
भेड़ों के पीछे धूप-तपती दोपहरी में घूमते हुए, मिट्टी सने पैरों से
आईपीएस के जूते तक पहुँचने का यह सफ़र आसान नहीं था।
दिनभर भटकने वाले माता-पिता के लिए आकाश में उड़ना कभी सपने में भी नहीं था,
लेकिन बिरुदेव ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया।
कठिन परिस्थितियों, अपार मेहनत और अटूट जिद के बल पर
बिरुदेव सीधे आईपीएस बने।
बिरुदेव पिछले कुछ महीनों से सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इसी दौरान उन्हें अपने परिवार से मिलने की अनुमति मिली।
इसलिए आज दादी, माँ और पिता उनसे मिलने हैदराबाद गए।
बिरुदेव की यात्रा संघर्ष, स्वाभिमान और प्रेरणा की कहानी है।
माता-पिता को विमान यात्रा कराकर उन्होंने यह साबित कर दिया
कि असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
परिस्थितियों को दोष न देकर, उन्होंने उन्हें उत्तर दिया…
जहाँ सपने भी उधार लेने पड़ते हैं,
वहाँ उन्होंने सपनों को दिशा दी…
माता-पिता के परिश्रम का ऋण चुकाते हुए
उन्हें आकाश में उड़ने का सम्मान दिलाया…
बिरुदेव ढोणे केवल एक अधिकारी नहीं हैं,
बल्कि “असंभव भी संभव है” — इस विश्वास के प्रतीक हैं।
आईपीएस बिरुदेव ढोणे को आगे की यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।