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जन्मकुण्डली में अकाल मृत्यु योग :

यदि किसी जातक की कुण्डली में अकाल मृत्यु का योग मौजूद होता है, तो उस जातक को अपनी आयु की रक्षा के लिए भगवान शिव की पूजा करना चाह‍िए !

 

जन्म एवं मृत्यु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के दो सबसे बड़े सच हैं ! जन्म लेने वाले प्रत्येक जीव की मृत्यु होना निश्चित है ! जन्म एवं मृत्यु के बीच वाले काल खण्ड को ही जीवन कहा जाता है ! मृत्यु से एक दिन सभी का सामना होना है ! इसके प्रकोप से कोई नहीं बचा सकता ! इस सच से किनारा भी नहीं किया जा सकता ! यह सृष्टि का नियम है जिससे कोई अलग नहीं है ! लेकिन कई बार कुछ लोग अकाल मृत्यु के शिकार हो जाते है, जिसके कारण उनके सभी परिजनों का इस बात पर यकीन कर पाना बहुत मुश्किल होता है !

 

ऐसा कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति की कम आयु में मृत्यु हो जाती हैं, तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है ! वहीं, कुछ जानकारों का मत है कि कुछ लोगों की जन्म कुण्डली में अल्पायु का योग उपस्थित होता है ! ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ प्रयास से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है ! इसके लिए आपकोकिसी योग्य ज्योतिषी की मदद लेनी चाहिए ! चलिए जानते है ज्योतिष शास्त्र के उपायों से कैसे अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है !

ज्योतिष का मृत्यु से सम्बंध ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस धरती पर रहकर अच्छे कर्म करता है, उसे मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त हो सकता है ! वह जन्म-जन्मांतर के चक्र से भी छुटकारा पा सकता है ! साथ ही किसी भी जातक की जन्म कुण्डली को देखकर उस जातक के रोग एवं उसकी मृत्यु के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है ! वहीं उस जातक की मृत्यु किस रोग से होगी, इस बात का अंदाजा भी ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से लगाया जा सकता है ! आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में कुण्डली का  छठा भाव रोग तथा आठवां भाव मृत्यु और बारहवां भाव शारीरिक व्यय एवं पीड़ा का भाव माना जाता है !

 

अकाल मृत्यु के कारण :

1.यदि किसी जातक की जन्मकुण्डली के लग्न में मंगल हो और उस पर सूर्य या शनि की दृष्टि पड़ रही होती है, तो किसी दुर्घटना में उसकी मृत्यु होने की आशंका अधिक रहती है !

 

2.यदि राहु और मंगल ग्रह की युति अथवा दोनों का समसप्तक होकर एक-दूसरे को देखना भी जातक की कुण्डली में दुर्घटना से अकाल मृत्यु होने की सम्भावना बताता है !

 

3.जन्म कुण्डली के छठे भाव का स्वामी पाप ग्रह से युक्त होकर छठे या आठवें भाव में स्थित होता है, तो दुर्घटना में मृत्यु होने का योग बनता है !

 

4.ज्योतिष के अनुसार लग्न भाव, दूसरे भाव तथा बारहवें भाव में अशुभ ग्रह की स्थिति जातक के हत्या का कारण बनती है !

 

5.यदि दसवें भाव की नवांश राशि का स्वामी राहु अथवा केतु के साथ स्थित होता है, तो जातक की मृत्यु अस्वाभाविक होती है  !

 

6.यदि लग्नेश तथा मंगल की युति छठे, आठवें या बारहवें भाव में होता है, तो जातक की मृत्यु शस्त्र के प्रहार से हो सकती है !

 

7.यदि मंगल दूसरे, सातवें या आठवें भाव में स्थित हो और उस पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि हो, तब जातक की मौत आग से जलने से होने की सम्भावना होती है !

 

अकाल मृत्यु से बचने के उपाय :

 

यदि किसी जातक की कुण्डली में अकाल मृत्यु का योग बन रहा हो, तो उस जातक को भगवान शिव की पूजा करनी चाह‍िए ! शिव जी की पूजा करने से अकाल मृत्यु योग से जातक को छुटकारा मिल जाता है ! वहीं, अकाल मृत्यु का भय हो, तो जातक को जल में तिल और शहद मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए  !

 

इसी के साथ उसको महामृत्युंजय मंत्र और ओम नम: शिवाय मंत्र का प्रति दिन जप करना चाहिए ! वहीं जातक को पूरी आस्था और श्रद्धा से सभी उपाय करने चाहिए ! अन्यथा इस उपाय का कोई फल जातक को नहीं म‍िलेंगा ! यदि किसी व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय होता है, तो उसको मंगलवार और शनिवार को काले तिल और जौ का आटा तेल में गूंथकर एक मोटी रोटी पका लेना चाहिए ! उसके बाद गुड़ और तेल में वह रोटी म‍िला लें, फ‍िर जिस भी जातक की अकाल मृत्यु की आशंका हो उसके सिर से सात बार उस रोटी को उतारकर किसी भैंस को खिला दें !  ऐसा माना जाता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है ! यदि किसी जातक को अकाल मृत्यु का भय सता रहा हो, तो गुड़ और आटे के गुलगुले बना लेना चाहिए ! इसके बाद उन गुलगुलों को व्यक्ति के स‍िर से सात बार उतारकर चील या कौए को खिला देना चाहिए ! ज्योतिषशास्‍त्र के मुताबिक अकाल मृत्यु से बचने के लिए जातक को शनिदेव की पूजा भी करनी चाह‍िए !

जन्म कुंडली में मृत्यु योग और ग्रह स्थिति के आधार पर मृत्यु के संकेत

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