
*1. सप्तम भाव में शनि + मंगल युति = “शादी या सजा”
*क्यों बिगड़ता है:* शनि = ठंडा, देरी, बोझ। मंगल = गर्म, गुस्सा, झगड़ा। दोनों सप्तम में = बर्फ और आग एक बिस्तर पर।
*फल:* पार्टनर से रोज लड़ाई। प्यार कम, ड्यूटी ज्यादा। “शादी कर ली अब निभाना पड़ेगा” वाली फीलिंग। फिजिकल रिलेशन में भी प्रॉब्लम। तलाक के 70% केस में ये युति मिलती है।
*कब ज्यादा खराब:* मंगल नीच या शनि वक्री हो तो मार-पीट, कोर्ट केस।
*उपाय:* मंगलवार हनुमान चालीसा + शनिवार तेल दान। शादी 28 के बाद करो।
*अपवाद:* मेष/मकर लग्न में ये युति राजयोग भी दे, पर रिश्ता फिर भी टफ रहेगा।
*2. शुक्र + केतु युति = “प्यार में संन्यास”
*क्यों बिगड़ता है:* शुक्र = आकर्षण, रोमांस, भोग। केतु = कट ऑफ, वैराग्य, भ्रम। दोनों साथ = पहले पागलों जैसा प्यार, फिर अचानक मन उचट जाना।
*फल:* 3 महीने डेटिंग, फिर “मुझसे नहीं होगा”। शादी के बाद पार्टनर से दूरी। एक्स्ट्रा मैरिटल नहीं, पर इमोशनल तलाक। पार्टनर को लगे “ये मुझे प्यार ही नहीं करता”।
*खास:* केतु की दशा में तो रिश्ता सूखा रेगिस्तान। शुक्र-केतु 12th में = सीक्रेट अफेयर फिर गिल्ट।
*उपाय:* शुक्र मजबूत करो – इत्र, सफेद कपड़े, पत्नी को गिफ्ट। केतु के लिए गणेश पूजन।
*3. चंद्र + राहु 7वें भाव में = “ग्रहण दोष वाला प्रेम”
*क्यों बिगड़ता है:* चंद्र = मन, भरोसा। राहु = भ्रम, धोखा, जादू। 7th में = पार्टनर धुंध में दिखता है।
*फल:* शक का कीड़ा। “कहीं अफेयर तो नहीं?”, “सच बोल रहा या झूठ”। पार्टनर अच्छा भी हो तो भी मन नहीं मानेगा। खुद भी मूड स्विंग – आज जान दूं, कल ब्लॉक कर दूं।
*खतरा:* लव मैरिज होकर भी 2 साल में केस। मेंटल टॉर्चर दोनों तरफ।
*उपाय:* पूर्णिमा व्रत, चांदी पहनो, राहु के लिए दुर्गा सप्तशती। शादी से पहले कुंडली मिलान 100% जरूरी।
*4. दूसरा भाव पीड़ित = “सास-बहू का महाभारत”*
*क्यों बिगड़ता है:* 2nd = परिवार, ससुराल, बोल-चाल। शनि-राहु-केतु-मंगल से पीड़ित हो तो ससुराल इंटरफेयर करेगा।
*फल:* “तेरी मां ने ये कहा”, “तेरे भाई ने वो किया”। हर बात में तीसरा इंसान। प्राइवेसी जीरो। पार्टनर फैमिली की साइड ले तो रिश्ता गया।
*वाणी दोष:* 2nd पीड़ित = कड़वी जुबान। 1 गाली = 10 साल का प्यार खराब।
*उपाय:* ससुराल से अलग रहो। गाय को रोटी, बोलने से पहले तोलो। 2nd का मालिक मजबूत करो।
*5. मंगल 8वें भाव में = “शक का मांगलिक”
*क्यों बिगड़ता है:* 8th = ससुराल, सीक्रेट, सेक्स, मृत्यु। मंगल यहां = कंट्रोल, जिद, डाउट।
*फल:* “कहां गए थे?”, “फोन किसका था?” – 24×7 CID। पार्टनर की लाइफ कंट्रोल करेगा। बेडरूम में भी जबरदस्ती। ससुराल से झगड़ा। विधुर/विधवा योग भी बन सकता है।
*महिला की कुंडली में:* पति पर हावी, या पति का एक्सीडेंट।
*उपाय:* मांगलिक दोष काट – मंगलवार व्रत, कुंभ विवाह। शादी 28+ में, मांगलिक से ही करो।
*6. शुक्र 6ठे भाव में = “प्यार या कॉम्पिटिशन”
*क्यों बिगड़ता है:* 6th = दुश्मन, बीमारी, कर्जा, कॉम्पिटिशन। शुक्र यहां = प्यार में भी राइवलरी।
*फल:* “उसका एक्स ज्यादा अच्छा था”, “ऑफिस में वो लड़की तुझे लाइन मार रही”। जलन, इनसिक्योरिटी। पार्टनर बीमार या कर्जदार मिले। कोर्ट मैरिज, फिर कोर्ट केस।
*एक्स्ट्रा:* लव ट्रायंगल। पार्टनर का अफेयर पकड़ा जाए।
*उपाय:* शुक्र के बीज मंत्र। पत्नी को रिस्पेक्ट। गुप्त रोग से बचो। 6th का मालिक शुभ हो तो नौकरी वाली बीवी मिले।
*7. सप्तमेश 6-8-12 में = “पार्टनर है पर सुकून नहीं”
*क्यों बिगड़ता है:* सप्तमेश = पार्टनर का कारक। 6-8-12 = दुःस्थान।
*फल:*
– *6th में:* पार्टनर बीमार, कर्जदार, या दुश्मन जैसा। रोज बहस।
– *8th में:* ससुराल से प्रॉब्लम, अचानक धोखा, विधवा/तलाक योग। सेक्स लाइफ डिस्टर्ब।
– *12th में:* पार्टनर दूर – विदेश, हॉस्पिटल या जेल। खर्चा करवाए पर साथ न दे। बेड प्लेजर जीरो।
*कॉमन:* “सब है पर कुछ मिसिंग है” वाली फीलिंग। सैटिस्फैक्शन नहीं।
*उपाय:* सप्तमेश को बल दो। 7th में गुरु की दृष्टि बचाए।
*8. सूर्य 7वें में नीच = “ईगो का ताजमहल”
*क्यों बिगड़ता है:* सूर्य = अहंकार, पिता, राजा। 7th में = पार्टनर को दबाना। नीच तुला राशि में = ईगो पर चोट।
*फल:* “मैं सही, तू गलत”। पब्लिक में पार्टनर की बेइज्जती। “मेरे स्टेटस की नहीं” बोलकर नीचा दिखाना। पत्नी को नौकरानी समझना।
*पुरुष में:* डॉमिनेटिंग हसबैंड। *महिला में:* पति को जोरू का गुलाम बनाना। दोनों केस में तलाक।
*खास:* सरकारी अफसर/बिजनेसमैन की कुंडली में कॉमन। पावर घर ले आते हैं।
*उपाय:* अहंकार छोड़ो। सूर्य को जल दो। पिता तुल्य लोगों का सम्मान। पार्टनर को इज्जत दो।
*बोनस: रिश्ता बचाने के 5 अचूक नियम
*सबसे खतरनाक कॉम्बो:
*शनि + मंगल + राहु 7th में* = शादी नहीं, सजा-ए-कालापानी। तलाक 100%।
*शुक्र + केतु + चंद्र 8th में* = लव मैरिज होकर भी विधवा योग।
*सार 3 लाइन में: