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बुध-केतु का रहस्यमय संयोग: प्रतिभा, भ्रम और अध्यात्म

व्यक्ति की बुद्धि तेज हो लेकिन यदि वह दिशाहीन हो, आप जटिल बातें समझ लेते हों लेकिन सरल निर्णय न ले पाते हों इसे एनालिसिस पैरालाइज्ड कहा जाता है अर्थात् किसी बात को इतना सोचना इतना सोचना कि निर्णय ही न ले पाना इस स्थिति में कई बार वाणी में अस्पष्टता भी देखी जाती है व्यक्ति अपनी बात सही तरीके से रख नहीं पाता, उसे जबरदस्त ज्ञान है परन्तु जब अपनी बात रखने की बारी आए तो कहां बोलना है, क्या बोलना है यही न समझ पाए, कई बार बोलते समय सही शब्द का चुनाव न कर पाना, मन में गलतफहमियां उत्पन्न होना ये बिल्कुल ऐसा है जैसे खजाना है परन्तु उसकी चाभी गुम हो गई हो। अत्यधिक चिंतन करना, हर छोटी से छोटी बात को कई कोण से देखना और इससे चिंता, तनाव और एंग्जाइटी बढ़ जाए ( इसे एंग्जाइटी डिसऑर्डर भी कहते हैं)   ।

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गलत गणनाओं के आधार पर निर्णय लेना, अति विश्लेषण के कारण अवसर गँवा देना ये सभी बातें मात्र दो ग्रहों से जुड़ती हैं और वे दो ग्रह हैं बुध और केतु, यानी एक ऐसा कंपास जो चलता तो है लेकिन दिशा गलत बताता है। आर्थिक अस्थिरता, पैसे के मामले में लगातार उतार चढ़ाव रहना क्योंकि बुध को भगवान विष्णु से जोड़ा गया है और केतु हैं आकस्मिकता तो दोनों मिलकर धन का उतार चढ़ाव उत्पन्न करते हैं। भविष्य की योजना बनाना ही कठिन हो जाता है, शिक्षा में बाधा, एकाग्रता में कमी यानी अलग अलग तरीके से अलग अलग व्यक्तियों पर उनकी जन्मकुंडली के अनुसार कार्य करता है।

 

यद्यपि ज्योतिष शास्त्र में इसे बड़ा ही रहस्यमय और गूढ़ विषयों में रुचि देने वाला योग भी कहा गया है। जन्मकुंडली के अष्टम में ये योग बन जाए तो जातक मनोविज्ञान, अनुसंधान, अध्यात्म आदि पर अच्छी पकड़ रखता है ये अलग बात है कि आम लोगों की नज़र में वह पागल के जैसा ही होता है। ये योग (बुध, केतु) रिश्तों में तबाही लाने वाला योग है। पारिवारिक संबंधों को खराब कर देने वाला योग है। जातक अपनी भावनाओं को कभी स्पष्ट रूप से बता ही नहीं पाता क्योंकि रिश्तों को चलाने के लिये कई बार आपको अपनी भावनाएं व्यक्त करनी होती हैं और ये योग ऐसा है कि आप अपने विचारों अपनी भावनाओ को कभी व्यक्त कर ही नहीं पायेंगे जिससे परिवार, रिश्ते, मित्रता आदि में एक अनकहा तनाव व्याप्त रहता है।

 

जन्मकुंडली में इस योग (बुध+केतु) से नसों से सम्बन्धित परेशानियां, स्मृति से सम्बन्धित परेशानियां, एकाग्रता की कमी, न्यूरोलाजिकल विकार, त्वचा सम्बन्धित रोग ( एलर्जी, एक्जिमा आदि), मानसिक स्वास्थ्य का बिगड़ना, अवसाद, चिंता और पैनिक अटैक आदि समस्याएँ होती हैं।

 

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में ये युति हो तो जातक की शिक्षा में गंभीर बाधाएं आती हैं पढ़ाई पूरी करने में लगातार उसको कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और त्वचा सम्बन्धित रोग होता है।

 

