Sshree Astro Vastu

विदेशी यात्रियों की आँखों से भारत: 12वीं से 15वीं शताब्दी के भारत की समृद्धि, संस्कृति और वैभव का जीवंत वृत्तांत

“Benjamin Tudela” नाम का स्पेनिश यहूदी जिसने अपनी यात्रा 1159 या 1160 में विश्व के बहुतायत जगहों पाए  13 -14 साल की यात्रा पर निकलता है ।उसके पेशे के बारे में तो नहीं पता और न ये पता है कि वो धन कमाने निकला था कि वैज्ञानिक तथ्यों की खोज करने निकला था हाँ उसकी यात्रा वृत्तांत से इतना निष्कर्ष अवश्य निकलता है कि वो विश्व भर में फैले यहूदियों के नैतिक और धार्मिक स्थिति को जानना चाहता था।

यद्यपि उसका भारत भ्रमण तुलनात्मक रूप से बहुत कम था उसके बर्लिन के Mr Asher द्वारा किये गए बेहतरीन अनुवादों से  निकाले गए कुछ तथ्य यहाँ प्रस्तुत हैं । उसके 136 -143 पेजों से उद्धृत जानकारी नीचे उद्धृत हैं :—-

   ये (Tigris) नदी नीचे जाकर इंडियन ओसियन में गिरती है (Persian gulf) जिसके बगल में एक Island (टापू) है जिसका नाम किश (Kish) है । इसका फैलाव 6 किलोमीटर है ।यहाँ के निवासी खेतीबाड़ी नहीं करते क्योंकि यहाँ कोई नदी नहीं है मात्र एक झरने को छोड़कर ; ; अतः पीने के लिए बरसाती पानी पर निर्भर हैं ।इसके बावजूद यहाँ बहुत बड़ा बाजार है जहाँ भारत के व्यापारी और इस टापू के निवासी अपना माल लेकर आते है ; और मेसोपोटामिया यमन और पर्शिया के लोग यहाँ से सिल्क छींट के कपडे flax, कॉटन पटुआ , mash (एक तरह की दाल) गेहूं जौ मिलेट राइ और अन्य तरह की वस्तुए यहाँ से आयातित करते हैं, साथ में वे ढेर सारे मसाले भी इम्पोर्ट करते हैं ।और इस टापू के निवासी दोनों तरफ से मिलने वाली brockrage से अपना गुजारा करते हैं ।इस टापू पर 500 यहूदी हैं।

    यहाँ से 10 दिन की समुद्री यात्रा के बाद El-Cathif नामक शहर है जहाँ पांच हजार इस्रायली बसते हैं ।इसके आस पास pearls पाये जाते हैं: Nisan के महीने के 24वें दिन (अप्रैल) में बरसात की बड़ी बड़ी बूंदे पानी की सतह पर गिरती हैं जिसको पीकर Reptils अपना मुहं बंद करके पानी की तलहटी में चली जाती हैं : और Thisri (अक्टूबर) के मध्य में कुछ लोग रस्सी की मदद से समुद्र  में गोता लगाकर इन Reptiles (सीपी) को इकठ्ठा करते हैं और ऊपर लाकर इनको खोलते हैं और उसमे से Pearls / मोती बाहर निकाल लेते हैं ।

    यहाँ से 7 दिन की दुरी पर chulam नामक जगह है जो सूर्य की पूजा करने वालों के अधिकार में है । ये लोग कुश के वंशज हैं , ये एस्ट्रोलॉजी के बहुत शौक़ीन हैं और सबके सब काले हैं ।

 ये देश व्यापार के मामले में अत्यंत विस्वास्नीय है , और जबी भी इनके यहाँ कोई भी विदेशी व्यापारी इनके बंदरगाह में दाखिल होता है ,तो राजा के तीन सचिव तुरंत इनकी जहाज की देखभाल और रिपेयरिंग में लग जाते हैं , तथा उनका नाम लिखकर तुरंत राजा को सूचित करते हैं। राजा इनके सामान की सुरक्षा का दायित्व लेता है ,जिसको वो खुले मैदान में बिना किसी रखवाली के छोड़ सकते हैं ।

   राजा का एक अफसर बाजार में बैठता है जो इधर उधर गिरी पड़ी लावारिश वस्तुओं को लाकर इकठ्ठा करता है और कोई व्यक्ति जो उन वस्तुओं की minute डिटेल्स बताकर उनको वापस प्राप्त कर सकता है।

ये संस्कृति राजा के पूरे साम्राज्य में प्रचलित है।

 

इसी पुस्तक के पेज 59 – 60 से।

 

 

नोट – इसके विपरीत रोमन साम्राज्य की मुख्य संस्कृति लूटमार (Plunder) गुलामी (Slavery) और सैन्य शक्ति पर आधारित थी ।

