
वैदिक शास्त्रों और शास्त्रों के अनुसार, कलश पर नारियल को हमेशा लेटाकर (क्षैतिज/Horizontal) इस तरह रखना चाहिए कि उसका “मुख” (जिस तरफ तीन आंखें या डंठल होता है) सीधे पूजा करने वाले (साधक) की ओर हो।
कलश स्थापना के समय नारियल की दिशा बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। गलत तरीके से नारियल रखने पर पूजा का पूरा फल नहीं मिलता और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
शास्त्रीय नियम (श्लोक)
नारियल की सही दिशा को लेकर शास्त्रों में एक बहुत ही प्रसिद्ध श्लोक बताया गया है:
गलत दिशा में नारियल रखने के नुकसान:
नारियल स्थापित करने की सही विधि
4- लेटाकर स्थापित करें: अब तैयार किए गए नारियल को पत्तों के ऊपर लेटाकर (Horizontal) रखें। यह पक्का कर लें कि नारियल की तीन आंखों वाला मुख सीधे आपकी तरफ देख रहा हो।
(नोट: कुछ विशेष क्षेत्रीय परंपराओं में नारियल को सीधा खड़ा भी रखा जाता है ताकि वह देवता के मुख का प्रतीक लगे, लेकिन अधिकांश शास्त्रीय ग्रंथों में इसे साधक की ओर मुख करके लेटाना ही सबसे उत्तम और प्रामाणिक माना गया है।)