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सत्रह वर्ष का सिंह: जब शिवाजी राजे ने गौमाता की रक्षा की

शिवाजी राजे एक बार बाजार मे खड़े थे…तभी वहां से एक कसाई गाय को लेकर गुजरा…वो गाय को वध के लिये ले जा रहा था…गाय समझ गयी थी कि उसका अंत निश्चित है…गाय की आंखो से आंसू निकल रहे थे… वो पछाड़े खा खा कर जमीन पर गिर रही थी…कसाई उसे लाठी, लात और नुकिले सुऐ से गोदकर आगे खीच रहा था…उस समय मुगलो का शासन था…गोवध उनके लिये एक सामान्य बात थी…विरोध करने वाले की निर्मम तरीके से हत्या कर दी जाती थी…पूरे बाजार मे सब लोग चुपचाप खड़े रहकर तमाशा देख रहे थे…।

शिवाजी राजे की आंखो मे इस दृश्य और गाय की पीड़ा को देखकर आंसू भर आये…उनके ह्रदय और मस्तिष्क मे क्रोध की अग्नि जलने लगी…उन्होने तुरंत उस कसाई को रोककर गाय छोड़ने को कहा…कसाई ने गाय छोड़ने की बजाय शिवाजी राजे को अपशब्द कहने शुरू कर उनपर हमला कर दिया…शिवाजी राजे ने तुरंत अपनी तलवार निकालकर उस कसाई का हाथ धड़ से अलग कर दिया… और गाय को आजाद कराकर सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया…उस समय शिवाजी राजे महाराज की आयु मात्र 17 वर्ष थी…गौवध आज भी जारी है…कसाई भी है…बस अफसोस इस बात का है कि अब गायो को बचाने के लिये कोई शिवाजी राजे नही है….!!!

 

जंयती पर हिंदू सम्राट शिवाजी राजे महाराज को सादर नमन्

 

ज्योतिष शास्त्र में गौ की महिमा (श्लोक सहित)

 

सनातन धर्म में गौ (गाय) को माता, देवस्वरूपा और कामधेनु कहा गया है। वेद–पुराण, स्मृति, ज्योतिष एवं वास्तु — सभी में गौ की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। नीचे शास्त्रीय श्लोकों सहित प्रमुख बिंदु प्रस्तुत हैं —

 

🌼 *1. गौ – समस्त देवताओं का निवास*

श्लोकः

गावो विश्वस्य मातरः ।

अर्थ:

गाय संपूर्ण विश्व की माता हैं।

 

🌼 *2. गौ में समस्त देवताओं का वास*

श्लोकः

सर्वदेवमयी गौः ।

अर्थ:

गाय में सभी देवताओं का निवास है, अतः गौपूजन से समस्त देवताओं की पूजा का फल प्राप्त होता है।

 

🌼 *3. गोधूलि बेला की महिमा (विवाह व शुभ कार्य)*

श्लोकः

गोधूलि समयः पुण्यः सर्वदोषनिवारणः ।

अर्थ:

गोधूलि काल अत्यंत पवित्र होता है और यह समस्त दोषों का नाश करता है।

इसी कारण विवाह एवं शुभ संस्कारों के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।

 

🌼 *4. यात्रा में गौ दर्शन*

श्लोकः

प्रयाणकाले या गौः साक्षात् पश्येत मानवः ।

सिद्धिर्भवति तस्यैव न संशयोऽत्र विद्यते ॥

अर्थ:

यात्रा के समय यदि गाय दिखाई दे, तो कार्य सिद्धि निश्चित होती है।

 

🌼 *5. गौ और वास्तुदोष निवारण*

श्लोकः

यत्र गावः वसन्ति तत्र लक्ष्मीः स्थिरा भवेत् ।

अर्थ:

जिस स्थान पर गाय का वास होता है, वहाँ लक्ष्मी स्थिर रहती हैं और वास्तुदोष नष्ट हो जाते हैं।

 

🌼 *6. शुक्र दोष शांति (गौसेवा द्वारा)*

श्लोकः

शुक्रदोषनिवारार्थं गोसेवा परमं तपः ।

अर्थ:

शुक्र से संबंधित दोषों की शांति हेतु गौसेवा श्रेष्ठ तपस्या है।

👉 सफेद गाय को रोटी खिलाना विशेष फलदायी माना गया है।

 

🌼 *7. पितृदोष निवारण में गौ का महत्व*

श्लोकः

गवां दानेन तृप्यन्ति पितरः सपरिच्छदाः ।

अर्थ:

गाय को अन्न, गुड़ या चारा अर्पण करने से पितृजन तृप्त होते हैं और पितृदोष शांत होता है।

 

🌼 *8. सूर्य–केतु दोष शांति*

श्लोकः

गवां पूजां समारभ्य सूर्यदोषः प्रणश्यति ।

अर्थ:

गाय की पूजा करने से सूर्य से संबंधित दोष समाप्त होते हैं।

 

🌼 *9. गौ नामस्मरण से दुःस्वप्न नाश*

श्लोकः

गोमाता स्मरणेनैव स्वप्नदोषो विनश्यति ।

अर्थ:

गोमाता का स्मरण करने मात्र से बुरे स्वप्न नष्ट हो जाते हैं।

 

🌼 *10. गौघृत और आयु वृद्धि*

श्लोकः

आयुघृतं पिबेन्नित्यं सर्वरोगनिवारणम् ।

अर्थ:

गाय का घी आयु बढ़ाने वाला और रोगनाशक है।

 

🌼 *11. गौ का ककुद् (कूबड़) और बृहस्पति*

श्लोकः

गोककुदे स्थितो देवो बृहस्पतिरुदाहृतः ।

अर्थ:

गाय के कूबड़ में देवगुरु बृहस्पति का वास माना गया है।

👉 गुरु दोष में देशी गाय के ककुद् के दर्शन शुभ होते हैं।

 

🌼 *12. गौ नेत्रों में सूर्य–चन्द्र का वास*

श्लोकः

गवां नेत्रे स्थितौ देवौ सूर्यचन्द्रमसावुभौ ।

अर्थ:

गाय के नेत्रों में सूर्य और चन्द्र का वास है।

अतः सूर्य–चन्द्र कमजोर हों तो गौनेत्र दर्शन लाभदायक है।

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