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लग्नगत राशि फल

                  भारत मे जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि मे हो उसे जन्म राशि मानते है। यहा फलादेश लग्न मे रहने वाली राशि का है। यह तथ्य भिन्न है कि जो जन्म लग्न की राशि है वही जन्म राशि भी हो।

 

मेष लग्न फलादेश :

जातक रक्त गौर वर्ण, कफ प्रकृति, क्रोधी, कृतघ्न, मंदबुद्धि, स्त्री और नोकरो से पराजित, विदेश गमन करने वाला, कम भाई-बहन, बंधु (मित्र) वाला, ईर्ष्यालु, स्थान पदच्युत, चतुर, विशिष्ट, श्रेष्ट कार्य करने वाला होता है।

जातक विपरीत आचरण वाला, सहज मे मित्रो से ख्याति प्राप्त करने वाला, अल्पबुद्धि, कुमित्र वाला, डरपोक, स्थिर, धनवान, दुःखी, नीचकर्मी, शत्रु को पराजित करने वाला होता है। माता-पिता से अलग पैतृक संपत्ति नही प्राप्त करने वाला होता है। पत्नी सुकुमार, शीलवती, अपंग या किसी अंग मे रोग वाली होती है।

व्यवसाय – जातक उद्योग, व्यापार, कृषि मे सफलता पाता है। धातु या अग्नि कार्य में विशेष सफल होता है। मशीन, औजार, धातु के उत्पाद, कृषि-बागवानी, शल्य चिकित्सा, न्यायपालिका अथवा सेना, सुरक्षा या पुलिस या आरक्षी कार्यो से धन व आजीविका पाता है। मेष लग्न मे इंजीनियर, डाक्टर, अग्निशमन अधिकारी, यूनियन नेता, बेकरी या मिठाई या भट्टी पर काम करने वाले होते है।

 

वृषभ लग्न फलादेश :

वृषभ लग्न मे मानसिक रोगी, स्वजन से अपमानित, मित्रजनो का वियोग, कलह, दुःखी, शस्त्राघात, धनहानि, सुभग, यशस्वी, वस्त्राभूषण युक्त, अन्नलोभी, पत्नी व कन्या प्रिय, पैतृक सम्पति का अधिकारी होता है।

जातक दृढ़ वक्ष वाला, स्वजनो से कुचला जाने वाला, धर्म मे रूचि रखने वाला, कफ-वात जनित रोगो से पीड़ित, व्यापार, कृषि, जुवां, जल से धन प्राप्त करने वाला, स्थिर, चतुर, स्वयं पर निर्भर रहने वाला, कीर्ति प्राप्त करने वाला होता है। जातक की पत्नी प्रचण्डा, बंधुओ से दुर्वव्यहार करने वाली, वासना युक्त, कुयोनि वाली होती है।

व्यवसाय – मुनीम अथवा लेखापाल, धन लेनदेन, कलात्मक कार्य, रंगमंच, होटल प्रसाधन सामग्री, परिवहन, रत्न-आभूषण, भवन निर्माण, कृषि उत्पाद से आजीविका करता है। महिला सम्बन्धी काम में सफल होता है।

 

मिथुन लग्न फलादेश :

मिथुन लग्नोत्पन्न जातक मानी, स्वजनो का प्रिय, दाता, भोगी, धनी, कामी, दीर्घसूत्री, शत्रुओ को जीतने वाला, मधुर भाषी, शास्त्रार्थ  व संगीत कला मे माहिर, भोग-विलास मे रत, काम के वशीभूत, श्रेष्ट स्त्री वाला, दो माताओ वाला, चतुर, श्रेष्ठ होता है।

जातक कम या अधिक अंग वाला, विशेष कार्य करने वाला, असहनशील, नीच कुटुंब में रहने वाला, कम भाई-बहन वाला, धन व धर्म मे आलसी, रोग सहने वाला, शत्रुओ का नाश करने वाला, अंतर्मुखी, शराबी, रत्न, सोना, भूमि से हिस्सा प्राप्त करने वाला, प्रसिद्ध वक्ता, विनय पूर्वक व्यवहार करने वाला होता है।

