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संधि लग्न

यदि आपका या किसी जातक/जातिका का लग्न संधि में है तब कैरियर, नोकरी/व्यवसाय, धन, भाग्य, मकान,प्रॉपर्टी आदि किस लग्न से फलित होगा साथ ही कैसे उस जातक/जातिका किस लग्न से फलादेश फलित होगा इससे पहले यह जानते है संधि लग्न क्या होता है? जब भी किसी कुंडली का लग्न शुरुआती अंश 0, 1 या 2अंश पर होता है या आखरी अंशो 28,29 य 30 अंशो पर होता हैओ तब ऐसा लग्न संधि में आ जाता है संधि मतलब दो लग्नो का प्रभाव एक ही लग्न में आ जाता है जैसे किसी जातक जातिका का लग्न मेष है और मेष लग्न 2अंशो का है तब लग्न यह शुरुआती अंशो पर है अब यहां कुछ फल मेष लग्न से तो कुछ कुछ फलादेश मेष लग्न से पहले जो लग्न आता है मीन लग्न उसके अनुसार भी होगा क्योंकि लग्न शुरुआती अंशो पर है तो यह संधि में है।अब यदि लग्न ज्यादा ही शुरुआती।।

जैसे 0 या 1,2,3 डिग्री का है या लग्न ज्यादा ही आखरी अंशो 29 या 30अंश का है तब ऐसी स्थिति में दो लग्नो से फलादेश लग्न के अंशो का ग्रहों के अंशो से मिलान करके सही फलित करने पर ही सही फलित कुंडली का मिलेगा।इस कारण जिन जातक/जातिकाओ की कुंडली का लग्न संधि में है उन्हें कुंडली की सही जाँच कराने पर ही उचित फलादेश की प्राप्ति हो सकती है कि कौन से लग्न अनुसार ऐसे जातक जातिकाओ का जीवन ग्रहों से प्रभावित होकर फल मिल रहा है और तब ही सही जानकारी जीवन के बारे में ऐसे जातक/जातिकाओ के मिलेगी की क्या उपाय, रोजगार, शिक्षा, कैरियर, धन ,भाग्य आदि की स्थिति है।

 

अब कुछ उदाहरणो से समझते है कैसे।                                                      

 

उदाहरण_अनुसार_कर्क_लग्न1:-

माना किसी जातक या जातिका का लग्न कर्क है और कर्क लग्न 1अंश का है तब यहाँ ऐसे जातक/जातिका का फलित कर्क और कर्क से पहले पड़ने वाला लग्न मिथुन के अनुसार भी फलित आएगा अब सही फलित किस लग्न से होगा यह पता चलेगा जन्मकुंडली में नवग्रहों के अंश किस लग्न से ज्यादा प्रभावित है, यदि अंश कुंडली मे बहुत प्रारंभिक अंशो पर है तब पहले वाले लग्न से फलित होगा फल और ग्रहों के अंश बीच को डिग्री पर है जैसे 8 या 10 डिग्री से ऊपर और 20-22 से कम तो जो लग्न जन्म समय के अनुसार आ रहा है आपको उसी लग्न के अनुसार फल मिलेंगे।                                                         

उदाहरण_अनुसार_तुला_लग्न2:-

अब किसी जातक/जातिका का तुला लग्न बने और लग्न 29डिग्री का आ रहा हो तब यहाँ यह लग्न संधि में आ जायेगा अब यहाँ तुला लग्न आने पर भी जातक को पूर्ण रूप से तुला के फल फलित नही होंगे अब यहाँ तुला लग्न 29डिग्री होने पर समाप्ति पर है मतलब तुला समाप्त होने के बाद वृश्चिक लग्न आता है अब यहाँ वृश्चिक लग्न भी फलित हो सकता है लेकिन क्या कुंडली के फल वृश्चिक लग्न से फलित होगा या तुला लग्न से ही फलित होगा यह पता चलेगा कुंडली मे बैठे ग्रहों के अंशो के अनुसार की ग्रहों के अंश कैसी स्थिति में है।।                                                 

 

अब एक उदाहरण से समझते है कब संधि लग्न आने पर ,कब संधि में जन्म समय के अनुसार लग्न आ रहा है उसी संधि लग्न अनुसार कब सभी फल मिलेंगे।                                   

 

उदाहरण_अनुसार_धनु_लग्न3:-

माना किसी जातक/जातिका का धनु लग्न है और लग्न 2 से 3 डिग्री या 28 से 29 डिग्री है और जो कुंडली मे ग्रह बैठें है वह माध्यम डिग्री पर है जैसे 6 से 24 डिग्री के बीच है लगभग तब जन्म समय के अनुसार जो लग्न आ रहा है संधि में उसी संधि वाले जन्मलग्न के अनुसार फल मिलेंगे,लेकिन यदि संधि लग्न वाली कुंडली मे जो ग्रह बैठे हैं उनके अंश भी बहुत प्रारंभिक या आखरी अंशो पर है तब यहाँ दोनों लग्नो के अनुसार फलित करके सही लग्न फलादेश के लिए निकालना जा सकता है जिससे जातक/जातिका को अपनी कुंडली अनुसार सही फलादेश प्राप्त हो सके और जातक/जातिका अपनी कुंडली अनुसार सही दिशा कैरियर, धन, रोजगार, शादी, भाग्य, शिक्षा, जमीन-मकान सुख आदि की क्या स्थिति है पता कर सके।।

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