
जामुन सचमुच भरपूर मात्रा में गिर रहे हैं। जिन पेड़ों पर पिछले साल बहुत कम फल आए थे, वे भी इस बार जामुनों से लदे हुए हैं और जमीन पर जामुनों की बारिश कर रहे हैं। जिन पेड़ों पर पहले भी फल आते थे, वहाँ तो जामुनों की मानो चादर बिछ गई है।
आखिर यह हो क्या रहा है?
हमारी दादी हमेशा कहा करती थीं कि, “जिस गर्मी में जामुन इस तरह भरपूर मात्रा में गिरते हैं, उस वर्ष सूखा पड़ता है।”
दादी का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस रोचक और साथ ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को “मास्टिंग” (Masting) या “स्ट्रेस फ्रूटिंग” (Stress Fruiting) कहा जाता है।
पेड़ों द्वारा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अत्यधिक फल देने के इस अंतिम प्रयास को कभी-कभी “सुसाइड फ्रूटिंग” (Suicide Fruiting) या “बम्पर क्रॉप” (Bumper Crop) भी कहा जाता है।
आइए सरल भाषा में समझते हैं कि यह क्या है और इसके पीछे विज्ञान क्या कहता है।
जैसा कि विशेषज्ञ बताते हैं, यह प्रकृति का अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने का नियम है। जब किसी पेड़ को जमीन के भीतर पानी की कमी महसूस होने लगती है या उसे मौसम में बड़े बदलावों के संकेत मिलने लगते हैं, तो वह एक प्रकार के “रक्षात्मक मोड” (Defense Mode) में चला जाता है।
पेड़ को मानो यह आभास हो जाता है कि आने वाले समय में उसका जीवित रहना कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में वह स्वयं को बचाने के बजाय अपनी प्रजाति को बचाने का प्रयास करता है और अपनी पूरी ऊर्जा बीजों (फलों) के उत्पादन में लगा देता है।
ऐसे वर्षों में पेड़ नई पत्तियाँ निकालना और नई शाखाएँ बढ़ाना लगभग बंद कर देता है। इसका कारण यह है कि नई पत्तियों और शाखाओं को विकसित करने के लिए अधिक पानी और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
पेड़ उस ऊर्जा को बचाकर केवल और केवल अधिक फल पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करता है। यही वजह है कि जिन पेड़ों पर पिछले वर्ष बहुत कम फल थे, वे भी इस वर्ष फलों से भर गए हैं।
दादी का अवलोकन बिल्कुल सही है, क्योंकि पेड़-पौधे मौसम में आने वाले परिवर्तनों को मनुष्यों की तुलना में बहुत पहले और अधिक संवेदनशीलता से महसूस कर लेते हैं।
जामुन के पेड़ की जड़ें गहरी धँसने वाली मुख्य जड़ें (Taproot) होती हैं, जो जमीन के बहुत गहरे स्तर तक पहुँचती हैं।
जब भूजल स्तर अत्यधिक नीचे चला जाता है, तभी इन जड़ों को पानी की कमी का तनाव (Water Stress) महसूस होता है।
यही जल तनाव आने वाले सूखे या अत्यधिक गर्मी का संकेत हो सकता है।
इसलिए जिस वर्ष गर्मियों में जामुन असाधारण मात्रा में फल देते और गिरते दिखाई देते हैं, वह प्रकृति की ओर से भविष्य में आने वाले शुष्क काल का एक संकेत माना जा सकता है।
जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं करता, बल्कि अपनी अगली पीढ़ी (बीजों) को जन्म देने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देता है। प्रकृति का यह चक्र वास्तव में आश्चर्यजनक है।
दादी-नानी की पीढ़ियों से चली आ रही प्राकृतिक समझ और आधुनिक विज्ञान के सिद्धांत यहाँ एक-दूसरे से मेल खाते दिखाई देते हैं।
इस वर्ष जामुन का भरपूर आनंद अवश्य लें, लेकिन साथ ही प्रकृति द्वारा दिए जा रहे इस संभावित “सूखे के संकेत” को गंभीरता से लेते हुए पानी और अन्य संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करें। यही इस घटना से मिलने वाली सबसे महत्वपूर्ण सीख है।