
बृहत्पाराशर होराशास्त्र 11.4-11.7
`द्वितीये कुटुम्बं च तृतीये सहजं तथा।
चतुर्थे बान्धवं चापि सप्तमे दारबन्धवान्॥`
अर्थ 2H कुटुम्ब है, 3H सहोदर भाई बहन है, 4H बांधव मामा पक्ष है, 7H दारा ससुराल है। इन भावों के पीड़ित होने पर अपनों से धोखा मिलता है।
कौन सा भाव पीड़ित हो तो कौन धोखा देगा और किस तरह देगा
द्वितीय 2H में राहु केतु शनि मंगल हों तो कुटुम्ब यानी चाचा ताऊ बुआ ससुराल धोखा देते हैं। धोखे का प्रकार है पैत्रिक धन हड़पना, वसीयत दबाना, झूठी गवाही।
तृतीय 3H में राहु शनि मंगल हों तो छोटा भाई पड़ोसी मित्र पार्टनर धोखा देते हैं। धोखे का प्रकार है कॉन्ट्रैक्ट तोड़ना, चुगली, पराक्रम में अड़ंगा।
चतुर्थ 4H में केतु शनि राहु हों तो माँ मामा मौसी घर के लोग धोखा देते हैं। धोखे का प्रकार है घर से बेदखल करना, माँ को भड़काना, सुख छीनना।
सप्तम 7H में राहु केतु शनि दृष्ट हों तो पत्नी बिजनेस पार्टनर ससुराल धोखा देते हैं। धोखे का प्रकार है दहेज केस, तलाक, पार्टनर भाग जाना, पैसा लेकर गायब।
एकादश 11H में राहु केतु शनि हों तो बड़ा भाई चचेरा भाई लाभ देने वाला धोखा देता है। धोखे का प्रकार है हिस्सा मारना, उधार न लौटाना, कमीशन खाना।
लग्नेश 6-8-12 में हो तो लग्नेश शत्रु भाव में चला जाता है। तब सभी अपने धोखा देते हैं। जातक कमजोर हो तो सब फायदा उठाते हैं।
चंद्र पीड़ित हो यानी चंद्र राहु/केतु/शनि के साथ हो तो माँ पत्नी सास मौसी धोखा देती हैं। धोखे का प्रकार है भावनात्मक ब्लैकमेल, मानसिक परेशान।
गुरु अस्त/नीच हो यानी गुरु बलहीन हो तो पुरोहित कुलगुरु पिता तुल्य धोखा देते हैं। धोखे का प्रकार है गलत सलाह, धर्म के नाम पर ठगना।
दशा राहु/शनि/केतु की हो यानी क्रूर ग्रह दशा चले तो पूरा कुटुम्ब धोखा देता है। 8 से 18 साल सब अलग थलग कर देते हैं, अकेला कर देना।
चौपाई
दूजे घर पाप जब आय, कुटुम्बी धन सब हड़पाय।
तीजे शनि जो करे वास, भाई बंधु देवे त्रास॥
चौथे केतु डेरा डारे, मामा भी पीठ में मारे।
सातवें राहु छाया दे, ससुराल भी मुकदमा दे॥
ग्यारहवें शनि जब होय, बड़ा भाई भी दगा दे।
लग्नेश शत्रु घर जाय, अपने भी बैरी बन जाय॥
अनुवाद
दूसरे घर में पाप आए तो कुटुम्बी धन सब हड़प जाता है। तीसरे शनि वास करे तो भाई बंधु त्रास देते हैं। चौथे केतु डेरा डाले तो मामा भी पीठ में मारता है। सातवें राहु छाया दे तो ससुराल भी मुकदमा देता है। ग्यारहवें शनि हो तो बड़ा भाई भी दगा देता है। लग्नेश शत्रु घर जाए तो अपने भी बैरी बन जाते हैं।
अलग अलग रिश्तों से धोखे के योग
भाई से धोखा तृतीयेश 6-8-12 में हो, साथ में मंगल शनि युति हो, और 3H में राहु हो। छोटा भाई जमीन धन में धोखा देता है। एकादशेश पीड़ित हो और 11H में राहु हो तो बड़ा भाई हिस्से में धोखा देता है।
मामा मौसी से धोखा चतुर्थेश 6-8-12 में हो, साथ में 4H में केतु/शनि हो और चंद्र पीड़ित हो। ननिहाल की संपत्ति में धोखा होता है।
चाचा ताऊ से धोखा दशमेश कमजोर हो, 10H में राहु हो और 2H में शनि हो। पैत्रिक बिजनेस/जमीन में धोखा होता है।
पत्नी/ससुराल से धोखा सप्तमेश 6-8-12 में हो, 7H में राहु/केतु हो, शुक्र पीड़ित हो और कलत्र कारक शुक्र अस्त हो। दहेज/तलाक केस होता है।
मित्र/पार्टनर से धोखा सप्तमेश और एकादशेश पीड़ित हों, साथ में बुध राहु युति हो। पैसे लेकर भागना होता है।
