
शादी में देरी तब होती है जब 7वें घर (रिश्ते), शुक्र (प्यार), बृहस्पति (समझदारी), और शनि (कर्म) में रुकावट या तनाव होता है। नीचे ग्रहों के मुख्य कॉम्बिनेशन दिए गए हैं जो देर से शादी की ओर इशारा करते हैं।
जब लग्न का स्वामी या राशि का स्वामी 12वें घर में बैठता है, तो जातक का ध्यान शादी से हट जाता है, जिससे देरी होती है।
7वें घर का स्वामी 8वें घर में और 8वें घर का स्वामी 7वें घर में होने से शादी में अस्थिरता, डर और देरी होती है।
जब 7वां घर पाप ग्रहों के बीच घिरा हो, तो बाहरी दबाव या अंदर की झिझक की वजह से शादी में देरी होती है।
शनि की नज़र गंभीरता, कर्मों का सबक और समय में देरी लाती है, खासकर रोमांटिक कमिटमेंट में।
कमज़ोर इमोशनल क्लैरिटी और बदलती सोच शादी के फ़ैसलों को धीमा कर देती है।
शादी से जुड़े घरों में मंगल अग्रेसन या बेमेल रिश्ता बनाता है, जिससे शादी टल जाती है।
जब ये ग्रह सूर्य (अष्ट) से जल जाते हैं, तो उनके नतीजे कमज़ोर हो जाते हैं — जिससे शादी का समय धीमा हो जाता है।
मंगल, शनि, राहु या केतु का 7वें घर पर असर होने से रुकावटें, ब्रेकअप या देरी हो सकती है।
यह मेल इमोशनल स्टेबिलिटी और भरोसे को बिगाड़ता है, जिससे शादी टल जाती है।
दो खराब ग्रह मिलकर शादी को एक भारी कर्म वाली घटना बना देते हैं, इसलिए देरी होती है।
इससे इमोशनल दबाव और सोच-समझकर फैसले लेने की आदत पड़ती है — जिससे शादी में देरी होती है।
उदाहरण: मेल, आपसी नज़र, शनि की 7वीं/10वीं दृष्टि — ये सभी साइकोलॉजिकल देरी पैदा करते हैं।
शादी में देरी कम करने के उपाय
इससे आकर्षण, अट्रैक्शन और रिश्तों में तालमेल बेहतर होता है।
सूर्य मजबूत होता है और जीवन की मुश्किलों को दूर करता है।
खासकर अगर मांगलिक दोष हो तो असरदार है।
कर्म की रुकावटों और बुरे असर को दूर करने में मदद करता है।