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महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि के दिन तंत्र, मंत्र साधना और रुद्राभिषेक करने के लिए दिनांक 08 मार्च को रात्रि 12 बजकर 24 मिनट से लेकर 01 बजकर 40 मिनट तक का समय श्रेष्ठ है। वहीं भक्तों के लिए शुभ समय सुबह 05 बजकर 55 मिनट से लेकर पूरे दिन है। इस दौरान भगवान भोलेनाथ की पूजा और रुद्राभिषेक विशेष रूप से की जा सकती है।

 

नमः शम्भवाय च मयोभवाय च।

नमः शङ्कराय च मयस्कराय च।

नमः शिवाय च शिवतराय च॥

सुख के उत्पत्ति स्थानरूप रुद्र के लिए नमस्कार है,भोग तथा मोक्ष का सुख प्रदान करने वाले रुद्र के लिए नमस्कार है, लौकिक सुख देने वाले रुद्र के लिए नमस्कार है,वेदान्तशास्त्र में होने वाले ब्रह्मात्मैक्य साक्षात्कारस्वरुप रुद्र के लिए नमस्कार है,कल्याणरूप निष्पाप रुद्र के लिए नमस्कार है और अपने भक्तों को भी निष्पाप बनाकर कल्याणरूप कर देने वाले रुद्र के लिए नमस्कार है।

 

रुद्राष्टाध्यायी के अनुसार भगवान शिव ही और रूद्र माने जाते हैं और रुद्र ही शिव माने जाते हैं।कहा भी गया है रूतम् दुःखम्,द्रावयति नाशयतीतिरूद्रः।भगवान शिव,जो रुद्र के रूप में प्रतिष्ठित हैं,वे हमारे जीवन के सभी दुखों एवं कष्टों को शीघ्र ही नष्ट अर्थात समाप्त कर देते हैं।

 

यश्च सागरपर्यन्तां सशैलवनकाननाम्।

सर्वान्नात्मगुणोपेतां सुवृक्षजलशोभिताम्॥

दद्यात् कांचनसंयुक्तां भूमिं चौषधिसंयुताम्।

तस्मादप्यधिकं तस्य सकृद्रुद्रजपाद्भवेत्॥

यश्च रुद्रांजपेन्नित्यं ध्यायमानो महेश्वरम्।

स तेनैव च देहेन रुद्र: संजायते ध्रुवम्॥

अर्थात जो प्राणी सागर पर्यंत,वन,पर्वत,जल एवं वृक्षों से युक्त तथा श्रेष्ठ गुणों से युक्त ऐसी महान पृथ्वी का दान करता है,जो धन-धान्य तथा सुवर्ण और औषधियों से भी युक्त हो,उसके दान करने से जो फल प्राप्त होता है,उससे भी कहीं अधिक पुण्य फल एक बार के रुद्री जप अर्थात रुद्राभिषेक से प्राप्त हो जाता है। इसलिए जो कोई भी भगवान शिव का ध्यान करके रुद्री पाठ करता है और रुद्राभिषेक मंत्र से भगवान शिव को मनाता है,वह प्राणी उसी देह से भगवान रूद्र स्वरूप ही हो जाता है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।

यश्च सागरपर्यन्तां सशैलवनकाननाम्।

सर्वान्नात्मगुणोपेतां सुवृक्षजलशोभिताम्॥

दद्यात् कांचनसंयुक्तां भूमिं चौषधिसंयुताम्।

तस्मादप्यधिकं तस्य सकृद्रुद्रजपाद्भवेत्॥

यश्च रुद्रांजपेन्नित्यं ध्यायमानो महेश्वरम्।

स तेनैव च देहेन रुद्र: संजायते ध्रुवम्॥

अर्थात जो प्राणी सागर पर्यंत,वन,पर्वत,जल एवं वृक्षों से युक्त तथा श्रेष्ठ गुणों से युक्त ऐसी महान पृथ्वी का दान करता है,जो धन-धान्य तथा सुवर्ण और औषधियों से भी युक्त हो,उसके दान करने से जो फल प्राप्त होता है,उससे भी कहीं अधिक पुण्य फल एक बार के रुद्री जप अर्थात रुद्राभिषेक से प्राप्त हो जाता है। इसलिए जो कोई भी भगवान शिव का ध्यान करके रुद्री पाठ करता है और रुद्राभिषेक मंत्र से भगवान शिव को मनाता है,वह प्राणी उसी देह से भगवान रूद्र स्वरूप ही हो जाता है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।

 

रुद्राभिषेक मंत्रजाप करने के लाभ॥

१- यदि आप कालसर्प योग से पीड़ित है तो आपको रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

२- यदि आपके घर में गृहकलेश चला आ रहा है और परिवार के लोगों में आपस में लड़ाई झगड़ा होता है,तो आपको रुद्राभिषेक कराना अत्यंत लाभकारी साबित होगा।

