
जब दो ग्रह एक ही राशि में स्थित होंं तब इसे ग्रहों की युति कहा जाता है !
जब दो ग्रह एक-दूसरे से सातवें स्थान पर स्थित हों, अर्थात् 180 डिग्री पर हों, तब इसे प्रतियुति कहते है ! अशुभ ग्रह या अशुभ स्थानों के स्वामियों की युति-प्रतियुति अशुभ फलदायी होती है, जबकि शुभ ग्रहों की युति शुभ फल देती है ! आइए देखें, विभिन्न ग्रहों की युति-प्रतियुति के क्या फल हो सकते हैं –
यह उत्कृष्ट योग होता है, यह मान-सम्मान, प्रतिष्ठा व यश दिलाता है ! उच्च शिक्षा हेतु दूरस्थ प्रवास योग तथा बौद्धिक क्षेत्र में असाधारण यश देता है !
यह कला क्षेत्र में विशेष यश दिलाने वाला योग होता है ! विवाह व प्रेम संबंधों में भी नाटकीय स्थितियाँ निर्मित करता है !
यह योग व्यक्ति को व्यवहार कुशल बनाता है ! व्यापार-व्यवसाय में यश दिलाता है ! कर्ज आसानी से मिल जाते हैं !
अत्यंत महत्वाकांक्षी बनाने वाला यह योग व्यक्ति को उत्कट इच्छाशक्ति व साहस देता है ! ऐसे युति वाले व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध करने की योग्यता रखते हैं !
5.सूर्य-शनि :
इस अत्यंत अशुभ योग, के चलते जीवन के हर क्षेत्र में विलम्ब से सफलता मिलती है ! पिता-पुत्र में वैमनस्यता, भाग्य का साथ न देना इस युति के परिणाम होते हैं !
चंद्रमा यदि शुभ योग में हो तब यह युति मान-सम्मान व प्रतिष्ठा की दृष्टि से श्रेष्ठ होती है, परन्तु वहीं अशुभ योग होने पर मानसिक रोगी भी बना देता है !
यह योग व्यक्ति को जिद्दी व अति महत्वाकांक्षी बनाता है ! इससे यश तो मिलता है, परन्तु स्वास्थ्य हेतु यह योग हानिकारक होता है ! रक्त सम्बंधी रोग हो सकते हैं !
दो ग्रहों की युति का फल –
चन्द्र की अन्य गृहों से युति/सम्बन्ध का प्रभाव :
चंद्र+मंगल –
शत्रुओं पर एवं ईर्ष्या करने वालों पर, सफलता प्राप्त करने के लिए एवं उच्च वर्ग (सरकारी अधिकारी) विशेषकर सैनिक व शासकीय अधिकारी से मुलाकात करने के लिए उत्तम रहता है !
चंद्र+बुध –
धनवान व्यक्ति, उद्योगपति एवं लेखक, सम्पादक व पत्रकार से मिलने या सम्बन्ध बनाने के लिए उत्तम होता है !
चंद्र+शुक्र –
प्रेम-प्रसंगों में सफलता प्राप्त करने एवं प्रेमिका को प्राप्त करने तथा शादी- ब्याह के समस्त कार्यों के लिए, विपरीत लिंगी से कार्य कराने के लिए अच्छी युति है !
चंद्र+गुरु –
अध्ययन कार्य, किसी नई विद्या को सीखने एवं धन और व्यापार उन्नति के लिए अच्छी युति !
चंद्र+शनि –
शत्रुओं का नाश करने एवं उन्हें हानि पहुंचाने या उन्हें कष्ट पहुंचाने के लिए !
चंद्र+सूर्य –
राजपुरूष और उच्च अधिकारी वर्ग के लोगों को हानि या उसे उच्चाटन करने के लिए !
मंगल की अन्य गृहों से युति/सम्बन्ध का प्रभाव :
मंगल+बुध –
शत्रुता, भौतिक सामग्री को हानि पहुंचाने, तबाह-बर्बाद, हर प्रकार सम्पत्ति, संस्था व घर को तबाह-बर्बाद करने के लिए !
मंगल+शुक्र –
हर प्रकार के कलाकारों (फिल्मी सितारों) में डांस, ड्रामा एवं स्त्री जाति पर प्रभुत्व और सफलता प्राप्त करने के लिए !
मंगल+ गुरु-
युद्घ और झगड़े में या कोर्ट केस में, सफलता प्राप्त करने के लिए, शत्रु-पथ पर भी जनमत को अनुकूल बनाने के लिए !
मंगल+शनि –
शत्रु नाश एवं शत्रु मृत्यु के लिए एवं किसी स्थान को वीरान करने (उजाड़ने ) के लिए !
बुध की अन्य ग्रहों से युति/सम्बंध का प्रभाव—
बुध+शुक्र –
प्रेम-सम्बन्धी सफलता, विद्या प्राप्ति एवं विशेष रूप से संगीत में सफलता के लिए !
बुध+गुरु-
पुरुष का पुरुष के साथ प्रेम और मित्रता सम्बन्धों में पूर्ण रूप से सहयोग के लिए एवं हर प्रकार की ज्ञानवृद्घि के लिए नया है !