पुत्र से धोखा पंचमेश 6-8-12 में हो, 5H में शनि/राहु हो और गुरु पीड़ित हो। बुढ़ापे में साथ न देना होता है।
दोहा
राहु केतु शनि जहाँ, जिस भाव में जाय।
सो रिश्ता बैरी बने, धोखा देवे आय॥
लग्नेश निर्बल होय जब, गुरु चंद्र बल खोय।
अपना कहलाने वाला, विष का प्याला होय॥
जातक पारिजात 15.58
`बन्धुभिर्वञ्चितो यस्तु तस्य चिह्नानि मे शृणु।
निद्रानाशो भयं चित्ते गृहे कलह नित्यशः॥`
अर्थ बंधुओं से वंचित हो उसके चिह्न सुनो। नींद नाश, चित्त में भय, घर में नित्य कलह।
लक्षण
घर में घुसते ही सिर भारी, मन उचटना
रिश्तेदार के आने के बाद काम बिगड़ना, पैसा रुकना
रात 2-4 बजे नींद खुलना, बुरे सपने
कोई अपना बिना बात लड़ पड़े, पुरानी बात निकाले
बैंक कागज कोर्ट के काम में अड़चन सिर्फ तब जब रिश्तेदार साथ हो
मदद मांगने पर सबके बहाने, जरूरत पर कोई न दिखे
स्कन्द पुराण
`बन्धुवैरप्रशान्त्यर्थं हनुमन्तं प्रपूजयेत्।
बगलामुख्या मन्त्रेण वाचं स्तम्भय शत्रुणा॥`
अर्थ बंधु वैर शांति हेतु हनुमान पूजो। बगला मंत्र से शत्रु वाणी स्तंभित करो।
3 मुख्य उपाय
हनुमान रक्षा भाई/मित्र दोष के लिए। हर मंगलवार हनुमान जी को चोला चढ़ाओ। ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् 108 बार जपो। हनुमान भाई के देवता हैं। भाई बांधव का बैर खत्म होता है।
बगलामुखी स्तंभन कुटुम्ब दोष के लिए। गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय 1 माला जपो। रिश्तेदार की कुटिल बुद्धि रुकेगी।
शिव कुटुम्ब पूजन घर जोड़ने के लिए। सोमवार को शिव परिवार यानी शिव पार्वती गणेश कार्तिकेय को कच्चा दूध चढ़ाओ। कुटुम्बं मे वर्धय बोलो। टूटा घर जुड़ता है।
दैनिक कवच
मौन व्रत केतु/राहु 2H-4H वाले सुबह 1 घंटा मौन रहें। जीभ से केस बनता है।
काले कुत्ते को रोटी शनिवार को खिलाओ। शनि राहु शांत होंगे। काला कुत्ता भैरव है, घर की नजर उतारेगा।
नींबू उतारा शनिवार को 1 नींबू 7 बार उतार कर चौराहे पर रख दो। किया कराया लौटेगा।
लिखा पढ़ी सगे भाई से भी स्टांप पर लिखो। राहु केतु मुँह से मुकरवा देते हैं।
ये गलतियां मत करना
बिना लिखा पढ़ी पैसे देना। 2H/11H में राहु केतु हों तो पैसा डूबेगा।
पार्टनरशिप अपनों से करना। 7H पीड़ित हो तो पार्टनर भागेगा, केस करेगा।
घर की बात मामा बुआ को बताना। 4H में केतु हो तो घर फूटेगा, वही बाहर करेगी।
गुस्से में रिश्तेदार को श्राप देना। गुरु/सूर्य पीड़ित हों तो श्राप उल्टा तुम्हें लगेगा।
तंत्र से तंत्र काटना। शुक्र लग्न वाले को सूट नहीं करता, घर और बिगड़ेगा।
`राहुकेतुशनिर्यत्र कुटुम्बसहजाश्रितः।
हनुमद्बगलापूजां कृत्वा मित्राणि विन्दति॥`
अर्थ राहु केतु शनि जहां कुटुम्ब सहज भाव में हों, हनुमान बगला पूजन से मित्र पाता है।
निष्कर्ष अपनों से धोखा 2H, 3H, 4H, 7H, 11H के पीड़ित होने से मिलता है।
कारण पूर्व जन्म का ऋण या इस जन्म का कर्म। जो धोखा दे रहा है वो अपना हिसाब पूरा कर रहा है।
सिद्धांत अपनों से धोखा मिले तो समझो तुम्हारा शनि राहु एक्टिव है। शनि न्याय है, राहु छल है। न्याय के लिए छल का इस्तेमाल हो रहा है।
सबसे बड़ा उपाय क्षमा + सतर्कता। माफ कर दो पर दोबारा मौका मत दो। हनुमान को पकड़ो, वो भाई हैं। बगला को पकड़ो, वो वाणी बांधेंगी। शिव परिवार को पूजो, घर जुड़ेगा।