
सप्तम भाव या सप्तमेश पर शनि की युति अथवा दृष्टि हो तो जीवनसाथी की उम्र में अंतर होने की संभावना बढ़ सकती है; कई मामलों में साथी अधिक परिपक्व या उम्र में बड़ा हो सकता है।
शुक्र के साथ शनि की युति हो या शनि की दृष्टि शुक्र पर पड़े तो प्रेम और विवाह में उम्र से अधिक परिपक्व व्यक्ति की ओर आकर्षण हो सकता है।
सप्तमेश शनि की राशि मकर या कुंभ में हो और शनि से संबंध बनाए तो जीवनसाथी की आयु, सोच या व्यवहार में स्पष्ट परिपक्वता दिखाई दे सकती है।
सप्तम भाव/सप्तमेश पर राहु की युति या दृष्टि हो तो परंपरागत विवाह से अलग परिस्थिति बन सकती है।उम्र, जाति, संस्कृति या सामाजिक पृष्ठभूमि में अंतर संभव है
शुक्र-राहु की युति हो और सप्तम भाव/सप्तमेश से संबंध बने तो सामान्य सामाजिक मान्यताओं से अलग संबंध या उल्लेखनीय आयु-अंतर वाले साथी की ओर आकर्षण हो सकता है।
सप्तमेश अष्टम या द्वादश भाव से संबंध बनाए और शनि/राहु का प्रभाव भी हो तो विवाह की परिस्थितियाँ सामान्य से अलग हो सकती हैं, जिनमें उम्र का अंतर भी एक संकेत हो सकता है।
नवांश में सप्तम भाव, सप्तमेश या शुक्र पर शनि/राहु का मजबूत प्रभाव हो तो जन्मकुंडली में बने आयु-अंतर के संकेत को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
केवल एक योग से उम्र का अंतर निश्चित नहीं होता। D1 और नवांश में सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र तथा विवाह की दशा का संयुक्त अध्ययन आवश्यक है।