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रिश्ते कब बिगड़ते हैं - 8 बड़े ज्योतिष कारण

*1. सप्तम भाव में शनि + मंगल युति = “शादी या सजा”

*क्यों बिगड़ता है:* शनि = ठंडा, देरी, बोझ। मंगल = गर्म, गुस्सा, झगड़ा। दोनों सप्तम में = बर्फ और आग एक बिस्तर पर। 

*फल:* पार्टनर से रोज लड़ाई। प्यार कम, ड्यूटी ज्यादा। “शादी कर ली अब निभाना पड़ेगा” वाली फीलिंग। फिजिकल रिलेशन में भी प्रॉब्लम। तलाक के 70% केस में ये युति मिलती है। 

*कब ज्यादा खराब:* मंगल नीच या शनि वक्री हो तो मार-पीट, कोर्ट केस। 

*उपाय:* मंगलवार हनुमान चालीसा + शनिवार तेल दान। शादी 28 के बाद करो। 

*अपवाद:* मेष/मकर लग्न में ये युति राजयोग भी दे, पर रिश्ता फिर भी टफ रहेगा।

 

*2. शुक्र + केतु युति = “प्यार में संन्यास”

*क्यों बिगड़ता है:* शुक्र = आकर्षण, रोमांस, भोग। केतु = कट ऑफ, वैराग्य, भ्रम। दोनों साथ = पहले पागलों जैसा प्यार, फिर अचानक मन उचट जाना। 

*फल:* 3 महीने डेटिंग, फिर “मुझसे नहीं होगा”। शादी के बाद पार्टनर से दूरी। एक्स्ट्रा मैरिटल नहीं, पर इमोशनल तलाक। पार्टनर को लगे “ये मुझे प्यार ही नहीं करता”। 

*खास:* केतु की दशा में तो रिश्ता सूखा रेगिस्तान। शुक्र-केतु 12th में = सीक्रेट अफेयर फिर गिल्ट। 

*उपाय:* शुक्र मजबूत करो – इत्र, सफेद कपड़े, पत्नी को गिफ्ट। केतु के लिए गणेश पूजन।

 

*3. चंद्र + राहु 7वें भाव में = “ग्रहण दोष वाला प्रेम”

*क्यों बिगड़ता है:* चंद्र = मन, भरोसा। राहु = भ्रम, धोखा, जादू। 7th में = पार्टनर धुंध में दिखता है। 

*फल:* शक का कीड़ा। “कहीं अफेयर तो नहीं?”, “सच बोल रहा या झूठ”। पार्टनर अच्छा भी हो तो भी मन नहीं मानेगा। खुद भी मूड स्विंग – आज जान दूं, कल ब्लॉक कर दूं। 

*खतरा:* लव मैरिज होकर भी 2 साल में केस। मेंटल टॉर्चर दोनों तरफ। 

*उपाय:* पूर्णिमा व्रत, चांदी पहनो, राहु के लिए दुर्गा सप्तशती। शादी से पहले कुंडली मिलान 100% जरूरी।

 

*4. दूसरा भाव पीड़ित = “सास-बहू का महाभारत”*

*क्यों बिगड़ता है:* 2nd = परिवार, ससुराल, बोल-चाल। शनि-राहु-केतु-मंगल से पीड़ित हो तो ससुराल इंटरफेयर करेगा। 

*फल:* “तेरी मां ने ये कहा”, “तेरे भाई ने वो किया”। हर बात में तीसरा इंसान। प्राइवेसी जीरो। पार्टनर फैमिली की साइड ले तो रिश्ता गया। 

*वाणी दोष:* 2nd पीड़ित = कड़वी जुबान। 1 गाली = 10 साल का प्यार खराब। 

*उपाय:* ससुराल से अलग रहो। गाय को रोटी, बोलने से पहले तोलो। 2nd का मालिक मजबूत करो।

*5. मंगल 8वें भाव में = “शक का मांगलिक”

*क्यों बिगड़ता है:* 8th = ससुराल, सीक्रेट, सेक्स, मृत्यु। मंगल यहां = कंट्रोल, जिद, डाउट। 

*फल:* “कहां गए थे?”, “फोन किसका था?” – 24×7 CID। पार्टनर की लाइफ कंट्रोल करेगा। बेडरूम में भी जबरदस्ती। ससुराल से झगड़ा। विधुर/विधवा योग भी बन सकता है। 

*महिला की कुंडली में:* पति पर हावी, या पति का एक्सीडेंट। 

*उपाय:* मांगलिक दोष काट – मंगलवार व्रत, कुंभ विवाह। शादी 28+ में, मांगलिक से ही करो।

