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तुझे किस किसने नहीं ध्याया मेरी माँ,भाग-7

हे परम पूज्य विश्वेश्वर आत्मन श्रीकृष्ण❗फिर राम जी ने शिवजी व दुर्गा की पूजा तप व्रत कब किया और कैसे दुर्गा लंका से वचन मुक्त हुई?

प्रिय अर्जुन❗राम जी के केवल एक ही उपास्य देव हैं और वे हैं शिव जी और उनकी आल्हादिनी शक्ति होने के नाते माँ दुर्गा उनकी आराध्या देवी हैं।अतः वे तो उन्हें बालपन से ही ध्याते हैं।

हां, अब वनवास काल में वे तीर्थराज प्रयाग में त्रिवेणी स्नान करते समय व चित्रकूट में  मंदाकिनी श्री गङ्गा जी में स्नान करते समय व पंचवटी में गोमती गङ्गा में स्नान करते समय वे नित्य ही शिवलिंग निर्माण करके शिव आराधना करते रहे व गणेश गिरिजा जी को अर्चन वंदन करके शिव पंचाक्षरी मंत्र जप व ध्यान करते रहे और ऋषि मुनियों के साथ हवन आदि में शामिल होते रहे।वे सबके यज्ञ में पधारकर सबके ही मनोरथ भी पूर्ण करते रहे।ऋषियों से शिवपुराण आदि भी सुनते रहे।

इस प्रकार 13 वर्ष सम्पूर्ण होने के समय पापी रावण सीता को अपरहण करके ले गया और मार्ग में जटायु को मरते, तड़फते देखा,उसी ने बताया कि रावण सीता जी का अपहरण करके ले गया है।मृत्यु पर जटायु को परम धाम देकर व शबरी को मोक्ष देकर व हनुमत द्वारा सुग्रीव से मिलन व बाली वध करके और सुग्रीव की सहायता से वानर दल चारों तरफ पठाया सीता जी की खोज के लिये।

पूर्व,पश्चिम व उत्तर दिशा के वानर निराश लौट आये परन्तु हनुमान जी सागर लांघ लंका आये तो लंकिनी से भेंट हुई।लंकिनी तो मुक्त हो गयी क्योंकि हनुमान जी ने उसे मार्ग की बाधा जान उसे मुक्का जड़ा तो लंकिनी को ब्रह्मा जी का वचन याद आ गया कि जब एक वानर से तुम परास्त हो जाओ तो समझ लेना कि लंका का विनाश आरम्भ हो गया और तब तुम लंका से स्वयं मुक्त हो जाओगी और मेरे ही लोक में आ जाओगी।अतः लंकिनी तो मुक्त हो गयी।आगे लंकिनी के सेवादार थे,वे सब हनुमान जी ने मार दिए।

लेकिन लंका के अंदर प्रवेश करना उनके लिये महाकठिन हो गया क्योंकि चामुंडा माँ ने उन्हें लंका के भीतर ही नहीं घुसने दिया।

ऐसा क्यों किया चामुंडा माता ने प्रभु❓उनको तो पता था कि हनुमान जी शुभ कारज करने निकले पवित्र आत्मा हैं।फिर चामुंडा देवी ने हनुमान का रास्ता क्यों रोका❓

ये ठीक है कि हनुमान जी पवित्र हैं परन्तु चामुंडा देवी वचन बध थी,वे रावण की लंका की भीतर से पहरे बंदी कर रही थी।हनुमान जी मसक समान अति लघु रूप में थे फिर भी एक छिद्र तक से वे लंका के भीतर न घुस सके।जहाँ देखो,ऊपर नीचे बाएं दाएं सभी जगह चामुंडा देवी की शक्ति का कवच था।रावण से चामुंडा देवी दगा भी नहीं कर सकती थी क्योंकि वचन निभाने में देवी सम्पूर्ण शक्ति से निमग्न थी।

फिर हनुमान जी लंका में घुसे कैसे प्रभु❓

जब हनुमान जी कई घण्टे कोशिश करते करते थक गए तो उन्होंने कहा कि कौन अदृश्य शक्ति है, जो मेरा मार्ग रोक रही है, हिम्मत है तो सामने आओ मेरे।

लेकिन चामुंडा देवी सामने नहीं आयी और न ही मार्ग दिया।

चामुंडा देवी हनुमान जी के सामने क्यों नहीं आयी केशव❓

क्योंकि हनुमान जी के शब्दों में आक्रोश था।ज्यों ज्यों हनुमान जी कुपित होते गए,चामुंडा देवी भी कुपित होती गयी।

हनुमान जी की बड़ी विचित्र स्तिथि हो गयी कि किये कराए पर पानी फिर गया और अब मैं राम जी के कारज को पूरा भी नहीं कर पाऊंगा,लेकिन मैं वापस नहीं लौटूंगा।सागर में प्राणों को विलीन कर दूंगा।राम जी का काम नहीं तो हनुमान का जीने का कोई काम नहीं।

फिर क्या किया हनुमान जी ने जनार्दन❓ये तो बड़ी विचित्र परिस्थिति बन गयी हनुमान जी के लिये।

