Author: guruji

जन्मकुंडली में दुर्घटना योग: कारण और उपाय

अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में छठे स्थान और आठवें स्थान का स्वामी किसी अशुभ ग्रह के साथ स्थित हो तो दुर्घटना होने की संभावना बनती है। वहीं अगर यहां मंगल या शनि ग्रह स्थिति है तो व्यक्ति को रक्त या हड्डी से संबंधित परेशानी हो सकती है।

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ग्रहो क़े रत्न ग्रहो की दशा और दिशा को अनुकूल करने मे सक्षम होते है लेकिन आपको किस ग्रह का रत्न लाभ देगा

ग्रहो क़े रत्न ग्रहो की दशा और दिशा को अनुकूल करने मे सक्षम होते है लेकिन आपको किस

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गहरे सूत्र

• राहु जिस भाव में है उसे भाव के लिए है पागलपन ।
• केतु जिस भाव में है उसे भाव में है खोज।
• शनि से तीसरे भाव में है अग्नि परीक्षा
• शुक्र से सप्तम भाव है आनंद दिलाने वाला भात।

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ईश्वर के सर्वव्यापी होने की मान्यता क्यों ?

जैसे बीज में छिपा वृक्ष दिखाई नहीं देता, दूध में घी मौजूद होते हुए भी दिखाई नहीं देता, तिल में तेल दिखाई नहीं देता, फूल की खुशबू दिखाई नहीं देती, शरीर में होने वाली पीड़ा दिखाई नहीं देती, अपनी बुराई दिखाई नहीं देती, वैसे ही ईश्वर सर्वत्र व्यापक रूप से विद्यमान होने पर भी दिखाई नहीं देता।

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शिव पूजा की उपासना पद्धतियां

१. शिव पूजा उपासनांतर्गत पिंडीकी पूजा
१ अ. शिवपिंडी की परिक्रमा कैसे करें ?
१ आ. शिवपिंडी की परिक्रमा करते समय अरघा के स्त्रोत को क्यों नही लांघते ?
१ इ. पिंडी को स्नान कराना
१ ई. शिवपिंडी पर हलदी-कुमकुम चढाने की अपेक्षा पिंडी को भस्म क्यों लगाएं ?

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कटोरी भर पानी: एक इंसान और पक्षियों का संवाद

एक आदमी सच में एक कटोरी पानी पक्षियों के लिए रखता है और आगे क्या होता है?
उन पक्षियों और उस आदमी के बीच क्या संवाद हुआ? इसका वर्णन नीचे दी गई कविता में किया गया है।

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सपने में कुलदेवता-कुलदेवी को देखना

सपने में कुलदेवता-कुलदेवी को देखना शुभ या अशुभ दोनों सपने हो सकते है। अगर आपको अपने कुलदेवता या कुलदेवी से अच्छे संकेत मिलते है तब यह आपके के लिए शुभ सपना है। जैसे सपने में कुलदेवी या कुलदेवता का आशीर्वाद मिलना। सपने में कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा, आरती करना। सपने में कुलदेवी या कुलदेवता मूर्ति देखना। सपने में कुलदेवी या कुलदेवता का दर्शन होना। सपने में

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श्री हनुमान जी की भक्ति और उनकी दिव्यता का महत्त्व

मित्रों, 🕉भगवान् श्री रामजी ने विभीषणजी को कहा है कि नौ जगह मनुष्य की ममता रहती है, माता, पिता, भाई, पुत्र, स्त्री, शरीर, धन, घर, मित्र और परिवार में, जहाँ जहाँ हमारा मन डूबता है वहाँ वहाँ हम डूब जाते हैं, इन सब ममता के धांगो को बट कर एक रस्सी बना।

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