 

*6. शुक्र 6ठे भाव में = “प्यार या कॉम्पिटिशन”

*क्यों बिगड़ता है:* 6th = दुश्मन, बीमारी, कर्जा, कॉम्पिटिशन। शुक्र यहां = प्यार में भी राइवलरी। 

*फल:* “उसका एक्स ज्यादा अच्छा था”, “ऑफिस में वो लड़की तुझे लाइन मार रही”। जलन, इनसिक्योरिटी। पार्टनर बीमार या कर्जदार मिले। कोर्ट मैरिज, फिर कोर्ट केस। 

*एक्स्ट्रा:* लव ट्रायंगल। पार्टनर का अफेयर पकड़ा जाए। 

*उपाय:* शुक्र के बीज मंत्र। पत्नी को रिस्पेक्ट। गुप्त रोग से बचो। 6th का मालिक शुभ हो तो नौकरी वाली बीवी मिले।

 

*7. सप्तमेश 6-8-12 में = “पार्टनर है पर सुकून नहीं”

*क्यों बिगड़ता है:* सप्तमेश = पार्टनर का कारक। 6-8-12 = दुःस्थान। 

*फल:* 

– *6th में:* पार्टनर बीमार, कर्जदार, या दुश्मन जैसा। रोज बहस। 

– *8th में:* ससुराल से प्रॉब्लम, अचानक धोखा, विधवा/तलाक योग। सेक्स लाइफ डिस्टर्ब। 

– *12th में:* पार्टनर दूर – विदेश, हॉस्पिटल या जेल। खर्चा करवाए पर साथ न दे। बेड प्लेजर जीरो। 

*कॉमन:* “सब है पर कुछ मिसिंग है” वाली फीलिंग। सैटिस्फैक्शन नहीं। 

*उपाय:* सप्तमेश को बल दो। 7th में गुरु की दृष्टि बचाए।

 

*8. सूर्य 7वें में नीच = “ईगो का ताजमहल”

*क्यों बिगड़ता है:* सूर्य = अहंकार, पिता, राजा। 7th में = पार्टनर को दबाना। नीच तुला राशि में = ईगो पर चोट। 

*फल:* “मैं सही, तू गलत”। पब्लिक में पार्टनर की बेइज्जती। “मेरे स्टेटस की नहीं” बोलकर नीचा दिखाना। पत्नी को नौकरानी समझना। 

*पुरुष में:* डॉमिनेटिंग हसबैंड। *महिला में:* पति को जोरू का गुलाम बनाना। दोनों केस में तलाक। 

*खास:* सरकारी अफसर/बिजनेसमैन की कुंडली में कॉमन। पावर घर ले आते हैं। 

*उपाय:* अहंकार छोड़ो। सूर्य को जल दो। पिता तुल्य लोगों का सम्मान। पार्टनर को इज्जत दो।

 

*बोनस: रिश्ता बचाने के 5 अचूक नियम

  1. *7th भाव खाली = बेस्ट।* ग्रह कम हों तो झगड़ा कम।
  2. *गुरु की दृष्टि 7th पर = भगवान का कवच।* हजार दोष कैंसिल।
  3. *शुक्र-चंद्र मजबूत + पाप ग्रह से दूर = रोमांटिक लाइफ।*
  4. *मांगलिक है तो मांगलिक से ही शादी।* आग से आग कटती है।
  5. *36 गुण मिले पर नाड़ी दोष हो = शादी नहीं।* नाड़ी दोष = संतान/हेल्थ प्रॉब्लम।

 

*सबसे खतरनाक कॉम्बो:

*शनि + मंगल + राहु 7th में* = शादी नहीं, सजा-ए-कालापानी। तलाक 100%। 

*शुक्र + केतु + चंद्र 8th में* = लव मैरिज होकर भी विधवा योग।

 

*सार 3 लाइन में:

  1. *पाप ग्रह 7th में* = शादी में आग। *शुभ ग्रह* = शहद।
  2. *2nd, 7th, 8th, 12th खराब* = ससुराल, पार्टनर, सेक्स, नींद चारों खराब।
  3. *उपाय से 50% कटता है, अक्ल से 50% बचता है* – ईगो, शक, कंट्रोल छोड़ो।

राहु लग्न में = “माया-निष्ठा योग” = वफादारी का श्राप + वरदान

अकेलेपन का OTP

यदि एक ही भाव पर गुरु और शनि की दृष्टि पड़े तो

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