३- यदि आप किसी असाध्य रोग से पीड़ित हैं,तो आपको कुशा के द्वारा रुद्राभिषेक मंत्र से शिवजी की पूजा करनी चाहिए।

४- यदि आप अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति करना चाहते हैं तो आपको रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए गन्ने के रस से शिवजी का रुद्राभिषेक करना चाहिए।

५- यदि आप मोक्ष प्राप्ति की इच्छा रखते हैं,तो आपको किसी तीर्थ से जल लाकर पूरे मन से भगवान शिव का रुद्राभिषेक मंत्र द्वारा पूजन करना चाहिए।

६- यदि संतान प्राप्ति के उद्देश्य से रुद्राभिषेक मंत्र का जप करना हो,तो किसी भी दुग्ध से रुद्राभिषेक करना चाहिए और यदि आपकी संतान उत्पन्न होकर मृत हो तो गौ दुग्ध से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

७- यदि आपको नौकरी ना मिल रही हो या नौकरी मिलने में दिक्कत हो अथवा शत्रु परेशान कर रहे हों,तो इन सभी समस्याओं का समाधान है, रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करना।

८- यदि वर्षा ना हो रही हो और फसल की हानि होने लगे,तो समाज के कल्याण के लिए वर्षा के उद्देश्य से भगवान शिव का जल से अभिषेक करना चाहिए और रूद्राभिषेक मंत्र का जप करना चाहिए

९- यदि आप सुन्दर,विद्वान् और संस्कारी संतान प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको रुद्राभिषेक मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

१०- यदि लम्बे समय से ज्वर की समस्या चल रही हो,तो ज्वर की शांति के लिए गंगाजल से अभिषेक करें और रुद्राभिषेक मंत्रों का उच्चारण करें।

११- यदि आपको भवन या वाहन खरीदने की इच्छा है तो उसकी प्राप्ति के लिए आपको रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करने के साथ-साथ दही से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए।

११- शहद एवं घी से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से धन की वृद्धि होती है और लक्ष्मी का वास होता है।

१२- किसी भी बीमारी से कष्ट मुक्ति हेतु जल में इत्र मिलाकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें।याद रखें रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते समय इत्र यदि ‘खस ‘ का हो तो बेहतर रहेगा।

१३- यदि आप दूध से रुद्राभिषेक करते हैं तो प्रमेह रोग की समस्या से मुक्ति मिलती है।

१४- पुत्र की कामना करने वाले व्यक्ति को जल में शक्कर मिलाकर रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करना चाहिए।

१५- यदि आप तपेदिक रोग से पीड़ित हैं तो आपको शहद के द्वारा रुद्राभिषेक करना चाहिए।

१६- इसके अतिरिक्त यदि आप शहद से रुद्राभिषेक करते हैं,तो आपके जीवन के सभी पापों का शमन हो जाता है।

१७- उत्तम स्वास्थ्य हर किसी की इच्छा होती है,इसलिए यदि आप आरोग्यता प्राप्त करना चाहते हैं,तो आपको गाय के दूध अथवा शुद्ध घी अथवा दोनों से रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करना चाहिए।

१८- यदि आप विद्वान बनना चाहते हैं और अपनी बुद्धि का विकास करना चाहते हैं तो आपको दूध में शक्कर मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।

१९- यदि आपको ही व्यापार करते हैं और उसमें लगातार नुकसान हो रहा है तो इससे बचने के लिए आपको रुद्राभिषेक मंत्र का जप करना चाहिए।

२०- विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा में आने वाली रुकावट को दूर करने के लिए भी रुद्राभिषेक मंत्र से शिव जी को प्रसन्न करना बेहतर परिणाम दिलाता है।

 

नमक चमक रुद्राभिषेक लघु रुद्री का ही एक हिस्सा होता है, इसके लाभ निम्न है,

 

प्राचीन मान्यता के अनुसार लघुरूद्री या “लघुरूद्राभिषेक” कराने पर साधक को मोक्षप्राप्ति होती है।

धन, संपत्ति तथा ऐश्वर्या में वृद्धि होती है।

जातक को किसी भी प्रकार संकट से मुक्ती मिल जाती है।

इसका पाठ करने से अकाल मृत्यु भय का निवारण होता है।

आप सभी प्रकार के रोगो से मुक्त हो जाओगे।

नमक चमक रुद्राभिषेक के पाठ से आपका वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाएगा।

 

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से करें। क्योंकि इस दौरान खास संयोग भी बन रहा है।

इस दिन विधि पूर्वक रुद्राभिषेक करने से ग्रह दोषों से छुटकारा मिल सकता है और वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियां भी दूर हो सकती है।

 अगर किसी भी जातक के विवाह में किसी प्रकार की कोई परेशानी आ रही है, तो महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और महागौरी की पूजा करें।

शिवरात्रि विशेष 5 ब्राह्मण द्वारा नमक चमक रुद्राभिषेक  महादेव की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु मनोरथ सिद्धि हेतु नाम गोत्र मनोकामना सहित कराए

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