व्यवसाय – पढ़ने पढ़ाने और लिखने पढ़ने मे सफल होता है। लेखक, पत्रकार, सम्पादक, प्रोफ़ेसर या अध्यापक, संचार कार्य, डाक, दूरभाष, दूरदर्शन, रेडियो, पर्यटन प्रबंधक, यात्रा अभिकर्ता, वाणिज्य-व्यापार, साझेदारी, औषधि उद्योग, वस्त्र उद्योग से आजीविका करता है।  आयत-निर्यातक, इंजीनियर, डाक्टर, लेखाधिकारी बनकर धन अर्जित करता है।

 

कर्क लग्न फलादेश :

कर्क लग्नोत्पन्न जातक विषम स्वभाव वाला, अकेला नही रहने वाला, ब्राह्मण-देवताओ का भक्त, दया सहित दान करने वाला, वायु-कफ से पीड़ित, डरपोक, चंचल, दूसरो का धन भोगने वाला, पूज्यवान कुल वाला, दुष्ट पुत्र वाला, अच्छे भाई-बहन व श्रेष्ट कन्या वाला, वाचाल, कामी, बहुत आत्माओ को जीतने वाला होता है।

जातक कुलीन पत्नी वाला, धन-धान्य आभूषण से युक्त, साहसी, धैर्यवान, विदेश गामी, दुष्ट मित्रो वाला, हमेशा अहित एवं पापाचरण करने वाला, धर्मात्मा, भोगी, सबका प्रिय, धनवान, ईमानदार, संवेदनशील, भावुक, प्रतिभा संपन्न, परिश्रमी होता है।

व्यवसाय – रचनात्मक कार्यो मे सफल होता है।  जल, परिवहन, समुद्री उत्पाद, रासायनिक द्रव्य, डेयरी या कपडा उद्योग, जवाहरात, स्वल्पाहार गृह से जीविका होती है। अभिनय, नृत्य, संगीत, नर्स, चिकित्सक, शस्त्र सञ्चालन, विस्फोटक पदार्थ, शास्त्र आदि से जीविकापार्जन होती है।

 

सिंह लग्न फलादेश :

सिंह लग्नोत्पन्न जातक भोगी, शत्रु को जीतने वाला, पतली कमर, पुष्ट व मांसल देह, उत्साही, रण मे पराक्रमी,  वन-पर्वत घूमने वाला, भूख सहने वाला, कुटुम्ब का कार्य करने वाला, भाई, मित्रो मे चित्त रखने वाला होता है।

जातक आकर्षक, सिंह के सामान मुख वाला, नृपतुल्य, धैर्यवान, गम्भीर, साहसी, विलास प्रिय, अल्प भाषी, भाई-बंधु के प्रति दयालु, दुःख सहने मे अत्यंत क्रोधी, अभिमानी, आडम्बरी, खर्चीला, वायु रोग से पीड़ित, धर्म से विमुख, मांसाहारी, शिकार शौकीन होता है।

व्यवसाय –  कार्यक्षेत्र मे उन्नति से महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करता है। स्वर्णाभूषण, कलाकृति, संगमरमर, प्रबंध व्यवस्था, सरकार, सेना, राजनीति, उद्योग, होटल, पशु प्रजनन, कृषि, वन उत्पाद से जीविका होती है।  भूविज्ञान या तकनीक, अनुसन्धान, खेलकूद, अभिनय आदि से मान-सम्मान, धन-यश प्राप्त होता है।

 

कन्या लग्न फलादेश :

कन्या लग्नोत्पन्न जातक मृदुभाषी, दयावान, कामी, सुन्दर, सुभग, दान देने मे विनम्र, प्रेमी, स्वजाति मे पूज्य, बलवान, परिवार पालक, स्त्रियो का अहित करने वाला, पापी व शत्रु  के विरुद्ध, क्रोधी, द्वेषी होता है।

जातक महिला अनुरागी, विलासी, साहसी, यश का इच्छुक, पर धन लोभी, घुमक्कड़, द्विस्वभाव वाला, मंदगति से संतान प्राप्त करने वाला, धर्मरत, अभिमानी, शास्त्र अनुवादक, सौभाग्य और गुणो से संपन्न, खुशमिजाज, अल्हड, सुरूप, सूरत प्रिय होता है।

व्यवसाय – बुद्धिबल आधारित हिसाब-किताब, लेखा, प्रबंध व्यवस्था, लेखन, पत्रकारिता, सर्वेक्षण, सांख्यकी संग्रह, सूचना प्रसारण, अभिनय या गायन, कला, आभूषण, वाहन, व्यापार से अर्थ कमाता है।

