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नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2081 (09अप्रैल, 2024)" की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएँ।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :

 

  1. इसी दिन आज से सृष्टि संवत 1,96,08,53,124वर्ष पूर्व सूर्योदय के साथ ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।
  1. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था।
  1. महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ।

4 सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।

  1. 148 वर्ष पूर्व महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना।
  2. विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।

 

नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :

 

  1. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।
  1. फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

आज लेने वाली महा औषधि

आज गुड़ी पड़वा है। गुड़ी पड़वा के मंगल मुहूर्त में 7 नीम की पत्तियां, 5 तुलसी की पत्तियां और 4 कालीमिर्च धोकर चटनी की तरह पीसें और गोली बनाकर एकदम खाली पेट सेवन करें। पूरे वर्ष भर बुखार नहीं आएगा। निरोग रहें निश्चिंत रहें।

नववर्ष कैसे मनाएँ :

 

  1. नववर्ष का स्वागत सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देकर करें।
  1. हम परस्पर एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें।
  1. अपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।

4 . इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फहराएँ। सायंकाल घर के बाहर कम से कम पांच दीपक अवश्य प्रज्ज्वलित करें।

  1. इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।

आप सभी से विनम्र निवेदन है कि “नववर्ष” हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सज्जनों को प्रेरित करें।

 

          धन्यवाद !

 

       🚩हिन्दू नववर्ष की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं🚩

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