और इंग्लैंड का तो जन्म भी नहीं हुवा था , जिसकाल ये वृत्तांत है।

 

अब इसी पुस्तक से एक अन्य यात्री ABD-ER-RAZZZAK की यात्रा वृत्तांत के बारे में ।

( पेज 107 ऑफ़ 254)

 

साल 845 ( 1442 AD) , इस यात्रा वृत्तांत का लेखक Abd-er- razzak , Ishak का पुत्र सार्वभौमिक नरेश के आदेश के पालन हेतु Omurz प्रान्त से समुद्र तट की ओर चल देता है ।

अंततः 18 दिनों की यात्रा के उपरांत , वहां के राजा और शासक की मदद से हमारी नौका कालीकट में जा खड़ी हुई ।अब इस विनम्र दास इस देश के वैभव और परम्पर और संस्कृति की चर्चा सुनें।

कालीकट एक सुरक्षित बंदरगाह है जहा Omurz की तरह हर देश और शहर से व्यापारी अपना सामान ले आते हैं ।यहाँ पर मूल्यवान वस्तुओं का भंडार है जो कि Abyssinia Zirbad (दक्कन) Zanguebar से आते हैं। समय समय पर अल्लाह के घर (मक्का) से जहाज आते रहते हैं ।इस कस्बे में काफ़िर (infidels) रहते हैं।जोकि इस hostile समुद्री तट के किनारे बसे हुए हैं।

यहाँ पर्याप्त मात्रा में मुसलमान भी रहते हैं जिन्होंने यहाँ दो मस्जिद बना रखी है और जिसमे हर शुक्रवार को वो नमाज पढ़ने जाते हैं । यहाँ एक क़ाजी है जो Schfei समुदाय का है।

 

इस कसबे में सुरक्षा और न्याय इस तरह से स्थापित है कि अन्य देशो से सबसे धनी व्यापारी जब समुद्री मार्ग से अपना सामान ले आते है तो जहाज से सामान उतरवाकर सीधे बिना किसी हिचकिचाहट के सामन सीधे बाजार में भेज देते है ; यहाँ तक कि उसका हिसाब किताब रखने की या उस पर निगाह रखने की आवाश्याकता भी महसूस नहीं करते। कस्टम हाउस के अधिकारी स्वयं इन समानो की देख रेख का इंतजाम करते हैं जो इन पर 24 घण्टे निगाह रखते हैं।जब सामन बिक जाता है तो सामान की कीमत 1/40 वां One fortieth हिस्सा ड्यूटी के रूप में देना पड़ता है।जो सामान नहीं बिकता उस पर कोई टैक्स नहीं लगता।

 

याद रखें कि उस समयकाल में कालीकट में हिन्दू राजाओ का राज्य था।

अब दूसरे बंदरगाहों का क्या हाल था ?

 

दूसरे देशों के बंदरगाहों में अजीब सी रिवायत है।जैसे ही कोई जहाज दुर्योग से हवा की रुख के कारन वहां पहुचता है , वहां के निवासी उसको लूट लेते हैं।लेकिन कालीकट में ऐसा नहीं है , हर जहाज चाहे वो जहाँ से भी आई हो और कही भी उतरती हो , जब भी बंदरगाह पर लगती है तो उससे एक सा ही व्योहार किया जाता है , और किसी को कोई समस्या नहीं होती।

 

देश के लोगों की एकरूपता और साम्यता के बारे में क्या कहता है वो सुनें।

ये दलित चिंतक 3000 साल का दलितपे का भंडाफोड़ कर देगा ।

पेज -121 ऑफ़ 254

 

इस देश के काले लोग सर्वथा नंगे रहते हैं, मात्र शरीर के मध्यभाग में एक कपड़ा लपेटे रहते हैं जिसको लंगोटा (Lankautah) कहते हैं जो नाभि से घुटने तक लटकता है।उनके एक हाँथ में भारतीय तलवार (Poignard) होती है जो एक पानी की बूँद की तरह चमकदार होती है; और दूसरे हाँथ में एक ढाल (Buckler of oxide) होती है ।ये परंपरा राजा से लेकर रंक तक सब के लिए एक सामान है। This custom is common to the king and beggar.

