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केवल उत्सव नहीं, विचार भी चाहिए

यदि माँ जिजाऊ साहेब ने छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मदिन हर वर्ष जन्मतिथि के अनुसार ही ओवाळकर (पूजा करके) मनाया होगा…

तो…

मैं उनसे अधिक बुद्धिमान तो निश्चित ही नहीं हूँ… कोई भी नहीं।

और…

इस विषय में मुझे उनसे अधिक बुद्धिमान बनना भी नहीं है।

इस मामले में मैं सीधा-सादा परंपरावादी ही अच्छा हूँ…

 

शिवजयंती तिथि के अनुसार ही

 

|| जय हिंदूराष्ट्र ||

[विश्वावसु : फाल्गुन शुक्ल द्वितीया]


।। केवल उत्सव नहीं, विचार चाहिए ।।

सह्याद्री के हृदय में आज भी
शिवबा की हुंकार गूंजती है,
लेकिन आज की इस दुनिया में
सिर्फ दिखावे का बाज़ार सजा है!

माथे पर गुलाल और हाथ में भगवा
अब केवल ‘फैशन’ बन गया है,
महाराज की शिक्षा तो
कहीं किसी कोने में खो गई है!

भीड़ में नारे लगाकर
धूमधाम से जुलूस निकलते हैं,
लेकिन दुर्भाग्य से प्रजा के मूल्य
आज पैरों तले रौंदे जाते हैं!

डीजे की धुन पर नाचते-नाचते
हम वह इतिहास भूल गए,
बस एक दिन का समारोह हुआ
और फिर सब समाप्त हो गया!

किलों की वे ढहती दीवारें
आज भी गवाही देती हैं,
हमने विरासत को संभाला नहीं,
बस स्टेटस में तस्वीरें रह जाती हैं!

स्त्री का सम्मान और स्वराज्य के प्रति निष्ठा—
यही था सच्चा भगवा,
शिवजयंती मनाते समय
अब विचारों का जागरण आवश्यक है!

न केवल झंडे चाहिए,
न केवल खोखले नारे,
आचरण में उतारें
महाराज का वह पवित्र आदर्श!

जिस दिन सामान्य व्यक्ति
सुखी और सुरक्षित रहेगा,
उसी दिन सच्चे अर्थों में
शिवजयंती मनाई जाएगी!

शिवचरित्रमाला भाग – 1 (और पुणे सहित पूरा परगना बदलने लगा)

आगरा में वह कौन सा स्थान है जहाँ शिवाजी महाराज को कैद किया गया था?

शिवाजी महाराज का आदेश पत्र

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