Sshree Astro Vastu

त्याग, टीमवर्क और ट्रायंफ: महिला विश्वकप का अनकहा अध्याय

वह अंतिम मुकाबला नहीं खेल सकी।
उसे मेडल भी नहीं मिला।
लेकिन उसे उससे भी बहुत बड़ा कुछ मिला—देश के दिल में जगह।

विश्वकप जीतने के बाद जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गई,
तो अमनजोत कौर ने चुपचाप अपने गले का मेडल उतारा
और उसे अपनी टीममेट प्रातिका रावल के गले में डाल दिया।
वही प्रातिका, जिसने पूरे टूर्नामेंट में 308 रन बनाए थे,
लेकिन चोट लगने की वजह से उसे जिला टीम से बाहर होना पड़ा,
जिसके कारण वह सेमीफाइनल और फाइनल नहीं खेल पाई।

एक छोटा सा इशारा, लेकिन उतना ही प्रभावशाली।
मेडल की चमक तब और बढ़ जाती है जब उसे दूसरों के साथ साझा किया जाता है।

यही सारी बातें एक टीम को परिवार बनाती हैं।
और यह बताती हैं कि जीत सिर्फ ट्रॉफी से कहीं ज़्यादा बड़ी होती है।

महिला विश्वकप विजेता टीम के पर्दे के पीछे का हीरो…

महान रणजी क्रिकेटर… 11,000 से भी अधिक रन… लगभग 30 शतक और 60 अर्धशतक…
फिर भी उपेक्षित… शायद किस्मत में राजयोग था ही नहीं…
देश के लिए एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल सके…
लेकिन आज वही भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं…

आज उन्हें सुनहरा अवसर मिला था भारतीय महिला टीम को वनडे क्रिकेट का पहला विश्वकप जिताने का…
और उन्होंने उस अवसर को सोने में बदल दिया।

विश्व विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम नें विश्व विजेता का कप मिलने के बाद पब में शेम्पेन 🍺 🥂🍾 शराब की पार्टियां नहीं की.

 

बल्कि ये संस्कारी बेटियां सबसे पहले धन्यवाद देने आयी अपने परम पिता महाँकाल बाबा के घर.

 

मैदान मैं इन बेटियों नें अपने दमखम और सूझबुझ का परिचय दिया और मैदान के बाहर अपने स्वधर्म स्वराष्ट्र और स्वसंस्कृति के संस्कारो का.

इन बेटियों नें विश्व कप से अधिक करोड़ो करोड़ सनातनीयो का मन जीत लिया है.

 

इन बेटियों के लिए नीति सूक्त ध्यान में आ रहा है ..

धन्य माता, पिता धन्यो, गोत्रम् धन्यों, कुलोत्तभव

धर्मों रक्षति रक्षितः 

Read More Articles......

राजयोग कब मिलता है

किस कैरियर में भेजे बच्चें को ?

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
Share This Article
error: Content is protected !!
×