ग्रहों की युति-: चंद्र:-(विचार) –
शनि (दु:ख, विषाद, कमी, निराशा) :-
मन में दु:ख, नकारात्मक सोच !
मंगल (साहस, धैर्य, तेज, क्षणिक क्रोध) :- विचारों में ओज, क्रांतिकारी विचार !
बुध (वाणी, चातुर्य, हास्य) :-
हास्य-व्यंग्य पूर्ण विचार,नए विचार !
गुरु (ज्ञान, गंभीरता, न्याय, सत्य) :-
न्याय,सत्य और ज्ञान की कसौटी पर कसे हुए गम्भीर विचार !
शुक्र (स्त्री, माया, संसाधन, मिठास, सौंदर्य)
माया में जकड़े विचार, सुंदरता से जुड़े विचार !
सूर्य (आत्म-तेज, आदर) :-
आदर के विचार, स्वाभिमान का विचार !
राहू (मतिभ्रम, लालच) :- विचारों का द्वंद्व, सही-गलत के बीच झूलते विचार !
केतु (कटाक्ष, झूठ, अफवाह) : झूठ,अफवाह और सही बातों को काटने का विचार !
विवाह भाव में चन्द्र एवं अन्य ग्रहों की युति :
चन्द्र_मंगल –
सप्तम_भाव_में_चन्द्र_मंगल_युति :
यदि कुण्डली में विवाह भाव में चन्द्र-मंगल दोनों की युति हो रही हो तो व्यक्ति के जीवनसाथी के स्वभाव में मृदुलता की कमी की सम्भावना बनती है !
चन्द्र_बुध –
सप्तम_भाव_में_चन्द्र_बुध_युति :
कुण्डली में चन्द्र व बुध की युति होने पर व्यक्ति का जीवनसाथी यशस्वी, विद्वान व सत्ता पक्ष से सहयोग प्राप्त करने वाला होता है ! इस योग के व्यक्ति को अपने जीवनसाथी के सहयोग से धन व मान मिलने की संभावना बनती है !
चन्द्र_व_गुरु –
सप्तम_भाव_में_चन्द्र_व_गुरु_की_युति :
कुण्डली में विवाह भाव में जब चन्द्र व गुरु एक साथ स्थित हों तो व्यक्ति का जीवनसाथी कला विषयों मे कुशल होता है ! उसके विद्वान व धनी होने कि भी संभावना बनती है ! इस योग के व्यक्ति के जीवनसाथी को सरकारी क्षेत्र से लाभ मिलता है !
चन्द्र_व_शुक्र –
सप्तम_भाव_में_चन्द्र_व_शुक्र_की_युति :
यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्र व शुक्र की युति होने पर व्यक्ति का जीवनसाथी बुद्धिमान हो सकता है !
उसके पास धन, वैभव होने कि भी संभावना बनती है ! व्यक्ति के जीवनसाथी के सुविधा संपन्न होने की भी संभावना बनती है !
चन्द्र_शनि –
सप्तम भाव में चन्द्र-शनि की युति :
कुण्डली के विवाह भाव में चन्द्र व शनि दोनों एक साथ स्थित हों तब व्यक्ति का जीवनसाथी प्रतिष्ठित परिवार से होता है !
सप्तम भाव में चन्द्र की अन्य ग्रहों से युति :
बुध, गुरु, शुक्र –
जब चंद्रमा की युति सप्तम भाव में बुध, गुरु, शुक्र से हो रही हों तो व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के शुभ फलों में वृद्धि होती है !
शनि, मंगल –
अगर चन्द्र की युति विवाह भाव में शनि, मंगल के साथ हो रही हो तो दाम्पत्य जीवन में परेशानियां आती है !
स्वयं चन्द्र भी जब कुण्डली में कृष्ण पक्ष का या निर्बल हो तब भी चन्द्र से मिलने वाले फल बदल जाते हैं !
चन्द्र_सूर्य_की_युति_का_फल :
इन दोनों की युति होने पर व्यक्ति के अंदर अहम की भावना आ जाती है !
कुटनीति से व्यक्ति अपना काम निकालने की कोशिश करता है ! व्यक्ति क्रोधी हो सकता है एवं व्यवहार में कोमलता की कमी रहती है ! मन में अस्थिर एवं बेचैन रहता है. मन की शांति एवं व्यवहार कुशलता बढ़ाने के लिए चन्द्र के उपाय स्वरूप सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है !
चन्द्र_मंगल_की_युति_का_फल :
मंगल भी सूर्य के समान अग्नि प्रधान ग्रह है ! चन्द्र एवं मंगल की युति होने पर व्यक्ति के स्वभाव में उग्रता आ जाती है ! मंगल को ग्रहों में सेनापति कहा जाता है जो युद्ध एवं शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक होता है ! जैसे युद्ध के समय बुद्धि से अधिक योद्धा बल का प्रयोग करते हैं, ठीक उसी प्रकार इस युति वाले व्यक्ति परिणाम की चिंता किये किसी भी कार्य में आगे कदम बढ़ा देते हैं जिससे इन्हें नुकसान भी होता है ! वाणी में कोमलता एवं नम्रता की कमी के कारण यह अपनी बातों से कभी-कभी मित्रों को भी शत्रु बना लेते हैं ! हनुमान जी की पूजा करने से इन्हें लाभ मिलता है !
