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जन्म कुंडली में विदेश यात्रा के योग - क्या आपकी कुंडली में भी विदेश जाने का भाग्य लिखा है

आज के समय में विदेश यात्रा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रह गई है। उच्च शिक्षा, नौकरी, व्यापार, शोध, आध्यात्मिक साधना, स्थायी निवास अथवा बेहतर आर्थिक अवसरों की खोज में लाखों लोग विदेश जाने का सपना देखते हैं। लेकिन हर व्यक्ति की यह इच्छा पूरी नहीं होती। कोई अनेक प्रयासों के बाद भी वीज़ा प्राप्त नहीं कर पाता, तो कोई बिना अधिक प्रयास के ही विदेश पहुँच जाता है। इसका एक प्रमुख कारण जन्म कुंडली में विद्यमान ग्रहयोग और उनकी सक्रिय दशाएँ मानी गई हैं।

 

वैदिक ज्योतिष में विदेश यात्रा का विचार मुख्य रूप से द्वादश भाव (विदेश एवं दूरस्थ स्थान), नवम भाव (भाग्य एवं लंबी यात्राएँ), सप्तम भाव (विदेशी संपर्क), अष्टम भाव (जीवन परिवर्तन), दशम भाव (कर्म एवं व्यवसाय) तथा राहु के प्रभाव से किया जाता है। जब इन भावों, उनके स्वामियों तथा संबंधित ग्रहों का परस्पर संबंध बनता है और अनुकूल महादशा–अंतर्दशा चलती है, तब विदेश यात्रा, विदेश में नौकरी, शिक्षा अथवा स्थायी निवास के अवसर प्राप्त होते हैं।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवल एक योग देखकर विदेश जाने का निर्णय नहीं किया जा सकता। संपूर्ण जन्म कुंडली, नवांश कुंडली, ग्रहों की शक्ति, दशाएँ तथा गोचर का सामूहिक अध्ययन आवश्यक होता है। नीचे ऐसे प्रमुख योग दिए जा रहे हैं जिन्हें प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में विदेश यात्रा के संकेतक माना गया है।

 

जन्म कुंडली में विदेश यात्रा के प्रमुख योग

 

  1. लग्न में सूर्य

यदि जन्म कुंडली में सूर्य लग्न में स्थित हो, तो जातक अपने जन्मस्थान से दूर जाकर प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है। ऐसा व्यक्ति अनेक बार विदेश यात्रा भी करता है, विशेषकर जब सूर्य बलवान हो।

 

  1. अष्टम भाव में बुध

अष्टम भाव में स्थित बुध जीवन में अचानक परिवर्तन, शोध, विदेशी संस्थानों से जुड़ाव तथा विदेश यात्रा के अवसर प्रदान कर सकता है।

 

  1. बारहवें भाव में शनि

द्वादश भाव में स्थित शनि व्यक्ति को जन्मभूमि से दूर रहने, लंबे समय तक विदेश में कार्य करने अथवा विदेशी संस्थानों से जुड़ने का अवसर देता है। कई बार यह स्थायी निवास का भी योग बनाता है।

 

  1. बारहवें भाव में लग्नेश

यदि लग्नेश स्वयं द्वादश भाव में स्थित हो, तो जातक का जीवन विदेश से किसी न किसी रूप में अवश्य जुड़ता है। यह योग विदेश यात्रा, विदेश में रोजगार अथवा लंबे समय तक विदेश निवास का संकेत देता है।

 

  1. दशमेश एवं नवांशेश का चर राशियों में होना

यदि दशमेश तथा उसका नवांशेश दोनों चर राशियों (मेष, कर्क, तुला, मकर) में हों, तो कार्यक्षेत्र के कारण विदेश जाने की संभावना बढ़ जाती है।

 

  1. चर राशि में सप्तम भावस्थ लग्नेश

लग्नेश यदि सप्तम भाव में चर राशि में स्थित हो, तो जातक का जीवन विदेशी लोगों, विदेशी व्यापार या विदेश यात्राओं से जुड़ सकता है।

 

  1. नवम भाव में चर राशि का दशमेश

भाग्य और कर्म का यह संबंध विदेश में करियर, उच्च शिक्षा या व्यवसाय के लिए अनुकूल माना जाता है।

 

  1. नवम भाव में सप्तमेश

सप्तमेश का नवम भाव में स्थित होना विदेशी संपर्कों के माध्यम से यात्रा या व्यवसाय के अवसर देता है।

 

  1. बृहस्पति का चतुर्थ, षष्ठ, अष्टम अथवा द्वादश भाव में होना

ऐसी स्थिति में उच्च शिक्षा, शोध, आध्यात्मिक यात्रा अथवा विदेश में ज्ञान प्राप्ति के अवसर बन सकते हैं।

 

  1. नवमेश एवं द्वादशेश का परिवर्तन योग

यदि नवमेश और द्वादशेश एक-दूसरे की राशियों में स्थित हों, तो विदेश यात्रा का यह अत्यंत प्रभावशाली योग माना जाता है।

 

  1. बारहवें भाव या द्वादशेश पर अष्टमेश की दृष्टि

यह योग जन्मस्थान से दूर जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन तथा विदेश प्रवास का संकेत देता है।

 