 

तुला लग्न फलादेश :

जातक बुद्धिमान, पंडित, सब कलाओ मे निपुण, धनी लोकमान्य, सुकर्म से जीविका करने वाला होता है। सफ़ेद,  काला, लाल रंग प्रिय, अल्प आय वाला, विषयी, वक्ता, धर्म भीरु या धर्म मे रत, अत्यंत दुखी होता है।

जातक देश मे घुमने वाला, कफ-वायु से पीड़ित, इतिहास या पुराण ज्ञाता, कलह करने वाला, प्रिय पत्नी वाला, गुरु ब्राह्मण का कृतज्ञ व पूजक, कुलीन, पिता का प्रिय, सम्मानित, पापी, भाई-बंधु वाला, अल्प शक्तिवान, निर्बल शत्रु वाला, काव्य निपुण होता है।

व्यवसाय – न्यायाधीश, अभिभाषक, जोहरी, अभिनेता, दिग्दर्शक, निर्देशक  आदि से जीविका होती है। सौन्दर्य प्रसाधन. सजावट, बहुमूल्य पोशाक विक्रय से धनोपार्जन होता है। फल, शब्जी, अनाज विक्रय, विमान या अंतरिक्ष कार्य, रबड़, प्लास्टिक उद्योग, वाहन चलन, मरम्मत कार्य धन दायक होते है।

वृश्चिक लग्न फलादेश :

जातक धनी, आत्मविश्वाशी, शूर, ज्ञानी, कुल मे श्रेष्ट, विवेकी, परिवार पोषक, रक्तल्पता के कारण पीतवर्णी, भूरे नेत्र, पित्त से पीड़ित, विश्वासघाती, माता का अनिष्ट करने वाला होता है।

जातक अचल साहसी, विषम स्वभावी, थोड़े भाई-बहन बंधु वाला, दूसरो का अन्न खाने वाला, महारोगी, शत्रुओ से झगड़ा करने वाला, शूरवीर, पर स्त्री गामी, राजसेवक, पाप से धनी, दूसरो पर आश्रित, दानी, समृद्ध नारी मे निरत, नाचने वाला होता है।

व्यवसाय – उद्योग, व्यापार, सुरक्षा, सेना, पुलिस, कर्मचारी, सेवक, रसायन, औषधि, विज्ञान, मन्त्र, तंत्र, गुप्त विद्या, कला, शासकीय कार्य, लोहा-स्पात कार्य, कोर्ट-कचहरी कार्य, दाल-मसाले, उपभोक्ता वस्तु से जीविका होती है। जहाजरानी, समुद्री तट, स्त्रियो से सम्बन्धी वस्तुओ का कारोबार लाभप्रद होता है।

 

धनु लग्न फलादेश :

जातक नीतिज्ञ, धनी, बुद्धिमान, लोकपूज्य कुल मे श्रेष्ट, पौत्रादि से युक्त, बुद्धिमानो से दूर रहने वाला, ब्रम्हतत्व का ज्ञाता, शत्रुहंता, पुष्ट देह, बड़ी आँखे, कुरूप नख, स्थूल भुजा, जाँघे, वक्ष वाला, सुन्दर नाक कान वाला होता है। जातक परोपकारी, शास्त्रो का ज्ञाता, क्रोधी, मृदुभाषी, कुलीन, सत्यवक्ता, स्वधन स्वयं के लिए उपयोग करने वाला, भाइयो का प्रिय, कला रत, शांतिपूर्वक शत्रुहंता, बहु पुत्रवान, कफ-वात, नेत्र-कान रोगी, नीच कार्य करने वाला, राजा या श्रेष्ठिजनो पर आश्रित होता है।

व्यवसाय – जातक अध्ययन, अध्यापन, प्रबंधन, परामर्श, दर्शन, प्राध्यापक, व्याख्याता, लेखक, प्रकाशक, पुस्तकालय अध्यक्ष, विधायक, मंत्री, सचिव, वकील, पुजारी से जीविकापार्जन करता है। यह सेना कमांडर, लेखाकार, इंजीनियर, चिकित्सक, घुड़सवार, खिलाडी, पशु चिकित्सक, ज्योतिषी भी होता है।

 

मकर लग्न फलादेश :

