारण जातक को उन्नति मिलेगी और भाग्य बहुत अच्छा साथ देगा।
दशम भाव में शनि का शशक महापुरुष राजयोग बना है जो समाज सेवी बनाएगा न्यायिक स्वभाव देगा।
मंगल शनि का दृष्टि सम्बन्ध द्वन्द योग बना रहा है, जातक बड़े से बड़े रिस्क लेने को तैयार हो जाता है क्योंकि मेष लग्न अग्नि तत्व का लग्न है और जोश अधिक रहता है, जब दशमेश के साथ दृष्टि सम्बन्ध होने पर द्वन्द योग बने तो व्यक्ति अच्छे काम के लिए रिस्क लेने से नहीं चूकता है क्योंकि लग्नेश और दशमेश का दृष्टि सम्बन्ध व्यक्ति को कर्मशील बनाता है।
लग्नेश दशम भाव को तथा दशमेश को उच्च दृष्टि से देख रहा है जो राजनीतिक सम्पर्क में वृद्धि कर रहा है।
दशमेश शनि और भाग्येश बृहस्पति का दृष्टि सम्बन्ध धर्मकर्माधिपति राजयोग बना रहा है जो भविष्य में राजनैतिक करियर में उन्नति दे रहा है।
नवम भाव में नीच राहु होने के कारण पिता का सुख कम रहा है तथा बच्चपन भी कठिनाई में निकाला है, संघर्ष अधिक करना पड़ा है।
बच्चपन राहु की खराब दशा ने जातक को जिन्दगी के काफी बुरे चेहरे दिखाए हैं जिसके कारण फर्श और अर्श की परिस्थितियों की समझ होगी क्योंकि राहु महादशा के बाद बृहस्पति की महादशा शुरू होगी और बृहस्पति राजयोग बना रहा है।
बृहस्पति की महादशा में जातक की उन्नति का योग बनता है और अक्तूबर 2020 से राजयोग कारक ग्रह की दशा शुरू हो रही है।
आने वाले समय में इलैक्शन जब भी होंगे उनमें विजय होना निश्चित है।
बृहस्पति की महादशा 2020 में ही शुरू है जो राजनीति में करियर की शुरुआत करेगी।
जातक अपने जीवन में MLA जरूर बनेगा और दशमेश शनि तथा सप्तमेश शुक्र और भाग्येश बृहस्पति के दृष्टि सम्बन्ध से जनता के द्वारा चुना जाना स्पष्ट करता है।
35 साल के राजनैतिक करियर में यहाँ तक भी सम्भावना है कि मन्त्री भी बनेंगे।