Sshree Astro Vastu

प्रारब्ध के कर्म जन्म कुण्डली के किस भाव से देखें जाते हैं, और क्या पता चलता है।

ज्योतिष यह सिखाता है कि जीवन में जो भी घट रहा है, वह अचानक नहीं है। हर अनुभव, हर मोड़ और हर प्रतीक्षा के पीछे हमारे ही पूर्व कर्मों की छाप छिपी होती है। जन्मकुण्डली उन कर्मों के फल का क्रमबद्ध संकेत देती है। इसी क्रम में नवम भाव को विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि यही भाव प्रारब्ध, भाग्य, धर्म और पूर्व जन्म से अर्जित संस्कारों को प्रकट करता है। नवम भाव यह बताता है कि जीवन में सहायता किस रूप में आएगी और सीख किस मार्ग से मिलेगी।।

प्रारब्ध को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि उसे अनुभव करने वाला कौन है। लग्न और लग्नेश इस बात का उत्तर देते हैं। लग्न जीवन की दिशा को दिखाता है और लग्नेश वह चेतना है जो कर्मों के फल को महसूस करती है। जब लग्नेश शुभ स्थिति में होता है, तब व्यक्ति परिस्थितियों से घबराता नहीं, बल्कि उनसे अर्थ निकालता है। जब वही लग्नेश दबाव में होता है, तब जीवन के अनुभव अधिक गहरे और आत्ममंथन वाले बन जाते हैं।।

 

इसके बाद चंद्रमा की भूमिका आती है, क्योंकि चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है। प्रारब्ध केवल घटनाओं का नाम नहीं है, बल्कि उन घटनाओं को मन किस भाव से स्वीकार करता है, यही जीवन की वास्तविक गुणवत्ता तय करता है। मजबूत चंद्रमा व्यक्ति को भीतर से स्थिर बनाता है, जबकि कमजोर चंद्रमा अनुभवों को भारी बना देता है।।

 

अब नवम भाव की ओर आते हैं, जो प्रारब्ध की मौन भाषा बोलता है। नवम भाव में स्थित ग्रह यह बताते हैं कि पूर्व जन्म के कर्म इस जीवन में किस प्रकार स्वयं को प्रकट करेंगे।।

 

यदि नवम भाव में गुरु स्थित हो और वह बलवान अवस्था में हो, तो यह संकेत देता है कि व्यक्ति के जीवन में मार्गदर्शन स्वयं उपस्थित रहता है। ऐसे जातक को सही समय पर सही सलाह मिलती है, जीवन में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति अवश्य आता है जो दिशा दिखा देता है। इन लोगों का भाग्य ज्ञान, धर्म और सदाचार के माध्यम से जागृत होता है।

 

यदि नवम भाव में सूर्य स्थित हो, तो यह दर्शाता है कि व्यक्ति पूर्व जन्म में नेतृत्व, उत्तरदायित्व या धर्म से जुड़े कार्य कर चुका है। ऐसे जातक जीवन में सम्मान की खोज में रहते हैं। उनके लिए आत्मसम्मान बहुत महत्वपूर्ण होता है और उनका प्रारब्ध उन्हें अपने स्वाभिमान की रक्षा करना सिखाता है।।

 

यदि नवम भाव में शनि स्थित हो, तो जीवन की गति धीमी हो सकती है, लेकिन स्थिर होती है। ऐसे जातक को जल्दी कुछ नहीं मिलता, पर जो मिलता है वह लंबे समय तक टिकता है। शनि नवम भाव में यह संकेत देता है कि व्यक्ति को जीवन से गहराई से सीखना है और अनुभवों के माध्यम से परिपक्व बनना है।।

 

यदि नवम भाव में राहु स्थित हो, तो व्यक्ति का प्रारब्ध असामान्य मार्ग से चलता है। ऐसे जातक का जीवन सामान्य ढांचे में नहीं बंधता। उन्हें परंपरा से हटकर चलना पड़ता है, अलग सोच और अलग राह अपनानी पड़ती है। राहु नवम भाव में यह दर्शाता है कि व्यक्ति पूर्व जन्म में अधूरे प्रश्नों के उत्तर इस जीवन में खोज रहा है।।

 

नवम भाव शुभ कर्तरी में हो तो जीवन में अदृश्य संरक्षण बना रहता है। कठिन परिस्थितियों में भी कोई न कोई सहारा मिल जाता है। वहीं यदि नवम भाव पाप कर्तरी में हो, तो व्यक्ति को स्वयं के भीतर से शक्ति विकसित करनी पड़ती है और यही प्रक्रिया उसे भीतर से समृद्ध बनाती है।।

 

नवम भाव का मुख्य कारक ग्रह बृहस्पति होता है, इसलिए बृहस्पति की स्थिति प्रारब्ध को समझने की कुंजी है। बलवान बृहस्पति यह बताता है कि व्यक्ति का जीवन मूल्य, आस्था और विवेक से संचालित होगा। कमजोर बृहस्पति यह दर्शाता है कि व्यक्ति को जीवन में सही और गलत के बीच संतुलन बनाना सीखना है।

 

इसको ऐसे समझे एक उदाहरण से की,एक व्यक्ति था, जो हमेशा महसूस करता था कि उसकी राह दूसरों से मुश्किल क्यों है। उसे सफलता मिलती थी, लेकिन देर से। लोग आगे बढ़ जाते थे और वह खुद से आत्म चिंतन करता रहता था। समय के साथ उसने यह समझा कि उसकी यात्रा तुलना की नहीं, परिपक्वता की है। जब उसने धैर्य, आत्मविश्वास और अपने कर्म पर भरोसा करना सीख लिया, तब जीवन ने उसे वह स्थिरता दी जिसकी उसे तलाश थी। तब उसे एहसास हुआ कि भाग्य उसे रोक नहीं रहा था, बल्कि उसे भीतर से मजबूत और स्पष्ट बना रहा था उसको और मेहनत कर्म सही दिशा मै करने है।।

 

अंत में यही समझना आवश्यक है कि प्रारब्ध कोई बोझ नहीं है। यह आत्मा के विकास की प्रक्रिया है। जन्मकुण्डली हमें भय नहीं देती, बल्कि स्वयं को पहचानने का अवसर देती है। नवम भाव हमें यह सिखाता है कि जीवन में जो भी मिल रहा है, वह हमें कमज़ोर करने के लिए नहीं, बल्कि हमारे भीतर छिपी शक्ति को जागृत करने के लिए है। यही नवम भाव का वास्तविक संदेश और प्रारब्ध की सच्ची समझ है।।

प्रारब्ध भोग

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
Share This Article
error: Content is protected !!
×