जहाँ तक मुसलमानों की बात है वे अरबों की तरह शानदार (Apparel ) और हर बात में बैभव (Luxury) का प्रदर्शन करते हैं।

 

पेज 121

 

कुछ समय अवधि के बाद जब मेरे पास पर्याप्त काफिरों और मुसलमानों को देखने का अनुभव हो गया , और पर्याप्त सुविधा से मेरे आवास की व्यवस्था हो गयी और तीन दिनों के उपरांत राजा से मिलने का अवसर प्राप्त हुवा तो मैंने बाकी ऊपर वर्णित हिंदुओं की वेश – भूसा वाले नंगे बदन के जिस व्यक्ति को देखा उसे समरी ‘(Sameri) के राजा ‘ के नाम से जाना जाता था।जब इसकी मृत्यु होगी तो इसके बहन के लड़कों को इसका उत्तराधिकार मिलेगा ; न कि इसके बेटों या भाइयों को या अन्य किसी रिष्तेदार को उत्तराधिकार मिलेगा। ताकत के दम पर ( जोर जबरदस्ती ) कोई सिंहासनारूढ़ नहीं हो सकता।

यहाँ काफ़िर काफी गुटों में बंटे हुए है जैसे Bramins (ब्राम्हण) Djogis (जोगी)  व अन्य। यद्यपि सारे लोग बहुदेवबाद और मूर्तिपूजा के मूलभूत सिद्धांतों से सहमत हैं लेकिन सब समुदायों के अपने विशेष रीति रिवाज हैं।

(Forbes की हिंदुस्तानी डिक्शनरी के अनुसार Djoghis हिन्दू  Ascetics ( संत) हैं : ये हिन्दूओं की एक जाति है जो मुख्यतः बुनकर हैं )

 

नोट — इस तर्क पर कबीर को समझें। उनका समयकाल भी लगभग इसी के आस पास का है ।

जब मैं राजकुमार से मिलने गया तो पूरा हाल दो या तीन हजार हिन्दुओ से भरा हुवा था , जिनकी वेश भूषा ठीक वैसे ही थी जिसका पूर्व में जिक्र किया जा चूका है ; मुस्लमाओं के भी प्रमुख लोग वहां थे।

अब्देररज्जाक को जब विजयनगर के राजा का आमन्त्रण मिलता है तो , वो बतलाता है कि यद्यपि सामरी (कालीकट का राजा ) जिसके राज्य में कालीकट जैसे 300 बंदरगाह थे और जिसके  राज्य का पूरा चक्कर लगाने में 3 महीना गुजर जाय विजयनगर के राजा के अधीन नहीं था लेकिन वो  उनका बहुत सम्मान करता था और उनके डर ( सम्मान होना चाहिए क्योंकि एक अरब सिर्फ ताकत की जुबां ही जानता है ) से खड़ा हो जाता है।

कालीकट से जहाज लगातार मक्का जाते रहते हैं जिसमे मुख्यतः काली मिर्च भरा होता था।

कालीकट के निवासी  बहुत साहसी सामुद्रिक नाविक हैं जिनको Techini – betechegan (चीनी के पुत्र ) के नाम से जाना जाता है और समुद्री लुटेरों की हिम्मत इनके जहाजों पर आक्रमण करने की नहीं पडती है।

इस बंदरगाह पर हर इच्छित चीज उपलब्ध है । सिर्फ एक ही चीज की मनाही है और वह है गोबध और उसका मांस भक्षण : यदि ऐसे किसी व्यक्ति का पता चल जाय कि किसी ने गाय का वध किया है या उसका मांस खाया है तो उसको तुरंत मृत्यदंड दी जाती है। यहाँ पर गायों का इतना सम्मान है कि लोग गाय के सूखे गोबर का तिलक लगातेहैं ।

 

पेज -123

इसके बाद जब रज्जाक बेलूर (Belour) पहुँचता है तो उसका भी वर्णन करता है –” यहाँ के घर पैलेस की तरह विशाल हैं और यहाँ की औरतों ने मुझे हूरों की खूबसूरती की याद दिला दी । अगर मैं इन भवनों के बारे में वर्णन करूँगा तो लोग मुझ पर अतिशयोक्ति का आरोप लगाएंगे। लेकिन एक सामान्य खाका खींचना उचित होगा । कस्बे के मध्य में एक 10 घेज़ (Ghez) का खुला मैदान है जिसकी तुलना जन्नत के बाग़ से की जा सकती है।

पेज – 126

इस कसबे में दो तीन दिन बिताकर अप्रैल के अंत में हम विजयनगर शहर पहुँचते है।राजा अपने अनुचरों को हम लोगों से मिलने के लिए भेजता है और हमारे निवास की खूबसूरत व्यवस्था करता है।

अब्दुर्रज़्ज़ाक ने विजयनगर का भी वर्णन किया है।उसने एक विशाल जनसंख्या वाली जगह देखी जिसका राजा महान और विशाल राज्य का स्वामी था जो सेरेंडिब से kalbergah तक फैला हुवा था। बंगाल के सीमान्त से मालाबार तक एक हजार Parasang ( ये दुरी की पर्शियन इकाई है जसका अर्थ 3.5 मील या 5.6 किलोमीटर होता है ) से ज्यादा विशाल साम्राज्य है

