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सुवर्ण प्राशन संस्कार

सुवर्ण प्राशन संस्कार

 

नवजात से लेकर 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए सुवर्णप्राशन शिविर

 

 सुवर्ण प्राशन के फायदे

 

  1. बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  2. सुनने और बोलने की क्षमता बढ़ती है।
  3. बुद्धि, याददाश्त और समझ को बढ़ाता है।
  4. पाचन क्रिया सुधारता है, भूख बढ़ाता है और पेट ठीक से साफ करता है

5. जिस बच्चे को माँ का दूध नहीं मिल रहा है या कम मात्रा में माँ का दूध मिल रहा है उसके लिए उपयोगी है

6. त्वचा की चमक बढ़ाता है,ऊंचाई और वजन बढ़ाने में मदद करता है।

7. दांत निकलने का दर्द कम हो जाता है।

8. शब्दों का उच्चारण स्पष्ट होता है, शब्दों की समझ बढ़ती है।

9. जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों से बचाता है।

10. कुल मिलाकर अन्य बच्चों की तुलना में सुवर्णप्राशन लेने वाले बच्चे बहुत प्रतिभाशाली, मजबूत और प्रभावशाली बनते हैं। सुवर्ण प्राशन शुरू करने के बाद बच्चों में क्या बदलाव आएंगे… 1. भूख बढ़ाता है.2. पेट ठीक से साफ होता है।3. अतिसक्रिय बच्चों की चपलता कम होने लगती है।4. ग्रहणशीलता बढ़ती है.

 

5. संज्ञानात्मक शक्ति को बढ़ाता है और शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायक है। सुवर्णप्राशन क्या है?आयुर्वेद में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्तर को बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्कारों का वर्णन किया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी बुद्धिमान, उत्पादक और सर्वगुणसंपन्न हो। इन 16 संस्कारों में सुवर्णप्राशन बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है।

 

हम सभी जानते हैं कि आयुर्वेद एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली है और आयुर्वेद विज्ञान इस संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यहां तक ​​कि बच्चे के जन्म के बाद भी हम बच्चे की जीभ पर शहद के साथ सोने की छड़ी से ॐ लिखते हैं। ताकि इससे बच्चे की बुद्धि और पढ़ने की प्रतिभा में मदद मिले।चूंकि ये सभी विधियां आजकल लुप्त हो रही हैं, इसलिए शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पुष्य नक्षत्र के दिन मंत्र के साथ बच्चों को औषधीय घी + शहद + शुद्ध सोने की राख का मिश्रण चटाया जाता है। इसे “लेहन” कहा जाता है। लेहन का शाब्दिक अर्थ है “चाटना”।सोना कब देना है?हिंदू संस्कृति के अनुसार पुष्य नक्षत्र हर 27 दिन में आता है और इसे बहुत शुभ माना जाता है। पुष्य का अर्थ है पोषण। वैदिक शास्त्रों में इसे नक्षत्रों का राजा कहा गया है। पुष्य नक्षत्र एक शुभ, शक्ति और ऊर्जा देने वाला नक्षत्र है। इस दिन कोई भी काम करने से शुभ फल मिलता हैइस दिन अवशोषण शक्ति सबसे अधिक होती है इसलिए बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पुष्य नक्षत्र के दिन यह औषधि बनाकर बच्चों को दी जाती है।

 

सुवर्णप्राशन

 

आपका बच्चा रोग मुक्त रहे इसके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है उसकी इम्युनिटी ( बिमारियोंसे लड़नेकी प्राकृतिक शक्ति ) अच्छी रहें, इसके लिए आप आयुर्वेदमें स्थाई समाधान प्राप्त कर सकते है।

आयुर्वेदकी *”स्वर्णप्राशन”* विधिसे आपका बच्चा बिमारियों से मुक्त रह सकता है।

“पुष्य नक्षत्र”में “*स्वर्णप्राशन*”का प्रयोग बच्चोंके लिए बेहद प्रभावशाली होता है। इसके प्रयोगसे बिमारियोंसे लड़नेकी प्राकृतिक शक्ति बढ़नेके साथ-साथ बच्चेका बौधिक व शारिरीक विकास भी बेहद अच्छा होता है।

 

 *”सुवर्णप्राशन”* हेतत मेघाग्निबलवर्धनम् । आयुष्यं मंगलमं पुण्यं वृष्यं ग्रहापहम् ।।

“मासात् परममेधावी क्याधिभिर्न च धृष्यते। षडभिर्मासै:” *श्रुतधर*: सुवर्णप्राशनाद् भवेत् ।।

६ महिना लगातार *”सुवर्णप्राशन”* पिलानेसे बालक *श्रुतधर* बनता है।

 

 वीर विक्रम संवंत 2083  *21 May 2026 दिन *”पुष्य नक्षत्र”* है, उस दिन अपने और आसपासके सभी बच्चोंको आयुर्वेदकी शास्त्रीय विधि और शुद्ध द्रव्योंसे मंत्रोच्चारके साथ बनाया *”स्वर्णप्राशन”* आपके घरके आसपासमें, अस्पतालोंमें, किसी  वैद्यके यहां, जहाँ जहाँ भी पिलाते है वहां अवश्य पिलाना चाहिए और अगर शकय हो तो हर दिन *”स्वर्णप्राशन”* अवश्य पिलाएं। ९० दिन लगातार पिलाकर १५ दिन छोड़कर फिरसे ९० दिन पिलाएं।  इस तरह भी पिला सकते है।

हमारे यहां हर *पुष्य नक्षत्र* के दिन सुबह १० : ००  बजेसे  १३ : ०० बजे तक और दोपहर  १७ : ०० से  २० : ००  बजे तक “*गर्भवती माताएं* एवं *बालकों* को  “*स्वर्णप्राशन*” “*निःशुल्क*” पिलाया जाता है।

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