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भगवान हयग्रीव की जयन्ती

  • भगवान नर – नारायण का अवतार कल्प पर्यंत तपश्चर्या के लिए हुआ है। आज भी दोनों बदरिकाश्रम में तप कर रहे हैं।
  • अक्षय तृतीया पर भगवान हयग्रीव की जयन्ती भी है।
  • भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में दो अलग-अलग कल्प में दो बार अवतार लिया।
  • एक कल्प में भगवान हयग्रीव ने मधु और कैटभ दैत्यों द्वारा चुराए गए वेदों को रसातल से वापस लाकर ब्रह्माजी को दिए थे।
  • एक अन्य कल्प में दैत्य हयग्रीव के वध हेतु भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लिया था।
  • अमृत मन्थन के दौरान अमृत बॅंटवारे को लेकर जब दैत्य और देवताओं में संग्राम छिड़ गया, तब वैशाख शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया।
  • मोहिनी अवतार अवन्तिका नगरी में हुआ था। शिप्रा तट पर ही मोहिनी ने देवताओं को अमृत पिलाया था।
  • वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिन सन्ध्या काल में भगवान नृसिंह का अवतार हुआ।
  • भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद को एक मन्वन्तर तक दैत्याधिपति के समस्त भोग स्वीकार करने का वरदान दिया।
  • भगवान परशुराम की माता रेणुका यज्ञ से उत्पन्न हुई थीं।

 काशी नरेश रेणु ने उनका पुत्री के रूप में लालन-पालन किया। इसलिए रेणुका उनकी पुत्री कहलाई।

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