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रवि पुष्य नक्षत्र एवं गुरु पुष्यामृत योग: सौभाग्य, समृद्धि और सफलता का दिव्य संयोग

भारतीय वैदिक ज्योतिष में कुछ विशेष तिथियाँ, नक्षत्र और योग ऐसे माने गए हैं जिनका प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक शुभ होता है। इन्हीं में से एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग है पुष्य नक्षत्र। जब यह नक्षत्र विशेष वारों के साथ आता है, तब इसका प्रभाव और भी अधिक शक्तिशाली हो जाता है। विशेष रूप से गुरुवार को गुरु पुष्यामृत योग और रविवार को रवि पुष्यामृत योग (रवि पुष्य नक्षत्र) अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

*पुष्य नक्षत्र का महत्व*

 

पुष्य नक्षत्र चंद्रमा के 27 नक्षत्रों में आठवाँ नक्षत्र है। इसे नक्षत्रों का “राजा” भी कहा जाता है। ‘पुष्य’ शब्द का अर्थ है — पोषण करने वाला, वृद्धि देने वाला और समृद्धि प्रदान करने वाला। यह नक्षत्र जीवन में स्थायित्व, धन, ऐश्वर्य, अन्न, ज्ञान और उन्नति का प्रतीक माना गया है।

वैदिक परंपरा में यह मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में किया गया कोई भी शुभ कार्य लंबे समय तक फल देता है। इसलिए यह नक्षत्र व्यापार, निवेश, गृह प्रवेश, नया कार्य आरंभ करने, आभूषण खरीदने और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

 

*गुरु पुष्यामृत योग (गुरुवार + पुष्य नक्षत्र)*

 

जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ता है, तब उसे गुरु पुष्यामृत योग कहा जाता है। गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से होता है, जो ज्ञान, धर्म, धन और सद्बुद्धि के कारक ग्रह हैं।

गुरु पुष्यामृत योग विशेष रूप से:

  • शिक्षा और ज्ञान संबंधी कार्यों
  • धन निवेश, बैंकिंग, बीमा, शेयर
  • विवाह या विवाह वार्ता
  • धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य
  • गुरु कृपा प्राप्त करने

के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए कार्यों में विघ्न बहुत कम आते हैं और सफलता की संभावना अधिक होती है।

*रवि पुष्यामृत योग (रविवार + पुष्य नक्षत्र)*

 

जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन आता है, तब उसे रवि पुष्य नक्षत्र या रवि पुष्यामृत योग कहा जाता है। सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है और रविवार सूर्य देव का दिन होता है। सूर्य आत्मबल, नेतृत्व, प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य और सरकारी मामलों का प्रतिनिधित्व करता है।

रवि पुष्य नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष में सबसे शक्तिशाली और दुर्लभ योगों में गिना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

 

*रवि पुष्य नक्षत्र के लाभ*

 

रवि पुष्य नक्षत्र में किए गए कार्य विशेष रूप से:

  • सोना, चांदी और आभूषण खरीदने
  • नई संपत्ति, वाहन या भूमि के निवेश
  • व्यापार की शुरुआत
  • सरकारी कार्य, नौकरी, पदोन्नति
  • आत्मविश्वास और मान-सम्मान में वृद्धि

 

के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। यह योग नकारात्मक ग्रह प्रभावों को भी काफी हद तक निष्क्रिय कर देता है और सकारात्मक परिणाम देता है।

*नकारात्मक ग्रह दोषों का शमन*

 

ऐसी मान्यता है कि रवि पुष्य नक्षत्र के दिन किया गया दान, पूजा और शुभ कार्य:

  • शनि दोष
  • राहु-केतु के अशुभ प्रभाव
  • सूर्य से संबंधित समस्याएँ
  • आर्थिक रुकावटें

को कम करता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं है, उनके लिए भी यह योग विशेष लाभकारी माना गया है।

*4 जनवरी 2025: विशेष रवि पुष्य योग*

 

आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रविवार, 4 जनवरी 2025 को दोपहर 15:11 के बाद पुष्य नक्षत्र का आरंभ हो रहा है। इस समय के बाद किया गया कोई भी शुभ कार्य रवि पुष्य नक्षत्र के अंतर्गत आएगा।

इस समय विशेष रूप से:

  • सोना या चांदी खरीदना
  • व्यापारिक लेन-देन
  • नए अनुबंध पर हस्ताक्षर
  • धार्मिक पूजा, सूर्य उपासना
  • लक्ष्मी और कुबेर पूजन

अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

*इस दिन क्या करें?*

 

रवि पुष्य नक्षत्र के दिन:

  • सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें
  • “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें
  • लाल वस्त्र या गुड़ का दान करें
  • घर या तिजोरी में नया धन, सोना रखें

यह सब उपाय धन वृद्धि और सफलता के मार्ग खोलते हैं।

 

रवि पुष्य नक्षत्र और गुरु पुष्यामृत योग केवल ज्योतिषीय संयोग नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आस्था और अनुभव से सिद्ध शुभ काल हैं। इन दिनों में किया गया छोटा सा शुभ कार्य भी भविष्य में बड़ा लाभ दे सकता है।

रविवार को पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र — रवि पुष्य नक्षत्र — विशेष रूप से सौभाग्य, समृद्धि और स्थायी सफलता का प्रतीक है। ऐसे दुर्लभ योगों का लाभ उठाकर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

पुष्य नक्षत्र

सुवर्ण प्राशन संस्कार

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