Sshree Astro Vastu

हम कहीं न कहीं चूक रहे हैं

एक तीन कमरे का रसोई फ्लैट, दो चार एकड़ का फार्म हाउस, एक चार पहिया वाहन, और भौतिक वस्तुओं का प्रदर्शन, हम कहते हैं, “अम्क्या-तमक्या ने शून्य से ब्रह्मांड का निर्माण किया!”हो यह रहा है कि व्यक्ति सुख पाने की आशा में अमीर बनने का प्रयास करता है। लेकिन कुछ भी खुश नहीं!

 

हम कहते हैं कि बचपन में हम खूब मस्ती करते थे. करने को बहुत कुछ था, घर भरा हुआ था। आप कभी नहीं जानते कि दिन कब ख़त्म होगा!

तो अब क्या हुआ? मज़ा कहाँ गया?आप अकेलापन क्यों महसूस करते हैं? क्योंकि… ब्रह्माण्ड के निर्माण की परिभाषा कहीं गलत हो गई। दुनिया बनाना है…रिश्ते निभानाकोई शौक अपनाओअतिथि होनाअतिथियों का स्वागतखूब चैट करो घर के दरवाजे पर जूतों का ढेर देखकर मुझे हंसी आती है और कलजटाला का दुःख बता कर खुल कर रोये!!!यदि हम इन चीज़ों को प्राप्त कर सकते हैं, तो हम कह सकते हैं कि “शून्य से ब्रह्मांड का निर्माण किया”। आप मुझे बताएं कि ये सब चीजें हमारे जीवन में बढ़ी हैं या घटी हैं….???आप अपना सच्चा दुःख कितने लोगों से खुलकर बाँट सकते हैं????

हम कितने मित्र, पड़ोसी, रिश्तेदार बना सके…??? बहुत कम, बिल्कुल नहीं… “!!! तो क्या हमने “ब्रह्मांड का निर्माण” किया???तो नहीं…दोस्त बनो रजिस्ट्री की कागजी फाइलें ही ब्रह्माण्ड हैं… ???? भौतिक साधनों का रेला ही ब्रह्माण्ड है…??? “तिजोरी में रखे हीरे-मोतियों के आभूषण ही ब्रह्माण्ड हैं…. ???? नकाबपोश चेहरों की भीड़ ही ब्रह्मांड है…… ???? नहीं!! इसे समझना होगा, बड़े होने का तनाव और फिर काम की व्यस्तता के कारण रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी…दूसरों को छोटा समझने और अहंकार के कारण लोग करीब नहीं आएंगे…दुख बांटने, हल्का करने की जगह नहीं रहेगी दिल…इसलिए…..क्या हमने शून्य से ब्रह्माण्ड का निर्माण किया, या शून्य से ब्रह्माण्ड का निर्माण किया?    पढ़ो, सोचो, अहंकार छोड़ो, मानवता बचाओ। दूसरों के काम में आओ, इससे कुछ नहीं होता |

error: Content is protected !!
×