चन्द्र_बुध_की_युति_का_फल :
चन्द्रमा शांत एवं शीतल ग्रह है और बुध बुद्धि का कारक ग्रह. जिस व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्र बुध की युति होती है वह काफी समझदार होते हैं ! परिस्थितयों के अनुसार खुद को तैयार कर लेने की इनमें अच्छी क्षमता पायी जाती है ! अपनी बातों को ये बड़ी ही चतुराई से कह देते हैं ! वाक्पटुता से काम निकालने में भी यह माहिर होते हैं !
चन्द्र_गुरू_की_युति_का_फल :
नवग्रहों में गुरू को मंत्री एवं गुरू का पद दिया गया है ! मंत्री का कार्य होता है सलाह देना. सलाह वही दे सकता है जो ज्ञानी होगा. यानी इस युति से प्रभावित व्यक्ति ज्ञानी होता है और अधिक बोलने वाला भी होता है ! यह सलाहकार, शिक्षक एवं ऐसे क्षेत्र में अच्छी सफलता प्राप्त कर सकते हैं जिनमें बोलने की योग्यता के साथ ही साथ अच्छे ज्ञान की भी जरूरत होती है !
चन्द्र_शुक्र_की_युति_का_फल :
चन्द्रमा के साथ शुक्र की युति होने पर व्यक्ति सुन्दर एवं आकर्षक होता है ! इनमें सुन्दर दिखने की चाहत भी अधिक होती है ! वाणी में कोमलता एवं विचारों में कल्पनाशीलता भी इनमें पायी जाती है ! इस युति से प्रभावित व्यक्ति कलाओं में रूचि लेता है !
चन्द्र_शनि_की_युति_का_फल :
जन्म कुण्डली में चन्द्रमा शनि के साथ युति सम्बन्ध बनाता है तो व्यक्ति न्यायप्रिय होता है ! इस युति से प्रभावित व्यक्ति मेहनती होता है तथा अपनी मेहनत एवं ईमानदारी से जीवन में आगे बढ़ता है ! इनके स्वभाव में अस्थिरता पायी जाती है, छोटी-छोटी असफलताएं भी इनके मन में निराशा उत्पन्न करने लगती है !
चन्द्र_राहु_की_युति_का_फल :
कुण्डली में चन्द्र के साथ राहु की युति होने पर व्यक्ति रहस्यों एवं कल्पना की दुनियां खोया रहता है ! इनमें किसी भी विषय को गहराई से जानने की उत्सुकता रहती है, जिससे अपने विषय के अच्छे जानकार होते हैं !
इनके स्वभाव में एक कमी यह होती है कि अफवाहों एवं कही सुनी बातों से जल्दी विचलित हो जाते हैं !
चन्द्र_केतु_की_युति_का_फल :
चन्द्र केतु की युति कुण्डली में होने पर व्यक्ति जोश में कार्य करने वाला होता है ! जल्दबाजी में कार्य करने के कारण इन्हें अपने किये कार्य के कारण बाद में पछताना भी पड़ता है ! लेकिन, अपनी ग़लतियों से सीख लेना इनकी अच्छी आदत होती है !
ज्योतिषी के रूप में कैरियर बनाने का विचार करें तो यह अच्छे ज्योतिषशास्त्री बन सकते हैं !
सच्चाई एवं अच्छाई के लिए आवज़ उठाने के लिए चन्द्र केतु की युति वाले व्यक्ति सदैव तैयार रहते हैं !
शनि और पाप ग्रह की युति का फल :
शनि_और_मंगल :
जब शनि और मंगल की युति बनती है तब दोनों मिलकर और भी अशुभ प्रभाव देने वाले बन जाते हैं ! व्यक्ति का जीवन अस्थिर रहता है ! मानसिक और शारीरिक पीड़ा से व्यक्ति परेशान होता है !
शनि_और_राहु_केतु :
इन्हें शनि के समान ही कष्टकारी और अशुभ फल देने वाला कहा गया है ! जब शनि की युति या दृष्टि सम्बन्ध इनसे बनती है तब शनि और भी पाप प्रभाव देने वाला बन जाता है ! राहु और शनि के मध्य सम्बन्ध स्थापित होने पर स्वास्थ्य पर अशुभ प्रभाव होता है ! शनि और राहु की युति नवम भाव में हृदय और गले के ऊपरी भाग से सम्बन्धित रोग देता है ! इनकी युति कार्यों में बाधक और नुकसानदेय होती है ! केतु के साथ शनि की युति भी समान रूप से पीड़ादायक होती है ! इन दोनों ग्रहों के सम्बन्ध मानसिक पीड़ादायक और निराशात्मक विचारों को देने वाला होता है !
शनि_और_सूर्य :
इन दोनों ग्रहों की युति बनती है उस भाव से सम्बन्धित फल की हानि होती है. इन दोनों की युति व्यक्ति के लिए संकट का कारण बनती है !