  1. ग्यारहवें या बारहवें भाव में चंद्रमा

ऐसा चंद्रमा व्यक्ति को विदेश से लाभ, विदेशी मित्रों तथा विदेश यात्रा के अवसर प्रदान कर सकता है।

 

  1. शुक्र का षष्ठ, सप्तम या अष्टम भाव में होना

यदि शुक्र शुभ बल में हो, तो विदेश में नौकरी, व्यापार, कला, फैशन, होटल, पर्यटन अथवा वैवाहिक कारणों से विदेश यात्रा संभव होती है।

 

  1. प्रथम, सप्तम या अष्टम भाव में राहु

राहु विदेशी संस्कृतियों, सीमाओं के पार अवसरों तथा अप्रत्याशित विदेश यात्राओं का प्रमुख कारक माना गया है। इन भावों में स्थित राहु विदेश योग को मजबूत करता है।

  1. षष्ठेश का द्वादश भाव में होना

यह योग विदेश में नौकरी, सेवा या कार्य के अवसर प्रदान कर सकता है।

 

  1. दशम भाव एवं दशमेश का चर राशियों में होना

व्यक्ति का कार्यक्षेत्र गतिशील रहता है और नौकरी या व्यवसाय के कारण विदेश यात्रा के अवसर मिलते हैं।

 

  1. लग्नेश एवं चंद्र राशिश का चर राशियों में होना

जीवन में बार-बार स्थान परिवर्तन तथा विदेश यात्राओं की संभावना रहती है।

 

  1. नवम भाव में द्वादशेश

भाग्य का संबंध विदेश से जुड़ने पर व्यक्ति को विदेश यात्रा या विदेश में सफलता प्राप्त हो सकती है।

 

  1. लग्नेश एवं नवमेश का परिवर्तन योग

यह योग भाग्यवश विदेश जाने तथा वहाँ उन्नति प्राप्त करने का संकेत देता है।

 

  1. नवमेश एवं द्वादशेश दोनों चर राशियों में

यदि दोनों ग्रह चर राशियों में स्थित हों, तो विदेश यात्रा की संभावना और अधिक प्रबल हो जाती है।

 

  1. चतुर्थ भाव में द्वादशेश

यह योग विशेष रूप से विदेश में शिक्षा, छात्रवृत्ति अथवा लंबे समय तक अध्ययन का संकेत देता है।

 

 किन दशाओं में विदेश यात्रा होती है

केवल योगों का होना पर्याप्त नहीं है। जब संबंधित ग्रहों की महादशा–अंतर्दशा सक्रिय होती है, तभी विदेश यात्रा का अवसर प्राप्त होता है।

 

उच्च के सूर्य, चंद्रमा, मंगल अथवा बृहस्पति की महादशाएँ विदेश यात्रा करा सकती हैं। यदि मंगल बलवान होकर लग्न में स्थित हो या सूर्य से संबंध रखता हो, तो उसकी दशा में भी विदेश जाने के अवसर बनते हैं।

 

नीच का बुध भी अनेक बार व्यक्ति को विदेश पहुँचा देता है, विशेषकर जब वह द्वादश, अष्टम अथवा राहु से संबंधित हो। यदि बृहस्पति सप्तम या द्वादश भाव में चर राशि में स्थित हो, तो उसकी महादशा भी विदेश यात्रा का कारण बन सकती है।

 

शुक्र की महादशा में, यदि शुक्र किसी पाप ग्रह के साथ सप्तम भाव में हो, तो विवाह, व्यवसाय या नौकरी के कारण विदेश यात्रा संभव होती है। शनि यदि द्वादश भाव में या उच्च नवांश में स्थित हो, तो उसकी महादशा भी विदेश निवास का अवसर प्रदान कर सकती है।

 

राहु की महादशा विशेष रूप से विदेश यात्रा कराने वाली मानी गई है। यदि राहु तृतीय, सप्तम, नवम या दशम भाव में स्थित हो, तो उसकी दशा में विदेश जाने की संभावना अत्यंत प्रबल होती है।

 

इसी प्रकार सूर्य–केतु, केतु–सूर्य, केतु–चंद्र, शुक्र–बृहस्पति, राहु–सूर्य, शनि–बृहस्पति, बुध–शनि तथा शनि–केतु की कुछ विशेष महादशा–अंतर्दशाएँ भी विदेश यात्रा के अवसर प्रदान करती हैं, यदि संबंधित ग्रह कुंडली में अनुकूल संबंध बना रहे हों।

 

विदेश यात्रा केवल एक ग्रह या एक भाव से निर्धारित नहीं होती। इसके लिए द्वादश भाव, नवम भाव, सप्तम भाव, राहु, चर राशियाँ, ग्रहों की शक्ति, नवांश कुंडली, महादशा–अंतर्दशा तथा वर्तमान गोचर—इन सभी का संयुक्त अध्ययन आवश्यक होता है। जब इनमें से अनेक संकेत एक साथ सक्रिय होते हैं, तब व्यक्ति को विदेश यात्रा, विदेश में शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय अथवा स्थायी निवास का अवसर प्राप्त होता है।

सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा

जन्मकुण्डली में यदि शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति को प्राप्त होते हैं, आईये उन्हें जानते हैं-

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