मकर लग्नोत्पन्न जातक नीच कर्म मे रत, आलसी, दुश्चरित्र, बहु संतानि, खर्चीला, मृग के सामान डरपोक, सुंदर, साहसी, कोमल प्रकृति, मादक नयन, शरीर पर बहुत रोम वाला, विस्तृत वक्ष, भूखा रहने वाला, वन-पर्वत घुमने वाला होता है।

जातक संगीत में रुचिवान, दुर्बल देह, घायल अंग वाला, पत्नी आलसी लेकिन सुन्दर, खर्चीला, धर्म हेतु प्रवासी, राज्य से कला द्वारा धनी, साहसी, अनेक पुत्री वाला, नीच कुटम्बी, स्त्रियो के वशीभूत, दुःखी धूर्त होता है।

व्यवसाय – जातक प्रभुता संपन्न, प्रतिष्ठित होता है।  द्रव्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, रसायन या पेय पदार्थ, कृषि या बागवानी उपकरण विक्रय से आजीविका करता है। ये कुशल प्रबंधक, भवन निर्माता, दन्त चिकित्सक, ग्रामीण और कुटीर उद्योगी, बैंक अधिकारी, लोक कार्य प्रशासक, संघठन कर्ता होते है। कभी-कभी ईश्वर उपासना, ध्यान  योग-समाधि, कथा वाचन से भी धन कमाते है।

 

कुम्भ लग्न फलादेश :

कुम्भ लग्नोत्पन्न जातक श्रेष्ट कुल का होकर हीन व मलिन कार्यरत, कलह करने वाला, स्वेच्छाचारी, क्रोधी, पिपासु (प्रश्न करने वाला) कफ-वायु से पीड़ित, भूसम्पदा हेतु चिंतित, दुर्जन, अपयशी, अधिक कर्मनिष्ठ, महा आलसी, जुएं और स्त्री मे रत, प्रवासी, खर्चीला, माता से त्यक्त होता है।

जातक निन्दित कर्मी, दुष्ट व्यवहारी, कलह करने वाली स्त्री प्राप्त करता है। मित्रो का हितेषी, धूर्तो से द्वेष करने वाला, कफ विकारी, परिश्रमी, स्थिर बुद्धि, दुष्ट व द्वेषी से मैत्री करने वाला, पर स्त्री रत, विदेश वासी, भाग्य मे उतार-चढाव और उलट-फेर सहने वाला, हताशा युक्त होता है।

व्यवसाय – जातक प्रतिभा संपन्न, बुद्धिजीवी होता है।  विज्ञान, पुरातत्व, ज्योतिष, साहित्य, कम्प्यूटर के क्षेत्र मे सफल होता है। अग्नि शमन सेवा, विद्युत इंजीनियरी, सेना अथवा आयुध से जीविका होती है। अंतरिक्ष विज्ञान, रेडियो, दूरदर्शन, अनुसन्धान कार्य से धन व यश प्राप्त होता है। कोई-कोई जातक समाज सेवक, स्थानीय निकाय अधिकारी, लेखक, पायलेट होता है।

 

मीन लग्न फलादेश :

मीन लग्नोत्पन्न जातक रत्न सुवर्ण से परिपूर्ण, अल्पकामी, कृश शरीर, सोच विचार कर कार्य करने वाला, बुरे कर्मो मे रत, अपराधी,  साहसी, धार्मिक, विनम्र, सुन्दर मुख मंडल वाला होता है।

जातक नृत्य और गायन कला मे निपुण, कन्या संतति वाला, अनुभवी, विश्वासी, कीर्तियुक्त, धनवान, बड़े कुटुंब वाला, असहनशील, तेजस्वी, उदार फल हेतु परिश्रमी, धैर्यशाली, करुणाशाली, निर्बल शत्रु वाला, लम्बे हाथ वाला, रोगी किन्तु शीघ्र स्वास्थ्य लाभी होता  है।  विष से मृत्यु या कष्ट को प्राप्त होता है।

व्यवसाय – जातक जल सम्बन्धी कार्य, समुद्र से आयत निर्यात, जलाशय या बांध निर्माण, जल व पेय पदार्थो से जीविकापार्जन करता है। होटल, रेस्टारेंट, अस्पताल, आध्यात्मिक चिकित्सा, कला अभिनय, फोटोग्राफी, सौन्दर्य प्रसाधन से धन अर्जित करता है।

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
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