
कलयुग में शनि राजनीति का मुख्य कारक ग्रह है ! अत: शनि को बलवान करना अत्यंत आवश्यक है !
यह रात्रि में अधिक बलवान होता है तथा जिनका जन्म रात्रि का हो और शनि कुण्डली में शुभ स्थान पर हो, तब ऐसे जातक को शनि पितातुल्य पालन करता है ! जिससे बड़े-बड़े एक्सीडेंट से भी जातक सुरक्षित बाहर निकल जाता है ! लोग आश्चर्य करते हैं कि यह बच कैसे गया ? जैसे अमिताभ बच्चन की कुंभ लग्न कुण्डली में कारक ग्रह शनि चतुर्थ भाव में बैठकर जनता के दिलों में विशेष जगह बनाता है, वहीं कुंभ का कारक होकर लग्न पर शनि की पूर्ण दृष्टि होने से बड़े से बड़े एक्सीडेंट (बीमारी) से बाहर निकल आते हैं !
अत: शनि शुभत्व लिए हुए हो तब जातक को काल के गाल से भी निकाल लाता है और शनि अशुभ हो तब जातक को व्यर्थ के जंजाल एवं विपरीत परिस्थितियों में ऐसा उलझाता है कि वह सुलझने के लिए जितना प्रयास करता है, उतना ही उलझता जाता है !
कुण्डली में किस राशि में होने पर शनि क्या प्रभाव देता है :—
मेष –
शनि मेष राशि में स्थित हो तब कष्टदायक फल देता है ! यह शनि की शत्रु एवं नीच राशि है ! ऐसे जातक कुसंगति में उलझकर रह जाते हैं ! घर में झगड़े होते रहते हैं ! अनेक बार ऐसे जातक बड़े निष्ठुर एवं प्रपंची, शराबी आदि देखे गए हैं ! ऐसी स्थिति में जन्म कुण्डली के आधार पर शनि का शांति उपाय करके कष्टों से बचा जा सकता है !
वृषभ –
शनि का वृषभ राशि पर प्रभाव हो तब वह जातक मंत्रित्व पद अथवा राजनीति में शीघ्र सफलता प्राप्त करता है ! पराई स्त्रियों में आकर्षण उत्पन्न करता है ! मन में कपट रखता है ! अपने नजदीक रहने वालों को भी मन की बात नहीं बताता है ! ऐसे जातक को समझना बहुत मुश्किल होता है ! उसकी वाणी कड़वी होती है !
मिथुन –
मिथुन राशि का शनि जातक को जनता के बीच आकर्षण का केंद्र बनाता है ! कामी और क्रोधी बनाता है ! इसके हाथ प्राय: लंबे हो सकते हैं ! उसे नौकरी के जगह व्यापार में सफलता मिलती है ! यह चरित्र से भ्रष्ट हो सकता है, स्त्री से इसे कष्ट मिलता है !
कर्क –
कर्क राशि में शनि स्थित हो तब ऐसे जातक का दिल कमजोर होता है ! भावुक होने के कारण लोग इससे अपना काम निकालकर राह में छोड़ देते हैं ! इससे दांपत्य जीवन में कष्ट रहता है ! यह 15 दिन सुख और 15 दिन दु:ख में व्यतीत करता है ! इसका स्वभाव परिवर्तनशील रहता है ! इसे नौकरी में कष्ट एवं स्वयं के कार्य से लाभ होता है !
सिंह –
सिंह राशि का शनि जातक शिक्षा में अग्रसर, नौकरी करने वाला, पति-पत्नी के मध्य चिंता, पिता से विवाद, धन एवं राजकीय सुख भोगने वाला एवं मार्ग में कष्ट पाने वाला होता है !
कन्या –
कन्या राशि में शनि स्थित हो तब ऐसा जातक कैरियर में सफलता प्राप्त करने वाला, धन, पुत्र के सुख से युक्त रहता है ! ऐसा जातक वेश्याओं, पराई स्त्रियों में आसक्त एवं चरित्र से कमजोर भी हो सकता है ! फलस्वरूप जातक में नपुंसकता जैसे गुण प्रकट हो सकते हैं, यदि ऐसा हो तब जातक को अपनी कुंडली के आधार पर इससे बचाव के उपाय करना चाहिए !
तुला –
तुला में शनि केन्द्र में होने पर जातक को राजसत्ता प्राप्त होती है ! मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा के साथ ऐसा जातक दानी एवं मानी होता है ! साधु-संन्यासी एवं वक्ता, मंत्र-तंत्र एवं ज्योतिष में रुचि रखने वाला, बोल व वचन से आजीविका प्राप्त करने वाला आदि शुभ लक्षण तुला के शनि में प्राप्त होते हैं ! यह जातक विदेश से भी धन प्राप्त कर सकता है !
वृश्चिक –
वृश्चिक में शनि हो तब ऐसे जातक को स्वास्थ्य में कमी तथा शस्त्रघात के योग बनते हैं ! उसे विवाद एवं झगड़ों से हमेशा दूरी बनाए रखना चाहिए ! वह दादागिरी एवं पहलवानी में रुचि रखनेवाला होता है ! वह अतिक्रमण करने में भी चतुर होता है !
धनु –
धनु राशि में शनि वाला जातक, शस्त्र चलाने में कुशल, ज्ञानी, विद्वान, धन-संपत्ति से युक्त, कार्यकुशल, मधुरभाषी, समाज में सम्मान प्राप्त करने वाला होता है !
मकर –
. मकर राशि में शनि स्थित होने पर जातक विदेशी मुद्रा प्राप्त करने वाला, व्यापार में चतुर, पद प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला, कलाकार, चित्रकार, गुणी, रत्नों एवं जहाजों से भी धन प्राप्त करने वाला होता है ! सामाजिक कार्यों से सम्मान प्राप्त करता है ! वह धन संपत्ति प्राप्त करने वाला होता है !
कुंभ –
यह जातक द्विस्वभावी, मन में कपट रखने वाला, स्त्रियों में आसक्त, घर की मान-मर्यादा को भंग करने वाला, धन प्राप्त करने के लिए नए-नए रास्ते खोजने वाला एवं धन के लिए कुछ भी करने को तैयार रहने वाला होता है !
मीन –
मीन का शनि जातक को तत्ववेत्ता, धार्मिक, गुणी, वक्ता, शास्त्रज्ञ, रत्नपारखी, धर्मनिष्ठ बनाता है, वह ज्योतिष, तंत्र मंत्र एवं रत्न से धन प्राप्त करके आजीविका चलाने वाला होता है ! उसकी संगति अच्छे लोगों की होती है ! वह सम्मान भी प्राप्त करता है !