द्वितीय भाव में ये युति परिवार में मतभेद, लगातार कलह और कई बार किस मुद्दे पर विवाद हो रहा है ये भी स्पष्ट नहीं होता, जातक की वाणी में कड़वाहट, अप्रिय भाषा शैली आदि देती है।

 

जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव में बुध केतु युति जातक के कोई भी नया कार्य शुरू करते ही समस्याएं खड़ी कर देता है।

 

कुंडली के पंचम भाव में ये युति हो तो पहले तो संतान प्राप्ति में बाधा, शिक्षा में व्यवधान, प्रेम संबंधों में असफलता आदि से जातक जूझता रहता है।

 

सप्तम में हो तो वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्या, पति पत्नी के कभी विचार ही न मिलें, साझेदारी में धोखा, विश्वासघात, दाम्पत्य जीवन में भावनात्मक दूरी आदि।

 

यही युति कुंडली के अष्टम भाव में तनाव और अवसाद की स्थिति उत्पन्न करती है, अप्रत्याशित बदलाव और गुप्त शत्रु उत्पन्न करती है हालांकि यहां पर तंत्र, ज्योतिष आदि गूढ़ विषयों में जातक को सफलता भी दिलाता है परन्तु वे तब भी दुनियां से कटे हुए ही रहना पसंद करते हैं।

 

दशम भाव में ये युति बनी हुई है तो करियर में भ्रम की स्थिति, सही दिशा न मिलना, प्रतिष्ठा की हानि, अधिकारियों से विवाद, व्यवसायिक योजनाएँ विफल होने जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं।

 

जन्मकुंडली में बुध केतु की युति अच्छी नहीं कही गई है लेकिन यहां एक बात और है और ये कमाल की बात है कि मान लीजिए यही युति कन्या राशि में बनी हुई हो तब? मिथुन राशि में बनी हुई हो तब? क्योंकि वहां एक और प्वाइंट है और वो ये है कि ज्योतिष शास्त्र कहता है कि केतु यदि स्वराशि के ग्रह के साथ होंगे तो उस ग्रह के बल में तीन गुना वृद्धि कर देंगे तो हम इसको कैसे देखें?

इस पर ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि ये निर्भर करेगा कि लग्न कौन सा है और भाव कौन सा है, किस भाव में स्वराशि के बुध और केतु की युति बन रही है।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि ये जिस भाव में होगी उस भाव से सम्बन्धित मतिभ्रम तब भी जातक को होंगे बल्कि यदि बुध के बल में तीन गुना वृद्धि हो रही है तो तीन गुना अधिक होगा लेकिन चूंकि यदि ये युति शुभ भावों में हो तो लाभप्रद भी सिद्ध हो सकती है जैसे मान लीजिए कि कन्या लग्न में लग्न में ही ये युति बन जाए तो जातक को हो सकता है कि कोई बीमारी इत्यादि हो परंतु उसके पास धन संपदा, व्यापार आदि में सफलता  भी होगी, अब मान लीजिए कि यही युति मेष लग्न की कुंडली में लग्न में बुध केतु की युति है तब समस्याएं बढ़ चढ़ कर आयेंगी।

 

अब यदि आपकी कुंडली में बुध केतु की युति है तो इसका उपाय भी होना चाहिए, तो आइए जानते हैं सरल उपाय :

 

जिनकी कुंडली में बुध केतु की युति है ऐसा जातक गणेश चतुर्थी का व्रत करना प्रारंभ कर दे, एक वर्ष में 24 गणेश चतुर्थी के व्रत होते हैं तो यदि आप सभी कर सकते हैं तो बढ़िया और नहीं कर सकते हैं तो एक पक्ष ( शुक्ल या कृष्ण) कोई भी कर लीजिए।

 

अर्क गणपति की आराधना, नियमित ध्यान और प्राणायाम तथा त्राटक करें।

 

 ये दो तीन उपाय यदि आप करते हैं तो निश्चित ही आपको इनसे लाभ होगा और आप इस दुर्योग से उत्पन्न परेशानी से काफी हद तक बच जायेंगे।

बुध का ग्रहों के साथ युति फल जन्म कुंडली

केतु का तड़प

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