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आप जीवन मे आगे कब बढ़ पाएंगे

जीवन का हर तरह से एक ही जगह रुक जाना ज़िंदगी बहुत उदासीन और निराशाजनक लगने लगती है कैरियर, धन, मकान, सफलता, उन्नति, सुख, विवाह/वैवाहिक जीवन भाग्य आदि को लेकर एक ही जगह रुक जाना बहुत दिक्कत भरा जीवन हो जाता है तो आज इसी बारे में बात करते है अगर इन सभी चीजो को लेकर आगे नही बढ़ पा रहे है तो कब तक आगे बढ़ पाएंगे और बढ़ पाएंगे या नही और आगे बढ़ पाएंगे तो क्या कुछ उपाय आदि करके आगे बढ़ पाएंगे आदि।                                                                                                                                                

 

कुंडली मे चल रही महादशा और अन्तर्दशाये ही यह तय करेंगी कि आप जीवन मे आगे कब बढ़ पाएंगे और कितना आगे बढ़ पाएंगे साथ ही जीवन से जुड़े किन किन अलग अलग सुखों में आगे बढ़ पाएंगे यह कुंडली मे बनने वाला राजयोग और कुंडली के उस भाव की स्थिति पर निर्भर करेगा जिस भाव से संबधित चीजो में आगे बढ़ना चाहते है जैसे कैरियर में आगे बढ़ने के लिए दसवें भाव एयर दसवें भाव की स्थिति पर सब निर्भर करेगा।अगर महादशाएँ और अन्तर्दशाये सहित कुंडली के उन भावों की और भावों के स्वामियो की स्थिति अनुकूल है जिस सुख प्राप्ति के लिए आगे बढ़ना चाहते है तब आसानी से आगे बढ़ते जाएंगे वरना जब जब अनुकूल महादशाएँ अन्तर्दशाये आएगी तब आगे बढ़ पाएंगे बाकी अगर जीवन सब तरह से आगे बढ़ने पर परेशानियां है तब उपाय करके ही आगे बढ़ पाएंगे।

अब उपरोक्त सभी बातों को कुछ उदाहरणों से समझते है अगर आगे नही बढ़ पा रहे है तो कब तक सभी तरह से आगे बढ़ पाएंगे और कैसे आदि।                                                                                                                             

 

उदाहरण_अनुसार_मेष_लग्न1:-

मेष में राजयोग कारक ग्रह और राजयोग बनाने वाले ग्रह केवल सूर्य मंगल गुरु चन्द्र है और कुछ स्थितियों में शनि भी राजयोग बनाते है अनुकूल उपरोक्त ग्रहो से सबन्ध होने पर, तो अब सूर्य मंगल गुरु चन्द्र इनमे से अगर ग्रह सभी या कुछ राजयोग में है मतलब आपस मे इनका सम्बन्ध शुभ स्थिति में है और इन्ही ग्रहो की या फिर किसी अनुकूल शुभ स्थिति में बैठे ग्रह की महादशा और अन्तर्दशाये शुरू होने वाली है तब उसी समय से जीवन मे आगे बढ़ने के रास्ते बनने लगेंगे और आगे बढ़ेंगे।बाकी ग्रह पीड़ित हुए तब उपाय करके ही आगे बढ़ पाएंगे।।                                                                             

 

उदाहरण_अनुसार_कर्क_लग्न2:-

कर्क लग्न में ग्रह राजयोग बनाकर बैठे हो जो कि केवल मंगल गुरु चन्द्र शुक्र यही चार ग्रह या इनमे से जो भी ग्रह आपस मे सम्बन्ध बनाकर बैठे होंगे बलवान शुभ स्थिति में तब वह ही राजयोग बना पाएंगे या फिर यहाँ कोई भी ग्रह बहुत शुभ और बलवान स्थिति में होकर उच्च राशि का हो या अपनी राशि का हो तो उसकी महादशा या फिर जो ग्रह राजयोग बनाकर बैठे उन ग्रहो की महादशा अन्तर्दशाये जब आएगी तब जीवन मे आगे बढ़ पाएंगे, बाकी ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में है तब उपाय करके आगे बढ़ पाएंगे।।

उदाहरण_अनुसार_मकर_लग्न3:-

मकर लग्न में शुक्र बुध मंगल चन्द्र शनि यह पाँच ग्रह ही या इनमे से 2 या 3 ग्रह (जो केंद्र त्रिकोण के स्वामी हो) सम्बन्ध बनाकर बैठे होंगे या यह ग्रह या इनमे से कोई भी ग्रह अपनी अपनी उच्च राशि या खुद की राशियो में शुभ और अच्छी स्थिति में कुंडली मे बैठे होंगे और महादशाएँ अन्तरर्दशाये जब इन ग्रहो की आएगी या शुरू होंगी तब समय अनुकूल शुरू होगा तब जीवन मे आगे बढ़ने के रास्ते बनेंगे आदि बाकी अगर ग्रह आगे बढ़ने की स्थिति में तो है लेकिन उपाय करने से ही आगे बढ़ा पाएंगे तब उपाय करके ही आगे बढ़ पाएंगे।।

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