 इसकी जमीन उपजाऊ है और ये उत्तम कृषि वाला देश है , जिसके अंतर्गत लगभग 300 बंदरगाह हैं। यहाँ 1000 से ज्यादा विशालकाय हांथी हैं जो दैत्य जैसे भयानक और पहाड़ जैसे विशालकाय हैं।यहाँ की सेना में 11 लाख सैनिक हैं ।

 

पेज – 127

पूरे हिंदुस्तान में राय (राजाओं) का एकाधिकार है । इस देश के राजा क़ी टाइटल भी राय है ।

इसके बाद दूसरा नंबर ब्राम्हणो का है जो सामाजिक रूप से बाकियो से श्रेष्ठ माने जाते हैं ।

kalilah और dimna (कालिदास और वेद ??) की पुस्तकें , विद्वता के साहित्य की उत्क्रिस्ट कृतिया हैं जो पर्शियन भाषा में भी उपलब्ध है।

विजयनगर एक ऐसा शहर है जिसकी बराबरी विश्व में कोई भी नहीं कर सकता है और ऐसा शहर न लोगों ने न अपनी आँखों से  देखा होगा न कानों से सुना होगा।

 

पेज – 127

इस साम्राज्य में इतनी विशाल जनसंख्या निवास करती है कि इसकी विस्तृत व्याख्या किये बगैर इसके बारे में बताना असंभव है। राजा के महल में अनेक कोठरियां हैं जो धन दौलत से भरी पड़ी हैं।

इस देश के सभी निवासी ( All inhabitants of this country) , चाहे वो ऊचें राजपद पर हों या नीचे राजपद पर हों , या फिर बाजार के अर्टिसन ( down to the artisan of the Bazar) , सबके सब अपने कानों में  मोती या अन्य महगें पथरो से मढ़ी हुई बालियां ,  हार अगुंठिया बाजूबंद अपने कानों गले उँगलियों और भुजाओं में धारण करते हैं।

All the inhabitants of the country , both those of exalted rank and of the inferior class down to the artizans of Bazaar , wear pearls , or rings adorned with precious stones ,  in their ear , on their arms , on upper part of the hand and on the fingers.

 

पेज — 130।

नोट – इससे और लेख इसी पेज से उद्धृत करना है।

 

पेज -175

मेरे भारतवासियों की संस्कृति और परम्परा के बारे में पूंछने पर उसने निम्नलिखित बाते बतायीं —

” पूरे भारतवर्ष 3 हिस्सों  में बटा है ; एक फारस से लेकर इंडस तक ; दूसरा इंडस से गंगा के बीच का क्षेत्र ; और तीसरा इसके बाद का इलाका। ये तीसरा हिस्सा बाकी दो हिस्सों से धन वैभव ,विनम्रता और सुंदरता (magnificence) में ज्यादा उत्तम है और वहां की संस्कृति अपने देश की ही  तरह है। यहाँ के निवासियों के पास  बहुत भव्य घर , सूंदर निवास स्थान और खूबसूरत फर्नीचर हैं ।वे बर्बरता और कठिन जीवन से दूर एक रिफाइंड जीवन बिताते है। यहाँ के लोग अत्यंत मानवीय और व्यापारी बहुत धनी हैं ; यहाँ तक कि कुछ लोग अपने व्यापार में 40 पानी के जहाज लेकर चलते हैं , और उसमे से प्रत्येक जहाज में 50 हजार सोने के सिक्के के मूल्य का सामान भरा होता है। यूरोप की तरह वो भी खाने के लिए टेबल का इस्तेमाल करते है और चाँदी के बर्तनों का प्रयोग करते हैं । बाकी भारत के अन्य निवासी जमीन पर चटाई बिछाकर भोजन करते हैं । यहाँ शराब नहीं है और भारतियों  में शराब का प्रचलन अज्ञात है। लेकिन वे शराब जैसी कोई पेय पदार्थ चावल में पानी और कुछ वृक्षों के जूस मिलाकर तैयार करते हैं ।तप्रोवन में ताड़ी की शाखाओं को काटकर ऊपर हांडी टांग देते हैं और इन शाखाओं से मीठा रस निकलता है , जोकि इनका प्रिय पेय पदार्थ है।

✍🏻

BRICS Summit में केवल शाकाहारी भोजन परोसकर मोदी जी ने क्या कर दिया?

पॉजिटिव साइंसेज ऑफ हिंदूज

भारतीय ज्ञान का खजाना / २२ – कटपयादी संख्या का रहस्य

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
Share This Article
error: Content is protected !!
×