हाँ अर्जुन❗लेकिन हनुमान जी ने पुनः प्रार्थना की कि आप जो भी हैं ,मुझे एक बार अंदर तो आने दें।हनुमान जी की बात चामुंडा देवी ने फिर अनसुनी कर दी।

चामुंडा देवी उस अधर्मी पापी की लंका का पहरा देने में इतनी निष्ठा से लगी रही कि ये भी न विचारा कि हनुमान जी नेक राह पर हैं।ये तो गलत था न माधव❓

नहीं अर्जुन❗ये ठीक है कि रावण अधर्मी था।लेकिन भगवती अधर्मी नहीं थी,वे निष्ठा पर थीं।यही तो देव देवी की महानता है।

लेकिन हनुमान ने क्या किया फिर लंका में भीतर जाने को❓

प्रिय अर्जुन❗हनुमानजी को इतना भयंकर क्रोध आया कि उन्होंने अपनी बज्र समान गदा को मंत्र पढ़कर उस सुरक्षा चक्र को भेदने को जोर से फेंका।

इस पर चामुंडा ने अति कुपित हो हनुमान की गदा वापस उन्हीं पर फेंक दी।हनुमान जी अचंभित थे।अब वे महसूस करने लगे कि इस युद्ध का परिणाम मेरे विपरीत है।कोई अदृश्य शक्ति अति बलवान है जो मुझ पर इतनी भारी पड़ रही है।आज तक मैंने हार नहीं मानी इस कदर।आज राम जी का नाम भी इस कवच को नहीं भेद रहा।ये कौन सा तंत्र है जो मैं तोड़ नहीं पा रहा।

अब हनुमान ने राम जी का सुमिरन करके शिव जी के चरणों में ध्यान लगाया।लेकिन शिव जी की शक्ति तो दुर्गा चामुंडा के साथ थी।अतः शिव जी ने हनुमान जी की कोई सहायता नहीं की।

अब हनुमान जी ने लंका के चारों ओर चक्रवात पैदा किया,तब भी कोई फर्क न पड़ा क्योंकि चक्रवात को भी चामुंडा ने लंका के भीतर प्रवेश न होने दिया।

फिर हनुमान ने गदा में अग्नि देव का आवाहन करके लंका के मुख्य द्वार पर दे मारा तो चामुंडा कुपित होकर उस अग्नि को भी पी गयी और हनुमान के सामने शस्त्र लेकर उन पर आघात करने झपटी।

अब चामुंडा व हनुमान दोनों आमने सामने लंका के बाहर थे।

हनुमान जी ने पूछा कि आप कौन हैं ❓मुझे लंका के भीतर आप क्यों नहीं जाने दे रही हैं।आप स्त्री हैं।मैं आप पर शस्त्र नहीं चलाऊंगा।कृपया मेरी विनती सुनें।मुझे लंका के भीतर जरूरी काम है।

नहीं ! मेरे होते हुए लंका में कोई प्रवेश नहीं कर सकता।

हनुमान जी ने कहा कि मैं आप पर शस्त्र नहीं चला सकता लेकिन मजबूर होकर बैठ भी नहीं सकता।आप मुझे भीतर जाने दें,हठ न करें।

देवी चामुंडा ने कहा कि अंदर जाने की केवल एक ही चाबी है और वह है मुझे परास्त करना।उठाओ शस्त्र जाना है तो,अन्यथा लौट जाओ।

अब हनुमान जी को भयंकर क्रोध आया और वे गदा लेकर झपटे देवी पर।लेकिन देवी ने हनुमान को बहुत दूर फेंक दिया।हनुमान जी चकित।फिर झपटे देवी पर।फिर देवी ने उग्र हुंकार से उन्हें पीछे धकेल दिया।अब हनुमान जी घबराए।ये इतनी शक्तिशाली स्त्री कौन हैं, जो इतनी प्रचंड शक्ति रखती है कि मुझे एक फूंक में ही उड़ा दिया।

अब हनुमान जी समझ गए कि इनके आगे मेरी दाल नहीं गलेगी।लेकिन ये हैं कौन❓अतः हनुमान जी अति विनीत हो गए और हाथ जोड़कर बोलेआप कौन हैं।मैं आपकी इस वीरता व शक्ति को नमन करता हूँ।अपना परिचय दें।

देवी ने कहा,मैं चामुण्डा हूँ।रावण की लंका की भीतरी प्रहरी।मेरे होते हुए लंका में कोई प्रवेश नहीं कर सकता।तुम भी नहीं।

हनुमान जी चामुण्डा नाम सुनते ही हक्के बक्के रह गए।अच्छा ❗तो आप हैं माँ ❗मेरा शत शत अभिनन्दन आपको ❗माँ❗मेरी विनती स्वीकार करिए।मुझे भीतर सीता माता को राम जी का संदेश देना है, मेरी मदद करो माँ चामुंडा।

नहीं हनुमान।मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकती।युद्ध करो युद्ध,नहीं तो वापस चले जाओ।

क्रमशः●●●●●●●●●●●●

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